172 साल पुराने एसएन मेडिकल कॉलेज में मरम्मत के बाद भी बदहाल भवनों पर सवाल; 41 पुराने भवनों को तोड़ने का प्रस्ताव, पांच भवनों में अभी भी चल रहा इलाज
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 25 अगस्त 2026, 07:10:31 AM IST

tajnews.in | आगरा: सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) की जर्जर इमारतों की हालत पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज परिसर में वर्षों से मरम्मत के नाम पर काम कराए जाने के बावजूद कई भवनों में छत से प्लास्टर गिरने, दीवारों से ईंटें झड़ने और सरिया बाहर निकलने की स्थिति सामने आई है। ऐसे में मरीजों, तीमारदारों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की इमारत करीब 172 वर्ष पुरानी बताई जा रही है। कॉलेज के इंटीग्रेटेड प्लान में परिसर के 41 पुराने भवनों को तोड़े जाने का प्रस्ताव है। इनमें से पांच भवनों में अभी भी मरीजों का इलाज और भर्ती का काम चल रहा है। ऐसे में इन भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और लगातार कराई जा रही मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
2021 में इंटीग्रेटेड प्लान मंजूर, फिर भी जर्जर भवनों का संकट
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में इंटीग्रेटेड प्लान मंजूर हुआ था। इसके तहत परिसर के पुराने 41 भवनों को हटाकर नई व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसी योजना में लेडी लॉयल अस्पताल को भी एम्स की तर्ज पर विकसित किए जाने का प्रस्ताव शामिल था।
हालांकि पुराने भवनों को हटाने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इन्हीं में कई चिकित्सा विभाग संचालित होते रहे। वर्तमान में मेडिसिन विभाग, एकेडमिक ब्लॉक, नेत्र रोग, बाल रोग विभाग और ओपीडी कॉम्प्लेक्स में मरीजों का उपचार एवं भर्ती का काम किया जा रहा है।
छत से गिर रहा प्लास्टर, दीवारों से झड़ रही ईंटें
जर्जर भवनों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई स्थानों पर छत का प्लास्टर उखड़कर नीचे गिर चुका है। कुछ दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं और कई जगह सरिया बाहर निकल आई है।
नेत्र रोग विभाग की छत भी खराब हालत में बताई गई है। यहां पुरुष वार्ड के बगल में छत से कई जगह प्लास्टर उखड़ चुका है। भवन में कई स्थानों पर दरारें और खिड़कियों के आसपास टूट-फूट की स्थिति सामने आई है।
बाल रोग विभाग में दो वार्डों की छत टूटी
सबसे गंभीर स्थिति बाल रोग विभाग के दो वार्डों की बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में यहां तीन बार मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद छत की हालत खराब बनी हुई है।
कई जगह छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। जगह-जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ है और सीवेज लाइन चोक होने की शिकायत भी सामने आई है। पानी टपकने की समस्या भी बताई गई है।
बाल रोग विभाग में बच्चों का उपचार होने के कारण जर्जर छत और गिरते प्लास्टर की स्थिति मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से विशेष चिंता का विषय है।
ओपीडी कॉम्प्लेक्स में भी हालत चिंताजनक
ओपीडी कॉम्प्लेक्स के भवन में भी जर्जरता के निशान दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यहां बाल रोग, मानसिक रोग, एआरटी सेंटर और मधुमेह की ओपीडी संचालित हो रही हैं। मरीजों की भारी आवाजाही वाले इस भवन में भी दीवारों की स्थिति खराब बताई गई है।
गर्ल्स हॉस्टल की शिफ्टिंग के बाद यहां ओपीडी शुरू की गई थी। अब भवन की स्थिति को देखते हुए प्लास्टर और ईंटें गिरने का खतरा चिंता का विषय बना हुआ है।
एकेडमिक ब्लॉक में झांक रही सरिया
एकेडमिक ब्लॉक की स्थिति भी बेहतर नहीं बताई गई है। यहां लेक्चर रूम, एसपीएम, फोरेंसिक, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी जैसे विभाग संचालित हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस भवन में दो-तीन बार मरम्मत हो चुकी है, लेकिन कई स्थानों पर दरारें अब भी दिखाई दे रही हैं। कुछ जगह प्लास्टर टूटने के कारण सरिया बाहर तक दिखाई देने लगी है।
ऐसे भवनों में विद्यार्थियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों की नियमित आवाजाही रहती है। इसलिए भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मरम्मत पर खर्च, लेकिन समस्या बरकरार
जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए समय-समय पर बजट जारी कर काम कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद कुछ भवनों में समस्या दोबारा सामने आने से मरम्मत कार्य की गुणवत्ता, निरीक्षण व्यवस्था और भवनों की वास्तविक स्थिति के आकलन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मरम्मत पर हुए खर्च के बावजूद भवनों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों की स्वतंत्र जांच या किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट मौजूद नहीं है। इसलिए भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि मानकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
प्राचार्य बोले- भवन सालों पुराने, ऑडिट के बाद बनेगी कार्ययोजना
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि भवन कई साल पुराने हैं और जरूरत के अनुसार उनकी मरम्मत कराई गई है। उन्होंने बताया कि भवनों का ऑडिट कराया जा रहा है और ऑडिट रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पुरानी इमारतों में लगातार मरम्मत की जरूरत और दूसरी ओर नए भवनों की आवश्यकता के बीच मेडिकल कॉलेज के सामने बड़ी चुनौती यह है कि मरीजों का उपचार प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा से भी कोई समझौता न हो।
फिलहाल जर्जर भवनों में चल रहे चिकित्सा विभागों की स्थिति को देखते हुए भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा का विस्तृत तकनीकी परीक्षण, मरम्मत कार्यों का गुणवत्ता परीक्षण और जोखिम वाले हिस्सों की तत्काल पहचान जरूरी है, ताकि किसी अप्रिय घटना से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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