National Desk, Taj News | Monday, April 13, 2026, 01:30:15 PM IST

कांकेर: लाल आतंक के खात्मे के लिए सुरक्षाबलों का ‘ऑपरेशन प्रहार’ अब अपने निर्णायक और सबसे आक्रामक दौर में पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले कांकेर जिले में सोमवार तड़के सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच एक भयंकर और खूनी मुठभेड़ हुई है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच हुई इस भीषण गोलीबारी में जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक हार्डकोर महिला नक्सली को मौके पर ही ढेर कर दिया है। यह मुठभेड़ कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हिदूर के बेहद संवेदनशील और नक्सल कोर इलाके में हुई। सुरक्षाबलों को गुप्त खुफिया इनपुट मिला था कि इलाके में नक्सलियों का एक बड़ा कमांडर अपने हथियारबंद कैडर्स के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घात लगाए बैठा है। इसी सटीक सूचना पर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की संयुक्त टीम ने इलाके में एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया, जो जल्द ही एक आमने-सामने की मुठभेड़ में तब्दील हो गया। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि माओवादियों के छिपने के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों में भी अब सुरक्षाबलों की सीधी और अचूक पहुंच हो गई है। इलाके में भारी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी गई है और फरार नक्सलियों की तलाश में सघन सर्च ऑपरेशन (Search Operation) लगातार जारी है।
रात के अंधेरे में बिछाया गया जाल: खुफिया इनपुट पर बड़ा प्रहार
बस्तर का इलाका अपने घने जंगलों, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और लाल आतंक के खौफ के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से सुरक्षाबलों ने माओवादियों के इस ‘सेफ जोन’ में घुसकर उन्हें मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया है। पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात एंटी-नक्सल ऑपरेशंस (Anti-Naxal Operations) की खुफिया विंग को एक बेहद सटीक और पुख्ता इनपुट मिला था। सूचना यह थी कि कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा से सटे हिदूर के जंगलों में नक्सलियों के ‘परतापुर एरिया कमेटी’ के 15 से 20 हथियारबंद सदस्य किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों) के दौरान नक्सली अक्सर अपना ‘टेक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन’ (TCOC) चलाते हैं, जिसमें वे सुरक्षाबलों पर एंबुश (घात लगाकर हमला) करने की कोशिश करते हैं।
इस बेहद अहम खुफिया सूचना को गंभीरता से लेते हुए, कांकेर पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर तुरंत एक जॉइंट ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई। रात के घने अंधेरे में ही डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), जो स्थानीय आदिवासी युवाओं की एक बेहद अचूक और खतरनाक एंटी-नक्सल फोर्स है, और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की कई टुकड़ियों को इलाके की तरफ रवाना कर दिया गया। जवानों ने बिना कोई शोर किए, पूरी रणनीतिक खामोशी के साथ कई किलोमीटर का पैदल सफर तय किया और नक्सलियों के संभावित ठिकाने की घेराबंदी (Cordon) शुरू कर दी। यह एक बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन था, क्योंकि रात के अंधेरे में घने जंगलों में आईईडी (IED) विस्फोटों और लैंडमाइंस का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
तड़के शुरू हुई भारी गोलीबारी, नक्सलियों ने किया एंबुश का प्रयास
सोमवार की सुबह जैसे ही पौ फटी और सूरज की पहली किरण ने जंगल को रोशन किया, सुरक्षाबलों का घेरा नक्सलियों के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था। माओवादी संतरियों को जवानों की आहट लग गई और उन्होंने बौखलाहट में सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी। नक्सलियों की रणनीति यह थी कि वे भारी गोलीबारी (Heavy Fire) की आड़ में जवानों को उलझाकर घने जंगल का फायदा उठाते हुए भाग निकलेंगे। लेकिन इस बार उनका सामना उस डीआरजी (DRG) और बीएसएफ (BSF) के जवानों से था, जो पूरी तरह से अलर्ट थे और ‘आर-पार’ की लड़ाई के मूड में आए थे।
जवानों ने मोर्चा संभाला और नक्सलियों की गोलीबारी का तुरंत मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से लगभग एक घंटे तक जबरदस्त क्रॉसफायरिंग (Crossfiring) होती रही। पूरे जंगल का इलाका गोलियों की गड़गड़ाहट और धमाकों की आवाज से दहल उठा। सुरक्षाबलों की सटीक और आक्रामक जवाबी फायरिंग के सामने नक्सली ज्यादा देर तक टिक नहीं सके। अपनी जान पर बन आई देख, नक्सली कैडर्स अपने साथियों को पीछे छोड़कर जंगल की आड़ में भाग खड़े हुए। फायरिंग रुकने के बाद जब जवानों ने पूरी सावधानी के साथ इलाके की सर्चिंग शुरू की, तो उन्होंने खून से लथपथ एक माओवादी का शव बरामद किया।
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हार्डकोर महिला नक्सली ढेर, भारी हथियारों का जखीरा बरामद
सर्चिंग के दौरान जवानों ने जिस माओवादी का शव बरामद किया, वह एक महिला नक्सली थी। वह पूरी तरह से प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन की खाकी वर्दी पहने हुए थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मारे गई महिला नक्सली संगठन की किसी ऊंची रैंक (जैसे एरिया कमेटी मेंबर या प्लाटून कमांडर) पर काबिज थी, जिसकी पहचान की पुष्टि करने के लिए शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। महिला नक्सली के शव के ठीक पास से सुरक्षाबलों को एक भारी और घातक हथियार बरामद हुआ है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह एक एसएलआर (SLR) या एके-47 (AK-47) जैसी ऑटोमैटिक राइफल है, जिसका इस्तेमाल नक्सली अमूमन बड़े हमलों में करते हैं।
इसके अलावा, घटनास्थल की सघन तलाशी में सुरक्षाबलों के हाथ एक बड़ा जखीरा लगा है। मौके से कई जिंदा कारतूस, जंगलों में धमाके करने के लिए इस्तेमाल होने वाले टिफिन बम (IEDs), वॉकी-टॉकी सेट, नक्सली साहित्य (Maoist Literature), दवाइयां और रोजमर्रा के इस्तेमाल का भारी सामान बरामद हुआ है। यह भारी रिकवरी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि नक्सलियों की यह टुकड़ी वहां काफी दिनों से डेरा जमाए हुए थी और किसी बड़े सुरक्षा कैंप या जवानों की पेट्रोलिंग पार्टी को अपना शिकार बनाने की एक घातक योजना बुन रही थी। जवानों की मुस्तैदी और अचूक खुफिया सूचना ने बस्तर में एक बहुत बड़ी रक्तपात की घटना को टाल दिया है।
विकास की चोट से बौखलाए माओवादी, बस्तर आईजी की दो-टूक
बस्तर संभाग में हाल के दिनों में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान अपने सबसे आक्रामक और सफल दौर से गुजर रहा है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने स्पष्ट कर दिया है कि बस्तर से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने तक सुरक्षाबलों का यह सघन अभियान इसी तरह जारी रहेगा। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नक्सलियों के लिए अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे सरकार की ‘नक्सल आत्मसमर्पण नीति’ (Surrender Policy) के तहत हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं, या फिर सुरक्षाबलों की गोलियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की इस नीति ने माओवादी कमांडरों के बीच भारी खौफ पैदा कर दिया है।
दरअसल, नक्सलियों की इस बढ़ती बौखलाहट का एक बहुत बड़ा कारण बस्तर के घने जंगलों में तेजी से पहुंच रहा विकास भी है। सरकार लगातार कोर नक्सल इलाकों में नई सड़कें, मोबाइल टावर, पुलिस कैंप और अस्पताल बना रही है। अब तक जिन इलाकों (जैसे अबूझमाड़ और हिदूर) को नक्सली अपनी ‘अभेद्य किलाबंदी’ मानते थे, वहां अब सुरक्षाबलों के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) स्थापित हो चुके हैं। विकास की इस रोशनी ने नक्सलियों के प्रोपेगेंडा की कमर तोड़ दी है और गांव वाले अब खुद पुलिस का साथ दे रहे हैं। इसी जनाधार को खिसकता देख माओवादी हताशा में सुरक्षाबलों पर हमले की साजिश रच रहे हैं। फिलहाल, कांकेर के उस घने जंगली इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को हेलीकॉप्टर के जरिए ड्रॉप कर दिया गया है। खून के निशानों और पगडंडियों का पीछा करते हुए जवानों की कई अलग-अलग टीमें जंगल में गहराई तक सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, ताकि गोलीबारी में घायल हुए अन्य नक्सलियों को भी धर दबोचा जा सके। छत्तीसगढ़ में लाल आतंक के खिलाफ यह लड़ाई अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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