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अधिक मास उत्सवों की श्रृंखला में: आज यमुना छठ का उत्सव
— बृज खंडेलवाल
अधिक मास उत्सवों की श्रृंखला में आज यमुना छठ का उत्सव मनाया जा रहा है।
श्री यमुना जी का वैष्णवों, विशेष रूप से पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए महत्व:
वैष्णव परंपरा में श्री यमुना जी (कलिंदी) को भगवान श्री कृष्ण की प्रिय सखी, प्रेम की प्रतीक और पुष्टिमार्ग में विशेष रूप से “महारानी” या “ईष्ट देवी” माना जाता है। पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) में श्रीठाकुरजी (कृष्ण) की सेवा शुरू होने से पहले यमुनाजी की कृपा अनिवार्य मानी जाती है। यमुनाजी को कृष्ण की प्रेमिका/संगिनी के रूप में पूजा जाता है, वे रासलीला, व्रज की लीलाओं और भक्ति के प्रवाह की आधारस्वरूप हैं।
पौराणिक और भक्तिमय महत्व:
यमुना सूर्य पुत्री और यम की बहन हैं, लेकिन व्रज में वे कृष्ण-प्रेम की मूर्तिमान रूप हैं। गर्ग संहिता और अन्य ग्रंथों में व्रज की पावनता यमुना और गोवर्धन से जुड़ी है। पुष्टिमार्ग में यमुनाजी के ४१ पद (यमुना-स्तोत्र या पद) बहुत प्रसिद्ध हैं, जिनमें उनकी महिमा गाई जाती है, वे पापों का उद्धार करने वाली, प्रेम की पूंज और ठकुरानी हैं।
भक्ति में स्थान:
यमुना स्नान, दर्शन और आराधना से भक्त को कृष्ण-भक्ति प्राप्त होती है। वे शीतल जल, प्रेम और कृपा की धारा हैं। पुष्टिमार्ग के मंदिरों (जैसे नाथद्वारा, मथुरा आदि) में यमुनाजी का अलग से सम्मान और सेवा होती है। राधाजी और यमुनाजी दोनों कृष्ण की अनिवार्य संगिनियाँ मानी जाती हैं।
यमुना छठ (यमुना जयंती):
चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है, जब यमुना का अवतरण हुआ माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा, स्नान (जहाँ संभव हो), मनोरथ, आरती, भोग-प्रसाद और भजन-कीर्तन होते हैं। पुष्टिमार्गीय मंदिरों में यह उत्सव बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है, खासकर पुरुषोत्तम मास जैसे पावन अवसर पर।
आज की परिस्थितियों पर प्रकाश (वर्तमान स्थिति)
आध्यात्मिक दृष्टि से: आज भी यमुना माता वैष्णव भक्तों के हृदय में पूर्ण रूप से विराजमान हैं। मंदिरों में उनकी पूजा-अर्चना, मनोरथ और भक्ति-कीर्तन पूरे उल्लास से हो रहे हैं। पुरुषोत्तम मास में ऐसे उत्सव और भी विशेष फलदायी माने जाते हैं। भक्तगण यमुना मैया से प्रेम और शुद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं।
भौतिक/पर्यावरणीय दृष्टि से: दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, यमुना नदी (खासकर दिल्ली और आसपास) गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। २०२६ में भी दिल्ली में फीकल कोलीफॉर्म (मलजन्य बैक्टीरिया), BOD स्तर और जहरीला फोम (toxic foam) की समस्या बनी हुई है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स पिछले साल की तुलना में थोड़ी सुधार की बात कहती हैं। दिल्ली का हिस्सा नदी में सबसे ज्यादा प्रदूषण डालता है, अपर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरा और सीवेज ड्रेन के कारण।
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में भी प्रदूषण का असर है, लेकिन भक्तों की आस्था अटूट है। कई संगठन, संत और वैष्णव समुदाय “यमुना रक्षा” अभियान चला रहे हैं, स्वच्छता, जागरूकता और सरकारी प्रयासों (जैसे यमुना एक्शन प्लान) का समर्थन कर रहे हैं।
संदेश: आज की परिस्थिति हमें याद दिलाती है कि बाहरी पूजा के साथ-साथ नदी की रक्षा भी भक्ति का हिस्सा है। यमुना मैया की शुद्धि के बिना उनकी पूर्ण कृपा का अनुभव कठिन है। मंदिर में मनोरथ, आरती और कीर्तन के साथ हम सबको यमुना स्वच्छता के लिए भी प्रयासरत रहना चाहिए, कम पानी बर्बाद करना, प्लास्टिक कम करना, और जागरूकता फैलाना।
जय श्री कृष्ण! जय श्री यमुना महारानी! 🙏
आपके मंदिर के इस पावन उत्सव में सभी भक्तों को शुभकामनाएँ।
यमुना सेवक
बृज खंडेलवाल
22 मई 2026