हाथरस: बर्खास्त सिपाही ने रची खुद की मौत की खौफनाक साजिश, भिखारी को मारकर जलाया शव, गिरफ्तार

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 06:15:30 PM IST

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हाथरस: उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खात्मे के लिए पुलिस लगातार कड़े अभियान चला रही है। इसी बीच, राज्य के हाथरस जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और फिल्मी ‘क्राइम थ्रिलर’ जैसी वारदात सामने आई है, जिसने खुद पुलिस महकमे के भी होश उड़ा दिए हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग से बर्खास्त किए जा चुके एक शातिर पूर्व सिपाही ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपनी ही मौत की एक बेहद खौफनाक और दरिंदगी भरी साजिश रच डाली। 55 वर्षीय इस बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह ने खुद को कागजों में ‘मुर्दा’ साबित करने के लिए एक बेगुनाह और बेसहारा भिखारी की निर्मम तरीके से हत्या कर दी। कातिल ने भिखारी के शव को आग लगा दी और उसके पास अपना पुलिस का आई-कार्ड (ID Card) तथा अन्य निजी सामान छोड़ दिया, ताकि पुलिस को लगे कि मरने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद रामवीर है। लेकिन, कहते हैं कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। पुलिस की पैनी फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने इस शातिर अपराधी का पूरा ‘मास्टरप्लान’ ताश के पत्तों की तरह ढह गया। अंततः, हाथरस पुलिस ने इस दुर्दांत अपराधी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. हाथरस में खौफनाक क्राइम: बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह ने अपनी मौत का झूठा नाटक रचने के लिए एक बेगुनाह भिखारी की निर्मम हत्या कर दी।
  2. भिखारी के शव को जलाया: पहचान छिपाने के लिए कातिल ने शव को जला दिया और पास में अपना पुलिस का आईडी कार्ड व सामान छोड़ दिया।
  3. हत्यारे का बड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड: रामवीर सिंह पर फिरोजाबाद, अलीगढ़ और मुरादाबाद समेत कई जिलों में हत्या, अपहरण और लूट के कई केस दर्ज हैं।
  4. फॉरेंसिक जांच से खुला राज: पुलिस की वैज्ञानिक जांच में शव की असलियत सामने आ गई और 14 अप्रैल को शातिर रामवीर को गिरफ्तार कर लिया गया।

खौफनाक साजिश: खुद को मुर्दा साबित करने का ‘मास्टरप्लान’

रामवीर सिंह कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि वह पुलिस महकमे की रग-रग से और जांच की सभी कानूनी प्रक्रियाओं से बहुत अच्छी तरह वाकिफ था। वह यह भलीभांति जानता था कि पुलिस किसी भी लावारिस और जली हुई लाश की शिनाख्त आखिर कैसे करती है। अपने खिलाफ दर्ज दर्जनों संगीन मुकदमों और पुलिस की लगातार हो रही ताबड़तोड़ दबिश से बचने के लिए उसने एक बेहद ही खौफनाक और शैतानी ‘मास्टरप्लान’ तैयार किया। उसने यह तय कर लिया था कि वह अपनी जगह किसी और की बलि चढ़ाकर खुद को मरा हुआ घोषित करवा देगा। उसका इरादा था कि ऐसा करने से पुलिस उसकी फाइल हमेशा के लिए बंद कर देगी और वह एक नई पहचान बनाकर अपनी बची हुई जिंदगी आराम से जिएगा।

इस खतरनाक साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसने एक ऐसे व्यक्ति की तलाश शुरू की, जिसका इस दुनिया में आगे-पीछे रोने वाला कोई न हो। उसकी यह तलाश एक लाचार और बेसहारा भिखारी पर जाकर खत्म हुई। रामवीर ने बड़े ही शातिराना तरीके से उस भिखारी को कुछ पैसों या खाने का लालच देकर अपने विश्वास में लिया। इसके बाद वह उसे एक सुनसान और एकांत जगह पर ले गया, जहां उसने बड़ी ही क्रूरता के साथ उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद उसने शव के चेहरे और शरीर को पेट्रोल छिड़ककर इस तरह से जला दिया कि उसे पहचानना पूरी तरह से नामुमकिन हो जाए। इसके बाद उसने अपनी पैंट, शर्ट, पर्स और सबसे अहम अपना पुलिस का ‘पहचान पत्र’ (ID Card) उस जली हुई लाश के पास रख दिया, ताकि पुलिस को सीधा धोखा दिया जा सके।

पुलिस की पैनी नजर और फॉरेंसिक जांच से खुला राज

जब हाथरस पुलिस को किसी सुनसान जगह पर वह जली हुई लाश मिली, तो शुरुआती जांच में पास पड़े पुलिस आई-कार्ड और कपड़ों को देखकर एक पल के लिए ऐसा ही लगा कि यह शव बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह का ही है। पुलिस महकमे के अंदर भी यह खबर तेजी से फैल गई कि कई वांटेड मामलों का वांछित आरोपी अब इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन, जांच कर रहे तेज-तर्रार और अनुभवी पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल पर कुछ सुराग बेहद संदिग्ध लगे। जली हुई लाश की लंबाई-चौड़ाई और रामवीर की शारीरिक बनावट में हल्का सा अंतर महसूस हो रहा था, जिसने पुलिस के कान खड़े कर दिए।

इसके बाद पुलिस ने बिना कोई जल्दबाजी किए शव का पंचनामा भरा और उसे उच्च स्तरीय पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक जांच (Forensic Examination) के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। जब डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल ने विसरा (Viscera) और डीएनए (DNA) की बहुत ही बारीकी से जांच की, तो पूरा मामला शीशे की तरह एकदम साफ हो गया। वैज्ञानिक रिपोर्ट में यह सौ प्रतिशत साबित हो गया कि वह जली हुई लाश रामवीर की नहीं, बल्कि किसी और अज्ञात व्यक्ति (भिखारी) की है। इसके बाद पुलिस को यह समझते जरा भी देर नहीं लगी कि यह रामवीर द्वारा कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए रची गई एक बहुत बड़ी और शातिर साजिश है। पुलिस ने तुरंत ‘ऑपरेशन रामवीर’ शुरू किया और उसकी तलाश में अपनी कई विशेष टीमें अलग-अलग जिलों में रवाना कर दीं।

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कौन है बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह? क्राइम कुंडली

रामवीर सिंह की ‘क्राइम कुंडली’ (Criminal Record) किसी भी बड़े और खूंखार माफिया से कम नहीं है। कभी कानून की रक्षा करने की कसम खाने वाला यह शख्स पुलिस की वर्दी की आड़ में ही बड़े जघन्य अपराधों को खुलेआम अंजाम देने लगा था। जब पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को उसकी इन काली करतूतों की भनक लगी, तो उसे तुरंत प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया गया था। लेकिन, वर्दी छिनने के बाद तो रामवीर जैसे पूरी तरह से बेलगाम हो गया और वह जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की राह पर तेजी से निकल पड़ा।

पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 55 वर्षीय रामवीर सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कई अलग-अलग जिलों में बेहद संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद और हाथरस जैसे जिलों में उस पर हत्या (Murder), लूट, डकैती और अपहरण (Kidnapping) के दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं। वह पुलिस के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन चुका था। अपने पीछे लगी पुलिस की लगातार दबिश और अपनी गिरफ्तारी की लटकती तलवार को देखकर ही उसने इस बेगुनाह भिखारी की बलि चढ़ाने का यह खौफनाक फैसला लिया था। उसे पूरा यकीन था कि एक पूर्व पुलिसवाला होने के नाते वह जांच एजेंसियों को बहुत आसानी से चकमा दे देगा।

हाथरस पुलिस की बड़ी कामयाबी और आगे की कार्रवाई

अंततः, पुलिस की सर्विलांस टीम (Surveillance Team) और मुखबिरों के बिछाए गए सटीक जाल में यह शातिर अपराधी बुरी तरह से फंस ही गया। 14 अप्रैल 2026 को हाथरस पुलिस ने एक बेहद गुप्त और त्वरित कार्रवाई करते हुए रामवीर सिंह को एक इलाके से धर दबोचा। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो वह एक नई पहचान के साथ किसी बहुत सुरक्षित ठिकाने पर भागने की फिराक में था। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस अधिकारियों ने उससे थाने में कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और उसने अपना जुर्म पूरी तरह से कबूल कर लिया।

उसने पुलिस को बताया कि वह सालों से कोर्ट-कचहरी और पुलिस की भागदौड़ से पूरी तरह थक चुका था और एक ‘मुर्दा’ बनकर आजाद जिंदगी जीना चाहता था। पुलिस ने इस मामले में हत्या, साक्ष्य मिटाने और पुलिस को गुमराह करने की सबसे सख्त और संगीन धाराओं के तहत एक नया और मजबूत मुकदमा दर्ज कर लिया है। हाथरस पुलिस की यह त्वरित और शानदार कार्रवाई पूरे समाज और अपराधियों में यह कड़ा संदेश देती है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर और पढ़ा-लिखा क्यों न हो, वह कानून की तीसरी आंख से कभी नहीं बच सकता। एक बेगुनाह और लाचार भिखारी की निर्मम हत्या करने वाले इस बर्खास्त सिपाही को अब अपने किए की सबसे कड़ी और खौफनाक सजा भुगतनी होगी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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