National Desk, tajnews.in | Friday, April 10, 2026, 07:45:10 PM IST

तिरुवनंतपुरम/इंदौर: केरल में जिस अंतरधार्मिक विवाह को ‘प्रगतिशील भारत’ और ‘रियल केरल स्टोरी’ का नाम देकर वामपंथी सरकार के दिग्गजों ने अपनी पीठ थपथपाई थी, वही अब एक खौफनाक कानूनी जाल और राजनीतिक स्कैंडल में तब्दील हो गया है। ‘कुंभ मेला वायरल स्टार’ के रूप में सुर्खियां बटोरने वाली मोनालिसा भोसले और महाराष्ट्र के फरमान खान की शादी अब पुलिसिया कार्रवाई और अदालती घेरे में है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की एक चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि शादी के वक्त मोनालिसा बालिग नहीं, बल्कि मात्र 16 साल की एक नाबालिग बच्ची थी। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने कड़ा एक्शन लेते हुए पति फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत संगीन मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही, इस शादी में शामिल हुए केरल सरकार के मंत्रियों और सीपीआई-एम के बड़े नेताओं की भूमिका पर भी गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक नाबालिग की शादी को बढ़ावा देने के इस दुस्साहस ने न केवल केरल, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है।

‘प्रगतिशील केरल’ के दावे की हवा निकली: 16 साल की निकली वायरल स्टार
बीते 11 मार्च को केरल के तिरुवनंतपुरम के पास पूवर स्थित एक भव्य मंदिर में जब मोनालिसा भोसले और फरमान खान सात फेरे ले रहे थे, तब उसे एक ऐतिहासिक घटना के रूप में पेश किया गया था। इंदौर की रहने वाली मोनालिसा और महाराष्ट्र के फरमान खान ने दावा किया था कि वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं और अपने राज्यों में विरोध के डर से वे ‘सुरक्षित’ केरल आए हैं। शादी से ठीक पहले दोनों ने थंपानूर पुलिस स्टेशन पहुंचकर बाकायदा सुरक्षा की लिखित मांग भी की थी। उस समय पुलिस ने उनके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को बिना किसी विस्तृत जांच के सही मान लिया और उन्हें शादी की हरी झंडी दे दी।

हालांकि, यह पूरी कहानी तब ताश के पत्तों की तरह ढह गई जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले में दखल दिया। आयोग को शिकायत मिली थी कि मोनालिसा आदिवासी समुदाय से आती हैं और उनकी उम्र कम है। आयोग की गहन जांच में जो दस्तावेज सामने आए, उन्होंने सबके होश उड़ा दिए। स्कूल रिकॉर्ड्स और आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इसका सीधा मतलब यह है कि जिस समय वह शादी के मंडप में बैठी थीं, उनकी उम्र 18 साल से काफी कम, यानी महज 16 साल थी। आयोग ने यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया है कि इस शादी को कानूनी रूप देने के लिए स्थानीय स्तर पर एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र भी तैयार करवाया गया था।
मध्य प्रदेश पुलिस का कड़ा प्रहार: फरमान खान पर संगीन धाराएं
मोनालिसा के नाबालिग होने की पुष्टि होते ही मध्य प्रदेश पुलिस ने इस मामले में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इंदौर पुलिस ने मोनालिसा के परिवार की शिकायत और आयोग की रिपोर्ट के आधार पर फरमान खान के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) कानून के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। कानूनन 18 साल से कम उम्र की लड़की की सहमति का कोई अर्थ नहीं होता, इसलिए इस पूरी शादी को अब एक आपराधिक कृत्य के तौर पर देखा जा रहा है।

इंदौर पुलिस की एक विशेष टीम अब महाराष्ट्र और केरल के संभावित ठिकानों पर फरमान खान की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक साधारण प्रेम विवाह का मामला नहीं लग रहा है, बल्कि इसके पीछे जाली दस्तावेज बनवाने वाला एक बड़ा गिरोह भी सक्रिय हो सकता है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फरमान खान को मोनालिसा की असली उम्र के बारे में पता था या नहीं, और अगर पता था तो उसने यह जानकारी क्यों छिपाई? इस गिरफ्तारी के डर से फिलहाल दोनों के भूमिगत होने की भी खबरें आ रही हैं।
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सीपीआई-एम के दिग्गज नेता कठघरे में: ‘रियल केरल स्टोरी’ पर सवाल
यह मामला केवल एक कानूनी उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने केरल की वामपंथी राजनीति को भी गहरे संकट में डाल दिया है। इस शादी में सीपीआई-एम के कई दिग्गज नेता न केवल शामिल हुए थे, बल्कि उन्होंने इसे दक्षिणपंथी विमर्श के खिलाफ एक बड़ी जीत के रूप में प्रचारित किया था। पार्टी के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन, शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी और राज्यसभा सांसद एए रहीम ने सोशल मीडिया पर इस नवविवाहित जोड़े के साथ तस्वीरें साझा की थीं और इसे ‘सांप्रदायिक सौहार्द’ की एक महान मिसाल बताया था।

अब विपक्षी दल बीजेपी और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। विपक्ष का सवाल है कि क्या शिक्षा मंत्री और सत्ताधारी दल के सचिव इतने लापरवाह थे कि उन्होंने एक नाबालिग लड़की की शादी को न केवल होने दिया, बल्कि उसका जश्न भी मनाया? बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन या उम्र की जांच के इस शादी को ‘रियल केरल स्टोरी’ करार देना क्या एक एजेंडा चलाने की कोशिश थी? केरल पुलिस की थंपानूर इकाई की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है कि आखिर सुरक्षा की गुहार लगाने पहुंचे जोड़े के दस्तावेजों की पड़ताल क्यों नहीं की गई।
राष्ट्रीय आयोग की सख्ती: दिल्ली तलब किए गए पुलिस प्रमुख
मामले की गंभीरता और इसमें शामिल संवैधानिक उल्लंघन को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे आदिवासी लड़की के अधिकारों का खुला हनन माना है। आयोग ने केरल और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को कड़ा नोटिस जारी करते हुए 22 अप्रैल को दिल्ली स्थित मुख्यालय में पेश होने का आदेश दिया है।
आयोग यह जानना चाहता है कि आखिर एक नाबालिग लड़की को एक राज्य से दूसरे राज्य कैसे ले जाया गया और कैसे सरकारी तंत्र की नाक के नीचे फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर उसकी शादी करवा दी गई। आयोग ने इस मामले में उन सभी नेताओं और अधिकारियों की लिस्ट भी मांगी है जिन्होंने इस शादी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। यह समन केरल सरकार के लिए किसी बड़े कूटनीतिक झटके से कम नहीं है, क्योंकि उसे अब दिल्ली में इस बात का जवाब देना होगा कि क्यों उसके शासन में ‘सुरक्षा’ के नाम पर एक नाबालिग की शादी को बढ़ावा दिया गया। फिलहाल, मोनालिसा भोसले की यह ‘वायरल’ लव स्टोरी अब एक ऐसे कानूनी दलदल में फंस चुकी है, जहां से बाहर निकलना फरमान खान और केरल सरकार दोनों के लिए नामुमकिन नजर आ रहा है।

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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