Agra Desk, Taj News | Saturday, April 18, 2026, 01:25:30 AM IST

आगरा: ताजनगरी में सरकारी संपत्तियों पर अवैध रूप से कुंडली मारकर बैठे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की मंशा के अनुरूप, सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्रों को मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए आवास एवं विकास परिषद (Awas Evam Vikas Parishad) ने शुक्रवार को एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। शहर के कालिंदी विहार फेज-1 स्थित ‘माननीय कांशीराम आवास योजना’ में चल रहे अवैध कब्जों के खेल को खत्म करने के लिए परिषद का भारी प्रवर्तन दस्ता (Enforcement Team) पुलिस बल के साथ मैदान में उतरा। निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि दर्जनों मकानों पर बाहरी और अपात्र लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए मौके पर ही 11 मकानों को सील कर उन पर परिषद के ताले जड़ दिए। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरी कॉलोनी में हड़कंप मच गया और कई कब्जाधारी अपना सामान लेकर भागते नजर आए। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी मकानों को धर्मशाला समझने वाले लोग अगले 48 घंटों में परिसर खाली कर दें, अन्यथा उन्हें बलपूर्वक बाहर निकाला जाएगा।


13 साल पुराना पेंच और 215 मकानों का भविष्य
कालिंदी विहार में चल रहे इस विवाद की जड़ें करीब 13 साल पुरानी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आवास विकास परिषद ने लगभग 13 वर्ष पूर्व इस योजना के तहत 23 ब्लॉकों में कुल 360 मकानों का निर्माण कराया था। इन मकानों का मुख्य उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और आवास विहीन लोगों को छत मुहैया कराना था। नियमानुसार, परिषद को इन भवनों का निर्माण कर ‘डूडा’ (DUDA) को हस्तांतरित करना था, जिसके बाद डूडा पात्र लाभार्थियों का चयन कर उन्हें कब्जा सौंपता।

अब तक कुल 360 में से केवल 145 मकानों का ही आवंटन डूडा द्वारा किया जा सका है, जहां वैध लाभार्थी निवास कर रहे हैं। शेष 215 मकानों का हस्तांतरण तकनीकी कारणों और डूडा की सुस्ती के चलते अब तक लंबित है। यही खाली पड़े मकान अपराधियों और अवैध कब्जाधारियों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गए। परिषद कार्यदायी संस्था होने के नाते इन मकानों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह है। प्रवर्तन दल अधिकारी कर्नल जी.एम. खान ने बताया कि परिषद अब डूडा के साथ मिलकर इन भवनों के त्वरित हस्तांतरण का प्रयास कर रही है ताकि पात्र गरीबों को उनका हक मिल सके और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग रुके।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ब्लॉक-दर-ब्लॉक चेकिंग
शुक्रवार को हुई यह कार्रवाई कोई सामान्य रूटीन चेक नहीं थी। अधीक्षण अभियंता अतुल कुमार सिंह के कड़े रुख के बाद अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशाल टीम तैयार की गई। इसमें ट्रांस यमुना थाना पुलिस के साथ-साथ महिला पुलिस बल को भी शामिल किया गया ताकि कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या हंगामे से निपटा जा सके। टीम ने ब्लॉक-दर-ब्लॉक सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान कई ऐसे मकान मिले जहां लोग अवैध रूप से बिजली-पानी का इस्तेमाल कर रहे थे और बिना किसी आवंटन पत्र के निवास कर रहे थे।

सबसे बड़ी कार्रवाई ब्लॉक 6-बी, भवन संख्या-1 में देखने को मिली। यहाँ अवैध कब्जाधारी की मौजूदगी में ही उसके सामान को ससम्मान बाहर निकलवाया गया और मकान को तुरंत सील कर दिया गया। अन्य 10 मकानों में भी इसी तरह की त्वरित कार्रवाई करते हुए ताले जड़ दिए गए। अभियान के दौरान सहायक अभियंता गजेंद्र सिंह, मयंक कौशिक, अवर अभियंता सुनील कुमार यादव और अभिनव कीर्तिराव ने हर एक भवन के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। कई लोग चेकिंग की खबर मिलते ही ताला लगाकर खिसक गए, जिनके विरुद्ध भी अब कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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दो दिन की मोहलत, वरना मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होगी कार्रवाई
आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने इस कार्रवाई के जरिए यह साफ कर दिया है कि वे केवल सांकेतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेंगे। अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह ने सभी ब्लॉकों का दौरा कर वहां मौजूद अवैध कब्जाधारियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्हें दो दिनों के भीतर स्वेच्छा से मकान खाली करने को कहा गया है। यह चेतावनी उन लोगों के लिए भी है जो किसी रसूख या गुंडागर्दी के दम पर इन मकानों को अपना निजी ठिकाना बना चुके हैं।

अधीक्षण अभियंता अतुल कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि परिषद की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा (48 घंटे) के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया, तो परिषद जिला प्रशासन से संपर्क कर मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कराएगा। इसके बाद पुलिस बल के साथ बड़े स्तर पर अभियान चलाकर न केवल सामान बाहर फिंकवाया जाएगा, बल्कि कब्जाधारियों के विरुद्ध एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।

इस कार्रवाई का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि परिषद अब इन मकानों की सुरक्षा के लिए ‘गार्ड्स’ की तैनाती पर भी विचार कर रही है ताकि सील किए गए मकानों के ताले दोबारा न तोड़े जा सकें। कालिंदी विहार में हुई इस धुआंधार कार्रवाई ने आगरा के अन्य उन इलाकों में भी खलबली मचा दी है जहां सरकारी जमीन या भवनों पर लंबे समय से कब्जे चल रहे हैं। अब देखना यह होगा कि डूडा कब तक इन 215 मकानों का आवंटन कर असली आवास विहीन गरीबों के चेहरे पर मुस्कान लाता है।

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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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