uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Monday, 06 July, 2026, 07:44:32 AM IST.

tajnews.in | लखनऊ: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामधन (चढ़ावा) चोरी से जुड़े बहुचर्चित महाघोटाले में जांच का दायरा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आरोपियों की ऐशो-आराम और विलासितापूर्ण जिंदगी के सनसनीखेज सच उजागर हो रहे हैं। देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए प्रभु के धन पर डाका डालकर शातिर अपराधियों ने जमकर मौज-मस्ती की और विलासिता के साधनों पर पानी की तरह पैसा बहाया। पुलिस तफ्तीश में यह अत्यंत चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महज 15 हजार रुपये मासिक मानदेय पर काम करने वाले आरोपी अविनाश शुक्ला ने गबन की राशि से न केवल अपना आलीशान मकान बनवाया और महंगी गाड़ियां खरीदीं, बल्कि अपनी एक महिला मित्र के बैंक खाते में भी लाखों रुपये ट्रांसफर किए। इतना ही नहीं, अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार के रूप में आईफोन भी गिफ्ट किया गया। पुलिस प्रशासन अब इस गबन की गई भारी भरकम राशि को खपाने और छिपाने वाले सभी ठिकानों का पूरा वित्तीय ब्योरा खंगालने में जुटा हुआ है।
पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि करने के लिए सभी नामजद आरोपियों सहित उनके निकटतम पारिवारिक सदस्यों के बैंक खातों का विस्तृत विवरण (बैंक स्टेटमेंट) निकलवाया गया है। इन खातों के बैक-एंड ट्रांजैक्शन की गहन जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय विसंगतियां और संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं, जिससे यह अकाट्य रूप से प्रमाणित होता है कि मंदिर के खजाने से चोरी की गई राशि को विभिन्न खातों में इधर से उधर ट्रांसफर किया गया था। इस कड़ी में जब अविनाश शुक्ला के बैंक विवरण को खंगाला गया, तो पता चला कि उसके खाते से दो लाख रुपये की एक बड़ी राशि किसी अन्य खाते में भेजी गई थी, जो जांच के बाद उसकी एक महिला मित्र का पाया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त महिला मित्र के बयान दर्ज कर लिए हैं और डिजिटल साक्ष्यों को केस डायरी का हिस्सा बनाया है। अचानक आए इस अकूत धन के संबंध में आरोपियों के पास कोई भी संतोषजनक वैधानिक जवाब नहीं है, जिससे पुलिस का यह अंदेशा हकीकत में बदल गया है कि यह पूरा पैसा श्रद्धालुओं के चढ़ावे का ही था।
इस संवेदनशील घोटाले के पीछे केवल आंतरिक सुरक्षा की खामियां ही नहीं थीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली की भी घोर लापरवाही उजागर हुई है। यह प्रामाणिक तथ्य प्रकाश में आया है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अयोध्या धाम शाखा में जब प्रतिदिन मंदिर का भारी-भरकम चढ़ावा जमा करने के लिए लाया जाता था, तो बैंक प्रशासन के पास इतनी बड़ी नगदी को सुरक्षित रूप से रखने के लिए पर्याप्त तिजोरियां या स्थान ही उपलब्ध नहीं होता था। ऐसी स्थिति में, बैंक अधिकारियों द्वारा अत्यधिक सुरक्षा जोखिम उठाते हुए उस नगदी को आनन-फानन में अन्य स्थानीय शाखाओं में स्थानांतरित कर दिया जाता था। देश के इतने बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल के नगद प्रबंधन को लेकर इस प्रकार का लचर और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपराधियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा लूपहोल साबित हुआ, जिसका फायदा उठाकर उन्होंने इस सुनियोजित चोरी को अंजाम दिया।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर इस बात की भी पुरजोर चर्चा है कि इस आपराधिक कृत्य में शामिल कुछ मुख्य आरोपियों के तार विभिन्न राजनीतिक दलों के रसूखदार नेताओं से जुड़े हुए थे। चर्चाओं के अनुसार, आरोपी टिन्नू यादव और उसके कुछ अन्य साथी लगातार कुछ स्थानीय राजनेताओं के संपर्क में थे और उनके मध्य नियमित रूप से बातचीत होती थी। यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि एक आरोपी ने स्वयं ही इस चोरी की गुप्त सूचना किसी नेता तक पहुँचाई थी ताकि इस संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा राजनैतिक बवाल खड़ा हो सके, परंतु उसे इस बात का बिल्कुल भान नहीं था कि इस कानूनी जांच के जाल में वह स्वयं सबसे पहले फंस जाएगा। यद्यपि, प्रशासनिक स्तर पर इस राजनीतिक सांठगांठ की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और इसे केवल जांच का एक संभावित बिंदु माना जा रहा है।
इस महाघोटाले का एक और सबसे गंभीर पहलू यह है कि मामले में नामजद आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ही नहीं, बल्कि एक अन्य मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का अत्यंत करीबी और अटूट भरोसेमंद कार्यकर्ता बन चुका था। सोशल मीडिया पर प्रसारित विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेजों और तस्वीरों से यह साफ प्रमाणित होता है कि ट्रस्ट के बड़े आयोजनों में उसकी भूमिका एक प्रमुख व्यवस्था कार्यकर्ता के रूप में हुआ करती थी। उसे वर्ष प्रतिपदा समारोह के साथ-साथ दीपावली उत्सव के लिए विशेष प्रवेश पत्र निर्गत किए गए थे, जिनकी वैधता अवधि 31 अक्तूबर, 2024 तक दर्ज है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट के नीति-निर्धारकों के मध्य उसकी कितनी गहरी पैठ थी। इतना ही नहीं, अनुकल्प मिश्रा के निजी आवास पर आयोजित एक धार्मिक कथा के दौरान स्वयं चंपत राय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूर्व में जब ६ जून को यह मामला पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया था, तब केवल टिन्नू यादव को ही मुख्य सूत्रधार माना जा रहा था, परंतु अब कड़ियों को जोड़ने के बाद पुलिस अनुकल्प मिश्रा को भी इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड स्वीकार कर रही है। अनुकल्प ने विभिन्न सार्वजनिक मंचों और राम मंदिर के बड़े कार्यक्रमों में जिले के शीर्ष जनप्रतिनिधियों, जैसे जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक चंद्रभानु पासवान, भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम त्यागी और वरिष्ठ नेता खुन्नू पांडेय आदि के साथ विशिष्ट रूप से मंच साझा कर तस्वीरें खिंचवाई थीं। यद्यपि वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी सार्वजनिक या सामाजिक धार्मिक आयोजन में किसी प्रतिष्ठित जनसेवक के साथ तस्वीर होना संलिप्तता का विधिक प्रमाण नहीं हो सकता, फिर भी पुलिस इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी के सभी पुराने राजनैतिक और सामाजिक संबंधों को गहराई से खंगाल रही है ताकि इस खूनी खेल या बड़ी डकैती में शामिल पर्दे के पीछे के सभी चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
यह भी पढ़ें

Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
7579990777




