बेजुबानों के मसीहा बने फेथ फाउंडेशन के मासूम, भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए टांगे घोंसले और रखा पानी

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Agra Desk, tajnews.in | Thursday, May 21, 2026, 06:44:00 PM IST

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Agra Desk | Social Responsibility, Child Welfare & Animal Protection Initiatives

आगरा संभाग के सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं के गलियारे से इस समय की एक बहुत ही प्रेरणादायक, कड़क और दिल को छू लेने वाली सकारात्मक खबर सामने आ रही है। आगरा में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी के साथ चल रही भीषण गर्मी और शरीर झुलसा देने वाली खतरनाक हीटवेव के बीच वेस्ट अर्जुन नगर स्थित प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था ‘फेथ फाउंडेशन’ के नौनिहालों ने मानवता की एक अनूठी और कड़क मिसाल पेश की है। पिछले सोमवार को संस्था के बच्चों ने एक बेहद योजनाबद्ध और जीव दया से ओत-प्रोत विशेष अभियान में भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य इस जानलेवा मौसम में मूक पक्षियों और बेसहारा सड़क के जानवरों के प्रति प्रेम, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का व्यावहारिक भाव विकसित करना था। चिलचिलाती धूप में जहां आम इंसानों का बाहर निकलना दूभर है, वहीं इन बेजुबान जीवों के लिए पानी और सुरक्षित आश्रय का एक बहुत गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी कड़े संकट को भांपते हुए फेथ फाउंडेशन के बच्चों ने न केवल पक्षियों के लिए कृत्रिम घोंसले (Bird Nests) बनाना सीखा, बल्कि उन्हें विभिन्न पेड़ों और सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर लगाया। इसके साथ ही बच्चों ने शहर की विभिन्न बस्तियों और चौराहों पर स्ट्रीट डॉग्स व बेसहारा गोवंश के लिए साफ पानी के बर्तनों की कड़क व्यवस्था की है, जिसकी पूरे जिले में जमकर सराहना की जा रही है।

मानवीय गतिविधि और अभियान के मुख्य बिंदु
  • मासूम बच्चों की कड़क और अनूठी पहल: वेस्ट अर्जुन नगर के फेथ फाउंडेशन के बच्चों ने भीषण गर्मी में बेजुबान जीवों के संरक्षण का उठाया कड़ा जिम्मा।
  • हाथों से बनाए सुंदर बर्ड नेस्ट्स: बच्चों ने खुद पक्षियों के रहने योग्य सुरक्षित घोंसले तैयार करना सीखकर उन्हें पेड़ों और छतों पर स्थापित किया।
  • पानी के सकोरों और बर्तनों का जाल: स्ट्रीट डॉग्स, गौवंश और पक्षियों के लिए विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर नियमित साफ और ठंडे पानी की व्यवस्था की।
  • संवेदनशील समाज के निर्माण का संकल्प: संस्था ने केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर दया, करुणा और वास्तविक सामाजिक जिम्मेदारी का कड़ा पाठ पढ़ाया।

झुलसा देने वाली धूप में तपने लगे आशियाने, बेजुबानों के लिए खड़े हुए अस्तित्व के संकट

आगरा का अधिकतम तापमान पिछले कुछ दिनों से लगातार 45 डिग्री से लेकर 46.5 डिग्री सेल्सियस के कड़े और जानलेवा स्तर पर बना हुआ है। जिला प्रशासन और कलेक्ट्रेट की गाइडलाइन के अनुसार दोपहर के समय सड़कों पर पूरी तरह से सन्नाटा पसर जाता है। इस भीषण प्राकृतिक प्रकोप का सबसे कड़ा और दर्दनाक असर उन मूक पक्षियों और आवारा जानवरों पर पड़ रहा है, जिनके सिर पर न तो कोई कंक्रीट की छत है और ना ही उनके पास अपनी प्यास बुझाने का कोई नियमित साधन। पानी के पारंपरिक स्रोत, तालाब और गड्ढे पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण हर दिन दर्जनों बेजुबान असमय काल के गाल में समा रहे हैं।

Innocent children of Faith Foundation Agra learning to make bird nests and keeping water pots for street animals during heatwave

इसी कड़े और मानवीय संकट को देखते हुए वेस्ट अर्जुन नगर स्थित फेथ फाउंडेशन प्रबंधन ने बच्चों को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का एक बहुत ही सुंदर रणनीतिक फैसला लिया। पिछले सोमवार को आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों को जूट, सूखी घास, कबाड़ के गत्तों और प्राकृतिक कड़े धागों की मदद से ‘इको-फ्रेंडली’ और हवादार बर्ड नेस्ट्स यानी पक्षियों के घोंसले बनाना सिखाया गया। बच्चों ने पूरे उत्साह और तन्मयता के साथ इन आशियानों को तैयार किया। इसके बाद शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में बच्चों की अलग-अलग टोलियों ने वेस्ट अर्जुन नगर और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों, पार्कों और पेड़ों की मजबूत टहनियों पर इन घोंसलों को बहुत ही कड़े और सुरक्षित ढंग से बांधा, ताकि गौरैया, कबूतर और अन्य छोटे पक्षी दोपहर की झुलसाने वाली गर्म लपटों से बचकर वहां सुरक्षित पनाह ले सकें।

स्ट्रीट डॉग्स और गोवंश के लिए रखे पानी के सकोरे, बच्चों ने सीखी मानवता की सबसे बड़ी सीख

पक्षियों को आश्रय देने के साथ-साथ इस अभियान का दूसरा सबसे कड़ा और महत्वपूर्ण चरण था पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना। फेथ फाउंडेशन के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने हाथों से मिट्टी के बड़े सकोरे और बर्तनों को पार्कों के कोनों, दीवारों की छांव और उन रास्तों पर रखा जहाँ स्ट्रीट डॉग्स (सड़क के आवारा कुत्ते) और बेसहारा गोवंश विश्राम करते हैं। बच्चों ने न केवल इन बर्तनों को सही स्थानों पर व्यवस्थित किया, बल्कि उनमें ताजा और ठंडा पानी भरकर यह संकल्प भी लिया कि वे नियमित अंतराल पर इन बर्तनों की कड़े स्तर पर साफ-सफाई करेंगे और उनमें पानी की कमी बिल्कुल नहीं होने देंगे।

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस पूरी गतिविधि के माध्यम से बच्चों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी और व्यावहारिक सीख प्राप्त की कि इंसानों की मदद और उनकी चीख-पुकार सुनने के लिए तो समाज में बहुत से लोग और संस्थाएं आगे आ जाती हैं, लेकिन इन बेजुबान और मासूम जीवों की सुध लेने वाला कोई बिल्कुल नहीं होता। ये जीव अपनी शारीरिक तकलीफ, भूख और प्यास की भीषण तड़प किसी भी इंसान से कह नहीं सकते। यदि हम सभी नागरिक अपने घरों की छतों, बालकनियों और छज्जों पर थोड़ा सा प्रेम और संवेदनशीलता दिखाते हुए पानी का एक सकोरा और मुट्ठी भर दाना रखना शुरू कर दें, तो इन मासूम बेजुबानों का जीवन बेहद आसान बनाया जा सकता है और असमय होने वाली मौतों पर पूरी तरह से कड़ा अंकुश लगाया जा सकता है।

“मानवता केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बेजुबान जीवों की देखभाल करना भी हमारी जिम्मेदारी है।” – फेथ फाउंडेशन, वेस्ट अर्जुन नगर आगरा

किताबी ज्ञान से परे संवेदनशील और बेहतर समाज के निर्माण में जुटा फेथ फाउंडेशन

आगरा के प्रबुद्ध समाज और शिक्षाविदों ने फेथ फाउंडेशन की इस कड़ी पहल का खुले दिल से स्वागत किया है। आज के इस कड़े प्रतियोगितात्मक युग में जहाँ अधिकांश शिक्षण संस्थान बच्चों को केवल किताबी कीड़ा बनाने और अंकों की अंधी दौड़ में दौड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं, वहीं फेथ फाउंडेशन ने बच्चों को मानवता, करुणा, दया और वास्तविक सामाजिक जिम्मेदारी का यह व्यावहारिक पाठ पढ़ाकर एक नई और अनुकरणीय राह दिखाई है। संस्था के पदाधिकारियों का साफ मानना है कि एक संवेदनशील और बेहतर समाज का निर्माण तभी संभव है जब हमारी आने वाली पीढ़ी के भीतर हर एक जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति और सम्मान का भाव कड़े स्तर पर कूट-कूट कर भरा हो।

इस पूरे मानवीय अभियान के सफल संपादन पर क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों और आगरा कलेक्ट्रेट के सामाजिक कल्याण महकमे के अधिकारियों ने भी बच्चों का कड़ा हौसला बढ़ाया है। बच्चों के चेहरों पर बेजुबानों की मदद करने के बाद जो आत्मिक संतुष्टि और कड़क मुस्कान दिखाई दे रही थी, वह किसी भी बड़े पुरस्कार से कहीं अधिक मूल्यवान थी। आगरा संभाग के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस अनूठे मॉडल को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करने का कड़ा मन बनाया है ताकि इस भीषण रेड अलर्ट वाले मौसम में जीव रक्षा के इस महायज्ञ को और व्यापक रूप दिया जा सके। ताज न्यूज़ बच्चों की इस अभूतपूर्व करुणा, फेथ फाउंडेशन के इस कड़े सामाजिक सरोकार और आगरा संभाग की हर एक मानवीय हलचल पर अपनी पैनी और बारीक नजर लगातार बनाए हुए है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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