National Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 08:20:15 PM IST

पणजी: भारत में इन दिनों इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का भारी खुमार क्रिकेट फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस खेल के रोमांच के पीछे सट्टेबाजी (Betting) का एक बहुत बड़ा और काला कारोबार भी देश भर में अपने पैर पसार चुका है। इसी कड़ी में, गोवा पुलिस की साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Police) ने एक बहुत बड़े और अचूक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए एक हाई-प्रोफाइल ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने उत्तरी गोवा के सांगोल्डा (Sangolda) इलाके में स्थित एक आलीशान विला पर अचानक छापा मारकर इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। इस खुफिया छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 6 शातिर सट्टेबाजों (Bookies) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी गोवा के स्थानीय निवासी नहीं हैं, बल्कि वे गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से आकर यहां इस काले धंधे को ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से कई लैपटॉप, दर्जनों मोबाइल फोन, 50 से अधिक एटीएम कार्ड, बैंकों की मूल खाता किट और भारी मात्रा में नकद राशि बरामद की है। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि सट्टेबाज पुलिस से बचने के लिए अब गोवा जैसे पर्यटन स्थलों को अपना सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven) बना रहे हैं।
सांगोल्डा का आलीशान विला और रात के अंधेरे में पुलिस की रेड
देशभर में आईपीएल मैचों की शुरुआत होते ही सट्टेबाज और सटोरिए पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं। गोवा हमेशा से पर्यटकों की पहली पसंद रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह राज्य साइबर अपराधियों और सट्टेबाजों के लिए भी एक बहुत बड़ा अड्डा बनता जा रहा है। पुलिस से बचने के लिए ये अपराधी भीड़भाड़ वाले शहरों को छोड़कर गोवा के शांत इलाकों में आलीशान विला (Villas) किराये पर लेते हैं और वहीं से पूरे देश में अपना ऑनलाइन नेटवर्क चलाते हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, गोवा साइबर क्राइम सेल के अधिकारियों को एक बहुत ही पुख्ता मुखबिर से यह गुप्त सूचना मिली थी कि सांगोल्डा गांव के एक विला में कुछ संदिग्ध लोग बाहरी राज्यों से आकर ठहरे हुए हैं और वहां से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन जुआ (Online Gambling) संचालित किया जा रहा है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल ने एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया। गुरुवार (16 अप्रैल) को पुलिस टीम ने पूरी योजना के साथ उस विला की घेराबंदी की और अचानक अंदर धावा बोल दिया। जब पुलिस अंदर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। विला के एक बड़े कमरे को पूरी तरह से एक ‘कंट्रोल रूम’ (Control Room) में तब्दील कर दिया गया था। वहां मौजूद 6 लोग लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे थे और आईपीएल मैच की हर एक गेंद पर लाखों रुपये के दांव (Bets) लगवा रहे थे। पुलिस ने बिना कोई मौका दिए सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया और वहां मौजूद सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सीज कर दिया।
50 एटीएम कार्ड्स और फर्जी खातों का खौफनाक ‘मनी ट्रेल’
इस पूरी छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बरामदगी नकदी की नहीं, बल्कि 50 से ज्यादा एटीएम कार्ड्स (ATM Cards) और बैंकों की मूल खाता किट (Original Account Kits) की रही है। आमतौर पर सट्टेबाजी के ठिकानों पर पुलिस को भारी कैश मिलता है, लेकिन ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस आधुनिक दौर में नकद लेन-देन बहुत कम हो गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सट्टेबाज आम लोगों, मजदूरों और छात्रों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाते हैं।
इन खातों से जुड़ी पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड ये सट्टेबाज अपने पास ही रखते हैं। जब कोई पंटर (Punter) हार या जीत की रकम का भुगतान करता है, तो वह पैसा सीधे इन्हीं फर्जी खातों में ट्रांसफर (Transfer) किया जाता है। इसके बाद, ये सट्टेबाज एटीएम मशीन के जरिए कैश निकाल लेते हैं या फिर इस पैसे को ‘हवाला’ (Hawala) के जरिए देश से बाहर बैठे आकाओं तक पहुंचा देते हैं। पुलिस द्वारा जब्त किए गए ये 50 एटीएम कार्ड्स इसी बहुत बड़े मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) नेटवर्क की तरफ सीधा इशारा कर रहे हैं। अब पुलिस इन सभी बैंक खातों को फ्रीज करने और उनके असली मालिकों तक पहुंचने की तैयारी कर रही है।
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अंतरराज्यीय गिरोह और तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल
गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि से यह साफ हो गया है कि यह कोई छोटा-मोटा स्थानीय गिरोह नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा अंतरराज्यीय सिंडिकेट (Interstate Syndicate) है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। ये सभी बहुत ही शातिर और तकनीकी रूप से बेहद सक्षम (Tech-Savvy) हैं। सट्टेबाजी के इस खेल को चलाने के लिए वे विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर और एन्क्रिप्टेड ऐप्स (Encrypted Apps) का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि पुलिस उनकी लोकेशन और इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP Address) को आसानी से ट्रेस न कर सके।
ये सट्टेबाज ऑनलाइन सट्टेबाजी वाले प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी आई-डी (Fake IDs) बनाते थे और फिर टेलीग्राम और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए देश भर के सटोरियों से जुड़ते थे। उनके पास से मिले लैपटॉप और दर्जनों मोबाइल फोन के अंदर करोड़ों रुपयों के लेन-देन का हिसाब-किताब और ग्राहकों के कई बड़े डेटाबेस मौजूद हैं। पुलिस की साइबर फोरेंसिक टीम (Cyber Forensic Team) अब इन सभी उपकरणों की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना (Mastermind) तक पहुंचा जा सके, जो संभवतः भारत के बाहर किसी दूसरे देश (जैसे दुबई या नेपाल) में बैठकर इस पूरे काले नेटवर्क को कंट्रोल कर रहा है।
गोवा पुलिस की सख्त चेतावनी और आगे की कानूनी कार्रवाई
छापेमारी के बाद, गोवा साइबर क्राइम पुलिस ने सभी 6 आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम (Public Gambling Act) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की कई बेहद सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा, भारी मात्रा में एटीएम कार्ड मिलने के कारण उनके खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud) और मनी लॉन्ड्रिंग की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस ने आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश कर रिमांड पर ले लिया है, ताकि उनसे इस गिरोह के बाकी सदस्यों के बारे में कड़ाई से पूछताछ की जा सके। मौके से पुलिस ने 31,000 रुपये की नकद राशि भी जब्त की है, जो दैनिक खर्चों के लिए रखी गई थी।
गोवा पुलिस के आला अधिकारियों ने राज्य के सभी नागरिकों और विला मालिकों को एक बहुत ही सख्त चेतावनी जारी की है। पुलिस ने कहा है कि कोई भी संपत्ति मालिक बिना पुलिस वेरिफिकेशन (Tenant Verification) के अपनी प्रॉपर्टी किसी बाहरी व्यक्ति को किराए पर न दे। अगर किसी की संपत्ति का इस्तेमाल सट्टेबाजी या साइबर क्राइम जैसे अवैध कामों के लिए होता पाया गया, तो उस मालिक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह बड़ी छापेमारी साबित करती है कि पुलिस ऑनलाइन अपराधों को लेकर अब पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपना रही है और सट्टेबाजों के दिन अब पूरी तरह से लद चुके हैं।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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