लखनऊ में 2,799 रुपये की मोबाइल EMI के लिए युवक को बंधक बनाने का आरोप, ब्लड बैंक ले जाकर खून निकलवाने का भी दावा

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पांच दिन तक बंधक बनाकर रखने और जबरन मजदूरी कराने का आरोप, 12,500 रुपये की अतिरिक्त मांग; मुकदमा दर्ज, तीन पुलिस टीमें गठित

लखनऊ डेस्क, 🌐 tajnews.in | मंगलवार, 15 सितंबर 2026, 05:05:15 PM IST

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लखनऊ डेस्क

tajnews.in | लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में मोबाइल फोन की किस्त वसूलने के नाम पर एक युवक को कथित तौर पर बंधक बनाने, मारपीट करने, जबरन मजदूरी कराने और ब्लड बैंक ले जाकर खून निकलवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने युवक के बड़े भाई से पहले 2,799 रुपये ऑनलाइन मंगवाए और बाद में 12,500 रुपये की अतिरिक्त मांग की। रकम नहीं देने पर युवक को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी भी दी गई।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमों का गठन किया गया है। साथ ही शुरुआती स्तर पर पुलिस की कथित लापरवाही की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

HIGHLIGHTS
  • लखनऊ के निगोहां में मोबाइल ईएमआई वसूली के नाम पर युवक को पांच दिन बंधक बनाने का आरोप।
  • आरोपियों पर ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाने और जबरन मजदूरी कराने का गंभीर दावा।
  • 2,799 रुपये वसूलने के बाद 12,500 रुपये और मांगे, गोमती नदी में फेंकने की दी धमकी।
  • डीसीपी साउथ के निर्देश पर मुकदमा दर्ज, आरोपियों की तलाश में जुटीं तीन पुलिस टीमें।

21,500 रुपये का मोबाइल और 2,799 रुपये की किस्त

राजारामखेड़ा मजरा पुरहिया गांव निवासी नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की एक मोबाइल शॉप से जीरो डाउन पेमेंट पर करीब 21,500 रुपये का सैमसंग मोबाइल खरीदा था। परिवार के मुताबिक, फोन की 12 मासिक किस्त 2,799 रुपये तय हुई थी। आरोप है कि पहली किस्त बकाया होने पर दुकान से जुड़े कुछ लोग युवक के घर पहुंचे और मोबाइल अपने साथ ले गए। परिवार का कहना है कि इसके बाद मामला शांत हो गया था। लेकिन करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ लेकर चले गए।

ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाने का आरोप

परिजनों के मुताबिक, नेवल को लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया। आरोप है कि वहां उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। परिवार का यह भी आरोप है कि युवक से कई दिनों तक जबरन मजदूरी कराई गई। हालांकि, ब्लड बैंक का नाम और वहां रक्त निकाले जाने की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह पहलू पुलिस जांच का हिस्सा है।

पहले 2,799 रुपये, फिर 12,500 रुपये की मांग

परिजनों के अनुसार, बंधक बनाए जाने के दौरान आरोपियों ने नेवल से उसके बड़े भाई राजकुमार को फोन कराया। मोबाइल की किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन भेजने को कहा गया। परिवार ने बताए गए यूपीआई माध्यम से रकम भेज दी। आरोप है कि इसके बाद भी नेवल को नहीं छोड़ा गया और 12,500 रुपये की अतिरिक्त मांग की गई। परिवार का कहना है कि अतिरिक्त रकम देने में असमर्थता जताने पर आरोपियों ने नेवल को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी।

पांच दिन बाद थाने पहुंचा युवक

परिजनों ने युवक के लापता होने और उसके साथ अनहोनी की आशंका को लेकर पुलिस से संपर्क किया। आरोप है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद करीब पांचवें दिन नेवल को एक रैपिड कैब से थाने भेजा गया। कैब का किराया भी उसके भाई से ही दिलवाए जाने की बात सामने आई है। परिजनों के मुताबिक, थाने पहुंचने के समय नेवल बदहवास हालत में था और तत्काल पूरी घटना ठीक से नहीं बता पा रहा था। बाद में घर पहुंचने पर उसने परिवार को अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी दी।

डीसीपी से शिकायत के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

परिवार का आरोप है कि शुरुआत में निगोहां थाने में शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित की मां और भाई ने डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी दी। डीसीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए तीन टीमें गठित की हैं। इसके साथ ही थाने के स्तर पर हुई कथित लापरवाही की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

पुलिस के सामने कई अहम सवाल

इस मामले में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। युवक को घर से अपने साथ ले जाने वाले लोग कौन थे? उनका मोबाइल दुकान या किसी रिकवरी एजेंसी से क्या संबंध था? युवक को किस स्थान पर रखा गया? उसे किस ब्लड बैंक में ले जाया गया और वहां वास्तव में रक्त निकाला गया या नहीं? यदि रक्त निकाला गया तो किस प्रक्रिया के तहत और किसके नाम पर रक्त लिया गया, यह भी जांच का विषय है। पुलिस युवक के मोबाइल फोन, यूपीआई भुगतान, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के मोबाइल नंबरों की जांच के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

रिकवरी के नाम पर कानून हाथ में लेने का आरोप

मोबाइल की किस्त बकाया होना एक वित्तीय विवाद हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को कथित तौर पर जबरन घर से ले जाना, बंधक बनाना, मारपीट करना, जबरन मजदूरी कराना या धमकी देना गंभीर आरोप हैं। अब पुलिस की जांच यह तय करेगी कि इस पूरे घटनाक्रम में वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल थे और युवक के साथ क्या-क्या हुआ। ब्लड बैंक में रक्त निकाले जाने के आरोप की पुष्टि या खंडन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News


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