यूपी के मिर्जापुर में दर्दनाक हादसा: ब्रेक फेल ट्रेलर से टकराई बोलेरो, 9 लोग जिंदा जले, कुल 11 की मौत, पीएम मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान

UP Desk, tajnews.in | Thursday, April 23, 2026, 01:15:30 PM IST

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UP Desk | Accident Report

मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में बुधवार की रात एक ऐसा खौफनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को गहरे मातम में डुबो दिया है। रीवा-मिर्जापुर हाईवे पर स्थित खतरनाक ड्रमंडगंज घाटी (Drumandganj Valley) में एक अनियंत्रित ट्रेलर के ब्रेक फेल होने के कारण चार वाहनों की भीषण भिड़ंत हो गई। इस महाविनाशकारी हादसे में कुल 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। सबसे हृदयविदारक घटना एक बोलेरो (Bolero) कार के साथ हुई, जो ट्रेलर से टकराने के बाद आग का गोला बन गई और उसमें सवार 9 लोग जिंदा जल गए। ये सभी लोग मध्य प्रदेश के मैहर (Maihar) से अपने नौ वर्षीय बेटे का मुंडन कराकर लौट रहे थे। खुशियों से भरा यह पारिवारिक सफर चंद पलों में राख के ढेर में तब्दील हो गया। इसके अलावा, एक स्विफ्ट कार सवार और एक ट्रक के खलासी की भी इस हादसे में जान चली गई है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थानीय लोगों ने आग बुझाने और लोगों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि किसी को भी बाहर निकालना नामुमकिन साबित हुआ। इस भीषण त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे की दोषपूर्ण डिजाइन और आपातकालीन सेवाओं की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं。

HIGHLIGHTS
  1. मिर्जापुर की ड्रमंडगंज घाटी में भीषण हादसा: ब्रेक फेल ट्रेलर ने बरपाया कहर, स्विफ्ट और बोलेरो को मारी टक्कर, चार वाहनों की हुई भिड़ंत।
  2. मैहर से मुंडन कराकर लौट रहा था परिवार: बोलेरो में आग लगने से 9 लोग जिंदा जले, स्विफ्ट सवार और खलासी की भी हुई दर्दनाक मौत।
  3. सड़क के डिजाइन पर उठे सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप- ड्रमंडगंज घाटी बन चुकी है मौत का हाईवे, प्रशासनिक लापरवाही फिर हुई उजागर।
  4. पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक: प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि का किया ऐलान।

बुधवार की रात: कैसे काल बन गया गिट्टी लदा ट्रेलर

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह भयानक हादसा बुधवार देर रात उस समय हुआ जब मध्य प्रदेश (MP) की तरफ से गिट्टी लादकर आ रहा एक भारी-भरकम ट्रेलर ड्रमंडगंज घाटी के तीखे ढलान पर उतरा। ढलान पर अचानक ट्रेलर के ब्रेक फेल (Brake Failure) हो गए। ब्रेक फेल होते ही कई टन वजनी यह ट्रेलर एक बेकाबू मौत की मशीन बन गया। चालक ने इसे नियंत्रित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन तेज रफ्तार और घाटी की खतरनाक ढलान के कारण यह असंभव हो गया। सबसे पहले इस अनियंत्रित ट्रेलर ने वाराणसी नंबर की एक स्विफ्ट कार को अपनी चपेट में लिया और उसे बुरी तरह रौंदते हुए आगे बढ़ गया। इस टक्कर में स्विफ्ट कार में सवार जय प्रकाश (उम्र 26 वर्ष, निवासी परसिया दुबे रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र) की मौके पर ही मौत हो गई。

स्विफ्ट कार को रौंदने के बाद ट्रेलर वहीं नहीं रुका, बल्कि वह आगे जाकर एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। इस भिड़ंत में ट्रक के एक खलासी (हेल्पर) की भी गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। लेकिन इस महाविनाश का सबसे दर्दनाक मंजर अभी बाकी था। इसी बीच, रीवा (Rewa) की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार बोलेरो कार, जो इस दुर्घटना को भांप नहीं पाई, सीधे जाकर उस रुके हुए ट्रेलर के पिछले हिस्से से जोर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और पलक झपकते ही बोलेरो में भयानक आग (Fire in Car) लग गई। वाहन के दरवाजे लॉक हो गए और अंदर बैठे यात्रियों को बाहर निकलने का कोई मौका ही नहीं मिल पाया。

खुशियों का सफर राख में बदला: 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत

बोलेरो कार में मिर्जापुर के जिगना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामपुर (Rampur) गांव निवासी अरुण सिंह का परिवार सवार था। यह परिवार अपने नौ साल के बेटे शिव का मुंडन संस्कार कराने के लिए पूरे हर्षोल्लास के साथ मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मैहर (Maihar) माता के दर्शन करने गया था। मुंडन का कार्यक्रम हंसी-खुशी संपन्न होने के बाद, बुधवार शाम को पूरा परिवार वापस अपने घर मिर्जापुर लौट रहा था। बोलेरो में नौ वर्षीय शिव, पंकज सिंह, बीना, वंदना, पीयूष, प्रियंका, कार्तिकेय और सोनम सवार थे, जबकि गाड़ी को विष्णु चला रहा था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुंडन की ये खुशियां रास्ते में ही मौत के खौफनाक मंजर में बदल जाएंगी。

स्थानीय ग्रामीण विमलेश, जो घटना के तुरंत बाद वहां पहुंचे थे, ने बताया कि जैसे ही बोलेरो ट्रेलर से टकराई, एक जोरदार धमाका हुआ और कार आग की लपटों में घिर गई। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कार के शीशे तोड़ने और फंसे हुए लोगों को निकालने का भरपूर प्रयास किया। अंदर से लोगों की चीखें और मदद की गुहार सुनाई दे रही थी, लेकिन आग की लपटें और तापमान इतना अधिक था कि कोई भी गाड़ी के पास तक नहीं फटक सका। देखते ही देखते नौ जिंदगियां आग में जलकर खाक हो गईं। यह एक ऐसा दृश्य था जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी और लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। सूचना मिलने के बाद प्रशासन और फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अग्निशमन विभाग की टीम को पहुंचने में काफी देरी हुई। घंटों की मशक्कत के बाद जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक बोलेरो का सिर्फ कंकाल बचा था और उसमें सवार सभी नौ लोगों की जलकर दर्दनाक मौत हो चुकी थी。

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ड्रमंडगंज घाटी का दोषपूर्ण डिजाइन: विकास के नाम पर ‘मौत का हाईवे’

इस दिल दहलाने वाली दुर्घटना ने वाराणसी-रीवा फोरलेन (Varanasi-Rewa Four-lane) और विशेषकर ड्रमंडगंज घाटी के निर्माण और उसके डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों का आरोप है कि यह घाटी विकास की उपलब्धि से कहीं अधिक दुर्घटनाओं और मौत का केंद्र बन चुकी है। ड्रमंडगंज घाटी में तीखे और अंधे मोड़ (Blind Curves), असंतुलित ढलान और अपर्याप्त सड़क सुरक्षा संकेतकों (Safety Indicators) की वजह से आए दिन यहां हादसे होते रहते हैं। भारी वाहन जब इस ढलान पर उतरते हैं, तो अक्सर उनके ब्रेक गर्म होकर फेल हो जाते हैं。

हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति किसी एक दिन की तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि यह नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी असावधानी और प्रशासनिक उदासीनता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सड़कें दूरियां घटाने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन जब सड़क की बनावट ही जोखिम पैदा करने लगे, तो उस विकास के मॉडल पर पुनर्विचार करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। दुर्भाग्य यह है कि इस मार्ग का चौड़ीकरण हुए चार साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन दुर्घटनाओं का सिलसिला आज भी जस का तस बना हुआ है। प्रतिदिन कोलकाता, सिलीगुड़ी, बिहार, नागपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों मालवाहक ट्रक इसी रास्ते से गुजरते हैं। यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिवहन मार्ग है, ऐसे में सुरक्षा मानकों के साथ ऐसा समझौता सीधे तौर पर बेगुनाह लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। जनता अब मांग कर रही है कि इस ‘मौत के हाईवे’ के डिजाइन को तुरंत सुधारा जाए और ढलान वाले हिस्सों पर स्पीड ब्रेकर या आपातकालीन एस्केप रैंप बनाए जाएं。

पुलिस-प्रशासन का एक्शन और पीएम मोदी का मरहम

हादसे की भयावहता को देखते हुए रात में ही मिर्जापुर के जिलाधिकारी (DM) पवन कुमार गंगवार, पुलिस अधीक्षक (SP) अपर्णा रजत कौशिक और सीओ लालगंज अमर बहादुर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए थे। एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि हादसे के बाद सभी चारों क्षतिग्रस्त वाहनों की पहचान कर ली गई है। इनमें से एक ट्रक बिहार का है, दूसरा मध्य प्रदेश का है, स्विफ्ट कार सोनभद्र की है और जली हुई बोलेरो मिर्जापुर की है। पुलिस ने जले हुए शवों के अवशेषों को पोस्टमार्टम और डीएनए जांच (DNA Profiling) के लिए भेज दिया है, ताकि उनकी आधिकारिक रूप से शिनाख्त की जा सके। डीएम पवन कुमार गंगवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मरने वाले सभी लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। हमारी पूरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं और प्रशासन की ओर से उन्हें हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।”

इस भीषण और दर्दनाक सड़क दुर्घटना की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा, “उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में हुई दुर्घटना में लोगों की जान जाने से गहरा दुख हुआ है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने पीड़ितों के लिए बड़ी आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को 50,000 रुपये का मुआवजा (Ex-gratia) दिया जाएगा। राज्य सरकार ने भी अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के सख्त निर्देश दिए हैं। लेकिन मुआवजे की ये रकमें उन परिवारों के आंसू कभी नहीं पोंछ पाएंगी, जिन्होंने एक साथ अपने घर के नौ सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया है。

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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