सड़क पर पैदल चलने की जंग: सुरक्षित फुटपाथ हमारा संवैधानिक अधिकार, रिवर कनेक्ट कैंपेन ने नगर निगम कमिश्नर को सौंपा पत्र

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Agra Desk, 🌐 tajnews.in | Thursday, 09 July, 2026, 03:35:10 PM IST.

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tajnews.in | आगरा: शहर के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्ततम मार्गों में शुमार यमुना किनारा मार्ग पर पैदल चलने वाले लाखों नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो गया है। हाथी घाट से लेकर वॉटर वर्क्स चौराहे तक सुरक्षित पैदल मार्ग यानी फुटपाथ के अभाव में हर दिन नागरिकों की जान संकट में पड़ रही है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रसिद्ध पर्यावरण संस्था ‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संस्था के संयोजक बृज खंडेलवाल ने नगर निगम के आयुक्त को एक औपचारिक और कड़ा पत्र भेजकर इस पूरे मार्ग पर तत्काल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित, चौड़ा और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ बनाने की विधिक मांग उठाई है। उन्होंने साफ कहा कि फुटपाथ कोई खैरात या अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है।

HIGHLIGHTS
  1. जान का जोखिम: हाथी घाट से वॉटर वर्क्स चौराहे के बीच फुटपाथ गायब, तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच चलने को मजबूर हैं लोग।
  2. सुप्रीम कोर्ट का हवाला: माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश- सभी नगर निगम नागरिकों को सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ दें।
  3. रिवर कनेक्ट की पहल: वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरण प्रेमी बृज खंडेलवाल ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर हरित पैदल पथ बनाने की मांग की।
  4. गंभीर चेतावनी: यदि समय रहते इस वीआईपी मार्ग पर दोनों ओर सुरक्षित फुटपाथ नहीं बना, तो सड़क सुरक्षा और पर्यावरण दोनों को भारी क्षति होगी।

कलेक्ट्रेट और नगर निगम गलियारों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, यमुना किनारा मार्ग शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का एक मुख्य केंद्र है। इस मार्ग पर प्रतिदिन सुबह से लेकर देर रात तक स्थानीय नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का भारी दबाव रहता है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रेमियों और मॉर्निंग-ईवनिंग वॉक करने वाले प्रबुद्ध लोगों के लिए भी यह पसंदीदा रास्ता रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि इस पूरे लंबे खंड पर राहगीरों के लिए कोई व्यवस्थित और सुरक्षित फुटपाथ ही नहीं बनाया गया है। मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे से बेलगाम और अनियंत्रित गति से दौड़ने वाले भारी और हल्के वाहनों के बीच पैदल चलना किसी बड़े आत्मघाती कदम जैसा हो गया है, जिससे इस मार्ग पर आए दिन जानलेवा दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।

‘रिवर कनेक्ट कैंपेन’ के संयोजक बृज खंडेलवाल ने नगर आयुक्त को सौंपे गए अपने आधिकारिक शिकायती पत्र में देश की शीर्ष अदालत यानी माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया ऐतिहासिक फैसले का कड़ा हवाला दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में देश के सभी शहरी स्थानीय निकायों को बेहद सख्त हिदायत दी थी कि वे नागरिकों के जीवन और गरिमा की रक्षा के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और पूरी तरह से अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ उपलब्ध कराएं। पत्र में इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया गया है कि शीर्ष अदालत के इतने कड़े रुख के बाद भी आगरा नगर निगम का प्रशासनिक अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है और शहर के सबसे वीआईपी माने जाने वाले यमुना किनारे के मार्ग पर बुनियादी ढांचा सुधारने में लगातार कोताही बरत रहा है।

संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी टीम पिछले कई वर्षों से लगातार यमुना नदी के संरक्षण, प्रदूषण मुक्ति और नदी तट के समग्र सौंदर्यकरण व विकास के लिए धरातल पर कार्य कर रही है। यदि नगर निगम कड़ा रुख अपनाते हुए हाथी घाट से वॉटर वर्क्स चौराहे तक सड़क के दोनों ओर एक सुंदर, चौड़ा और पेड़-पौधों से सुसज्जित हरित पैदल पथ (ग्रीन वॉकवे) विकसित करता है, तो इसके कई सकारात्मक आयाम सामने आएंगे। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगेगा, बल्कि यमुना किनारे पर्यावरण पर्यटन (इको-टूरिज्म) को भी एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह कदम ताजनगरी की वैश्विक छवि को सुधारने और विदेशी पर्यटकों के बीच भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का एक सकारात्मक संदेश देने में मील का पत्थर साबित होगा।

अब देखना यह होगा कि नगर निगम के नए कमिश्नर जनहित, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर कितनी फुर्ती से संज्ञान लेते हैं। प्रबुद्ध नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने इस बार भी कागजी दावों का खेल खेला और धरातल पर जल्द से जल्द चौड़े और सुरक्षित फुटपाथ के निर्माण का कार्य शुरू नहीं कराया, तो वे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना को लेकर विधिक रूप से कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। संस्था ने आम जनता से भी अपील की है कि वे ‘सुरक्षित फुटपाथ हमारा अधिकार’ अभियान से जुड़कर इस मुद्दे को सोशल मीडिया और प्रशासनिक मंचों पर पुरजोर तरीके से उठाएं, ताकि सोए हुए सरकारी तंत्र को समय रहते जगाया जा सके।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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