National Desk, tajnews.in | Monday, April 13, 2026, 02:45:30 PM IST

कटनी/नई दिल्ली: आधुनिक भारत में जहां हम चांद और मंगल पर पहुंचने का जश्न मना रहे हैं, वहीं जमीन पर कुछ ऐसे खौफनाक काले धंधे फल-फूल रहे हैं जो इंसानियत के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं। मध्य प्रदेश के कटनी (Katni) रेलवे जंक्शन से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और चाइल्डलाइन (Childline) की संयुक्त टीम ने मानव तस्करी (Human Trafficking) के एक बहुत बड़े और संगठित अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना के आधार पर जब पुलिस की टीम ने कटनी स्टेशन पर रुकी एक एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बों में अचानक छापेमारी की, तो अंदर का नजारा देखकर उनके भी होश उड़ गए। ट्रेन की बोगियों में भेड़ों और बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर भरे हुए 170 मासूम बच्चे बरामद किए गए। इन डरे-सहमे और भूखे-प्यासे बच्चों को देश के विभिन्न गरीब राज्यों से बहला-फुसलाकर लाया गया था और उन्हें बाल मजदूरी की भट्टी में झोंकने के लिए किसी दूसरे शहर ले जाया जा रहा था। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ बच्चों की बरामदगी ने रेलवे और पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मचा दिया है। इस महा-रेस्क्यू ऑपरेशन (Mega Rescue Operation) के बाद अब जांच एजेंसियां इस खौफनाक नेक्सस के ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में जुट गई हैं।
गुप्त सूचना और कटनी स्टेशन पर बिछाया गया जाल
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, भारत में रेलवे नेटवर्क मानव तस्करों के लिए हमेशा से एक सबसे सुलभ और आसान जरिया रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे का ‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ (Operation Nanhe Farishte) लगातार सक्रिय रहता है। सोमवार सुबह रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की खुफिया विंग (Intelligence Wing) को एक बेहद सटीक और पुख्ता इनपुट मिला था। सूचना यह थी कि एक विशेष एक्सप्रेस ट्रेन के कुछ डिब्बों में भारी संख्या में नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से ले जाया जा रहा है और उनके साथ कुछ संदिग्ध लोग भी सफर कर रहे हैं। कटनी जंक्शन देश के सबसे व्यस्त और बड़े रेलवे जंक्शनों में से एक है, जहां से देश के हर कोने के लिए ट्रेनें गुजरती हैं।
सूचना मिलते ही कटनी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और रेलवे महकमे के कान खड़े हो गए। बिना एक भी पल गंवाए, आरपीएफ, जीआरपी, स्थानीय पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन (Childline) की कई संयुक्त टीमों का गठन किया गया। जैसे ही वह संदिग्ध ट्रेन कटनी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, पुलिस के दर्जनों जवानों ने पूरी ट्रेन को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस टीम ने तुरंत जनरल और स्लीपर डिब्बों के अंदर प्रवेश किया और अपनी सघन तलाशी (Search Operation) शुरू कर दी।
बोगियों का दर्दनाक मंजर: डरे, सहमे और भूखे थे 170 बच्चे
जब पुलिस जवानों ने ट्रेन की बोगियों के अंदर का नजारा देखा, तो सख्त से सख्त वर्दी वाले की भी आंखें नम हो गईं। डिब्बों की फर्श पर, टॉयलेट के पास और सीटों के नीचे छोटे-छोटे मासूम बच्चे ऐसे ठूंस कर भरे गए थे, जैसे वे इंसान नहीं बल्कि कोई निर्जीव सामान हों। रेस्क्यू टीम ने जब गिनती शुरू की, तो यह आंकड़ा चौंकाने वाला निकला। ट्रेन से एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 170 बच्चों को बाहर निकाला गया। इन सभी बच्चों की उम्र 8 साल से लेकर 15 साल के बीच बताई जा रही है।
लंबे सफर, खराब वेंटिलेशन और डर के कारण ज्यादातर बच्चों की हालत बेहद दयनीय थी। वे बुरी तरह से डरे-सहमे हुए थे और भूख-प्यास से बेहाल होकर रो रहे थे। बच्चों ने मैले-कुचैले कपड़े पहने हुए थे। आरपीएफ और चाइल्डलाइन की टीम ने सबसे पहले इन सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से ट्रेन से उतारकर स्टेशन के वीआईपी (VIP) वेटिंग रूम और हॉल में शिफ्ट किया। वहां तुरंत डॉक्टरों की एक टीम को बुलाकर सभी बच्चों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Checkup) कराया गया और उन्हें भरपेट भोजन तथा पानी मुहैया कराया गया। बच्चों की आंखों में पसरा हुआ खौफ साफ बता रहा था कि वे किस भयंकर मानसिक और शारीरिक यातना से गुजर रहे थे।
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गरीबी का फायदा उठाकर बिछाया गया था मानव तस्करी का जाल
पुलिस और बाल कल्याण समिति (CWC) के अधिकारियों ने जब प्यार से बच्चों की काउंसलिंग की और उनसे पूछताछ शुरू की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये सभी बच्चे बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के बेहद गरीब और पिछड़े ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। मानव तस्करी (Human Trafficking) करने वाले दलालों ने इन मासूमों के अनपढ़ और गरीब माता-पिता को अच्छी शिक्षा, मुफ्त भोजन और महानगरों में मोटी पगार वाली नौकरी दिलाने का झूठा लालच दिया था। कुछ हजार रुपयों का एडवांस (Advance) थमाकर इन बच्चों को उनके परिजनों से हमेशा के लिए दूर कर दिया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इन 170 बच्चों को दक्षिण भारत या गुजरात के किसी बड़े औद्योगिक शहर में ले जाया जा रहा था। इनका इस्तेमाल खतरनाक ईंट-भट्ठों, चूड़ी कारखानों, कालीन बनाने वाले कारखानों या फिर होटलों में बंधुआ बाल मजदूर (Child Labor) के रूप में किया जाना था। इस तरह के संगठित गिरोह बच्चों को एक बार अपने जाल में फंसा लेने के बाद उन्हें ऐसी अंधेरी कोठरियों में कैद कर देते हैं, जहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है और उन्हें बिना कोई पैसे दिए दिन-रात जानवरों की तरह खटाया जाता है। अगर आरपीएफ की टीम समय पर यह ऑपरेशन नहीं करती, तो इन 170 बच्चों का भविष्य हमेशा के लिए एक गहरे अंधकार में डूब जाता।
दलाल हिरासत में: अब मास्टरमाइंड तक पहुंचने की तैयारी
इस महा-रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने ट्रेन के डिब्बों से कुछ संदिग्ध वयस्कों (Adults) को भी धर दबोचा है, जो इन बच्चों के साथ ‘एस्कॉर्ट’ (Escort) बनकर सफर कर रहे थे। पुलिस ने इन सभी संदिग्ध दलालों को हिरासत में ले लिया है और उन्हें एक गुप्त स्थान पर ले जाकर कड़ी पूछताछ (Interrogation) कर रही है। पुलिस इन दलालों के मोबाइल फोन्स, कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट्स को भी खंगाल रही है, ताकि इस पूरे अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय (Interstate) मानव तस्करी सिंडिकेट के ‘सरगना’ (Mastermind) तक पहुंचा जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग नेटवर्क’ (Human Trafficking Network) काम कर रहा है, जिसके तार कई राज्यों में फैले हुए हैं। इस मामले में कटनी जीआरपी थाने में मानव तस्करी, किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) और अपहरण की संगीन धाराओं के तहत एक जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कर ली गई है। रेस्क्यू किए गए सभी 170 बच्चों को फिलहाल जिला बाल कल्याण समिति की देखरेख में सुरक्षित बाल संरक्षण गृहों (Children Homes) में भेज दिया गया है। समिति अब इन बच्चों के आधार कार्ड और अन्य जानकारियों के आधार पर उनके असली माता-पिता का पता लगाने की कोशिश कर रही है, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके घर वापस भेजा जा सके। कटनी स्टेशन पर हुए इस खुलासे ने पूरे देश की व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है कि आखिर पुलिस और सिस्टम की नाक के नीचे बच्चों का यह काला कारोबार इतनी आसानी से कैसे चल रहा था?
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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