National Desk, tajnews.in | Thursday, April 16, 2026, 08:35:15 PM IST

नई दिल्ली: डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने दुनिया को मुट्ठी में ला दिया है, वहीं इसने साइबर अपराधियों को मासूम लोगों की भावनाओं और जिंदगियों से खेलने का एक बहुत बड़ा और खतरनाक हथियार भी दे दिया है। देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसे ही बेहद खौफनाक और चौंकाने वाले ‘साइबर क्राइम’ (Cyber Crime) का पर्दाफाश हुआ है, जिसकी कहानी किसी हॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने एक ऐसे शातिर और मास्टरमाइंड अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने देश की 500 से भी अधिक महिलाओं को अपने प्यार के झूठे जाल (Romance Scam) और हनीट्रैप का शिकार बनाया है। यह अपराधी डेटिंग और मैट्रिमोनियल (Matrimonial) वेबसाइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं से दोस्ती करता था, उनका भरोसा जीतता था और फिर उनकी निजी तस्वीरों के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करके करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस की गिरफ्त में आया यह शातिर ठग इतने पेशेवर तरीके से काम करता था कि पढ़ी-लिखी और उच्च पदों पर काम करने वाली महिलाएं भी बहुत आसानी से इसके खतरनाक जाल में फंस जाती थीं। दिल्ली पुलिस की इस बड़ी कामयाबी ने ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में छिपे उस काले सच को उजागर कर दिया है, जो हर दिन सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी तबाह कर रहा है।
फर्जी प्रोफाइल और प्यार का वह खतरनाक जाल
आज के समय में जीवनसाथी या एक अच्छे दोस्त की तलाश में लाखों लोग मैट्रिमोनियल और डेटिंग ऐप्स (Dating Apps) का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, स्क्रीन के उस पार बैठा व्यक्ति असल में कौन है, यह जानना बेहद मुश्किल होता है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, गिरफ्तार किया गया यह शातिर अपराधी इसी गुमनामी का सबसे बड़ा फायदा उठाता था। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि यह ठग इंटरनेट से हैंडसम और स्मार्ट विदेशी या एनआरआई (NRI) लड़कों की तस्वीरें चुराकर अपनी सैकड़ों फर्जी प्रोफाइल (Fake Profiles) बनाता था। वह खुद को कभी किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी का सीईओ बताता था, तो कभी लंदन या अमेरिका में सेटल एक अमीर डॉक्टर या इंजीनियर।
उसका ‘मोडस ऑपरेंडी’ (Modus Operandi) बेहद सधा हुआ और मनोवैज्ञानिक था। वह ऐप पर अंधाधुंध रिक्वेस्ट भेजने के बजाय अपना शिकार बहुत ही सावधानी से चुनता था। उसकी रडार पर मुख्य रूप से 30 से 45 वर्ष की वे महिलाएं होती थीं, जो या तो तलाकशुदा (Divorced) थीं, विधवा थीं या फिर अपने जीवन में भयंकर अकेलेपन का सामना कर रही थीं। एक बार जब कोई महिला उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार कर लेती थी, तो वह बहुत ही मीठी-मीठी और चिकनी-चुपड़ी बातों से उसे अपने विश्वास में लेना शुरू कर देता था। वह उन्हें भविष्य के बड़े सपने दिखाता, शादी के झूठे वादे करता और खुद को दुनिया का सबसे केयरिंग इंसान साबित करने का नाटक करता था। धीरे-धीरे वह महिलाओं को डेटिंग ऐप से हटाकर वॉट्सऐप या अन्य प्राइवेट चैटिंग ऐप्स पर ले आता था, जहां बातचीत का सिलसिला दिन-रात चलने लगता था।
भरोसे का कत्ल, निजी तस्वीरें और ब्लैकमेलिंग का खौफनाक दौर
जब महिला पूरी तरह से भावनात्मक रूप से उस अपराधी पर निर्भर हो जाती थी और उसे अपना जीवनसाथी मान बैठती थी, तब यह शातिर ठग अपने खेल के दूसरे और सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश करता था। प्यार और भरोसे की आड़ में वह महिलाओं को वीडियो कॉल (Video Call) या चैट के दौरान अपनी निजी और आपत्तिजनक तस्वीरें (Intimate Photos) साझा करने के लिए मजबूर करता था। कई बार वह खुद भी इंटरनेट से डाउनलोड किए गए फर्जी अश्लील वीडियो भेजकर महिलाओं को फंसाता था और स्क्रीन रिकॉर्डिंग (Screen Recording) के जरिए उनके प्राइवेट पलों को अपने फोन में हमेशा के लिए सेव कर लेता था।
जैसे ही उसके हाथ में महिला का कोई भी आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीर लगती, उसका असली शैतानी चेहरा बाहर आ जाता था। जो शख्स कल तक प्यार की कसमें खा रहा था, वह अचानक एक खूंखार ब्लैकमेलर (Blackmailer) बन जाता था। वह महिलाओं को धमकाना शुरू कर देता कि अगर उन्होंने उसे तुरंत भारी रकम नहीं दी, तो वह उन तस्वीरों को उनके रिश्तेदारों, परिवार वालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह से वायरल कर देगा। भारतीय समाज में बदनामी और इज्जत के डर से महिलाएं बुरी तरह से सहम जाती थीं। समाज और परिवार के डर के कारण वे चुपचाप अपने जेवर बेचकर, अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई तोड़कर या दोस्तों से उधार लेकर उस ब्लैकमेलर को लाखों रुपये ट्रांसफर करने लगती थीं। इस तरह उसने 500 से अधिक महिलाओं की जिंदगी को एक जीते-जागते नर्क में तब्दील कर दिया था।
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कैसे पुलिस के जाल में फंसा यह ‘डिजिटल शिकारी’?
इस शातिर अपराधी के पाप का घड़ा तब भर गया, जब कुछ हिम्मती और पढ़ी-लिखी महिलाओं ने सामाजिक कलंक (Social Stigma) के डर को दरकिनार करते हुए पुलिस में जाने का बेहद कड़ा फैसला लिया। दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल में जब एक के बाद एक कई महिलाओं की एक ही पैटर्न वाली शिकायतें पहुंचने लगीं, तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए। पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े और सुनियोजित रैकेट का हिस्सा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस की तकनीकी टीम ने महीनों तक इस अपराधी के डिजिटल फुटप्रिंट्स (Digital Footprints) को खंगाला। जिन बैंक खातों में ठगी का पैसा जा रहा था, उन खातों की कड़ियों को एक-एक करके जोड़ा गया। अपराधी इतना शातिर था कि वह इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP Address) को छिपाने के लिए वीपीएन (VPN) और डार्क वेब टूल्स का भारी इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन, लगातार इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिरों के बिछाए जाल के बाद पुलिस ने आखिरकार उसकी असल लोकेशन को ट्रेस कर लिया। एक बेहद गुप्त ऑपरेशन के तहत पुलिस ने उसके ठिकाने पर धावा बोला और उसे उसके दर्जनों फर्जी सिम कार्ड्स, स्मार्टफोन्स और लैपटॉप के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। उपकरणों की जांच करने पर पुलिस को 500 से अधिक महिलाओं के डेटा, चैट्स और वीडियो बरामद हुए हैं।
दिल्ली पुलिस की अपील और महिलाओं के लिए चेतावनी
इस गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने समाज और विशेषकर महिलाओं के लिए एक बहुत ही सख्त और जरूरी एडवाइजरी जारी की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया या किसी भी डेटिंग प्लेटफॉर्म पर किसी अजनबी पर आंख मूंदकर भरोसा करना आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी व्यक्ति से अपनी निजी तस्वीरें, बैंक की जानकारी या कोई भी संवेदनशील डेटा कभी भी साझा न करें। जब तक आप किसी व्यक्ति से असल जिंदगी (Real Life) में न मिलें और उसकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल न कर लें, तब तक उसे अपने घर या जीवन में एंट्री न दें।
अधिकारियों ने यह भी अपील की है कि अगर कोई महिला इस तरह के ‘रोमांस स्कैम’ या हनीट्रैप का शिकार हुई है, तो वह बिल्कुल भी डरे या घबराए नहीं। ब्लैकमेलर को पैसे देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे उसकी हिम्मत और ज्यादा बढ़ती है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को तुरंत साइबर पुलिस हेल्पलाइन नंबर (1930) पर संपर्क करना चाहिए। पुलिस उनकी पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखकर उनकी मदद करेगी। फिलहाल, गिरफ्तार किए गए इस मास्टरमाइंड से पुलिस बहुत सख्ती से पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। यह घटना डिजिटल दुनिया की उस काली और कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जिससे बचने के लिए जागरूकता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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