National Desk, tajnews.in | Sunday, April 12, 2026, 09:45:30 AM IST

नई दिल्ली: एक बेटी के लिए उसका पिता दुनिया का सबसे महफूज साया होता है, जो उसे दुनिया की हर बुरी नजर से बचाता है। लेकिन क्या हो जब घर का वही रक्षक ही सबसे बड़ा और खूंखार भक्षक बन जाए? देश की राजधानी दिल्ली के बुराड़ी इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली और घिनौनी वारदात सामने आई है, जिसे सुनकर इंसानियत भी शर्म से पानी-पानी हो जाए। यहां एक कलियुगी पिता ने रिश्तों की सारी पवित्र मर्यादाओं को तार-तार करते हुए पिछले 10 सालों तक अपनी ही सगी बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया। वारदात की शुरुआत तब हुई जब वह मासूम महज 11 साल की थी। इस पूरी त्रासदी का सबसे खौफनाक और विचलित करने वाला पहलू यह है कि जब उस पीड़ित बेटी ने अपनी सगी मां के सामने इस दरिंदगी का दर्द बयां किया, तो मां ने अपनी बेटी को सीने से लगाने के बजाय उसी हैवान पति का साथ दिया और बेटी को मुंह बंद रखने की धमकियां दीं। लेकिन 10 साल का यह लंबा शारीरिक और मानसिक नरक उस लड़की के हौसले को नहीं तोड़ पाया। 21 साल की उम्र में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की इस बहादुर छात्रा ने खुद को न्याय दिलाने की ठानी और मोबाइल कैमरे में पिता की गंदी करतूत को रिकॉर्ड कर ऐसा जाल बिछाया कि वह हैवान सीधे सलाखों के पीछे पहुंच गया।
11 साल की उम्र में टूटा बचपन, हैवानियत की शुरुआत
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, यह बेहद दर्दनाक कहानी बिहार के एक मूल निवासी परिवार की है, जो रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली आकर बस गया था। परिवार उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में रहता था। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस दिल दहला देने वाली त्रासदी की शुरुआत वर्ष 2015-16 के आसपास हुई थी। उस वक्त लड़की की उम्र महज 11 साल थी। वह उम्र जब एक बच्ची गुड्डे-गुड़ियों से खेलती है और दुनिया की समझ से कोसों दूर होती है, तब उसके अपने ही घर में उसके लिए एक खौफनाक नर्क तैयार किया जा रहा था। किसी वजह से परिवार के बाकी सदस्य गांव में रह रहे थे और वह मासूम बच्ची पढ़ाई के लिए अपने पिता के साथ दिल्ली में अकेली रहती थी।
उसी अकेलेपन का फायदा उठाकर उस कलियुगी पिता ने अपनी ही खून की मर्यादाओं को लांघ दिया। एक मनहूस दिन उसने मौका पाकर अपनी 11 साल की मासूम बेटी के साथ जबरन दुष्कर्म किया। जब बच्ची दर्द से तड़पी और रोई, तो उस हैवान ने उसे प्यार से चुप कराने के बजाय जान से मारने की भयंकर धमकियां दीं। डरी-सहमी बच्ची उस हैवानियत को समझ ही नहीं पाई। इसके बाद यह कोई एक दिन की बात नहीं रही, बल्कि यह एक अंतहीन सिलसिला बन गया। पिता के रूप में वह भेड़िया अपनी ही बेटी की आबरू को हर रोज तार-तार करता रहा और वह बच्ची घुट-घुट कर जीने को मजबूर हो गई।
जब मां की ममता भी बिक गई: 16 की उम्र में मिला दूसरा धोखा
लगातार हो रहे इस शारीरिक और मानसिक अत्याचार ने उस छोटी सी बच्ची को अंदर तक तोड़ कर रख दिया था। वह गहरे अवसाद (Depression) का शिकार हो गई। उसने अपनी इस असहनीय पीड़ा से बचने के लिए आत्महत्या (Suicide) तक का प्रयास किया, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। जब लड़की 16 साल की हुई, तो उसने अपनी हिम्मत बटोरी। उसे लगा कि दुनिया में एक मां ही होती है जो अपनी बेटी के दर्द को सबसे बेहतर समझ सकती है। एक दिन रोते हुए उसने अपनी मां के सामने पिता के सारे काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उसे उम्मीद थी कि उसकी मां उस दरिंदे पिता के खिलाफ ढाल बनकर खड़ी होगी।
लेकिन उस दिन उस लड़की का भगवान से भी भरोसा उठ गया होगा। मां ने बेटी का दर्द सुनने के बाद उसे न्याय दिलाने के बजाय उल्टा उसी को खामोश रहने की हिदायत दे दी। मां ने बदनामी के डर और अपने पति को बचाने के लिए अपनी ही बेटी को डराया-धमकाया। इस बीच लड़की का डिप्रेशन इतना बढ़ गया कि उसकी शारीरिक और मानसिक तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे इलाज के लिए हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल ले जाया गया। वहां जब मनोचिकित्सकों (Psychiatrists) ने काउंसलिंग की, तो लड़की ने डॉक्टरों के सामने पिता की हरकत का खुलासा कर दिया। लेकिन यहां भी उसकी निर्दयी मां बीच में आ गई। मां ने डॉक्टरों को यह कहकर गुमराह कर दिया कि उसकी बेटी की दिमागी हालत ठीक नहीं है और वह बीमारी के कारण ऐसे मनगढ़ंत आरोप लगाती है। इस तरह मां ने इस गंभीर अपराध को एक बार फिर रफा-दफा करवा दिया।
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डीयू (DU) की पढ़ाई और खुद के लिए न्याय की लड़ाई
समय बीतता गया और वह लड़की शारीरिक और मानसिक नरक झेलते हुए भी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थी। उसकी मेहनत रंग लाई और उसे दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में विदेशी भाषा (Foreign Language) के कोर्स में दाखिला मिल गया। विश्वविद्यालय के खुले और जागरूक माहौल ने उस लड़की के अंदर एक नई जान फूंक दी। उसने समझ लिया था कि इस अत्याचार को अब और बर्दाश्त करना खुद के वजूद को खत्म करने के बराबर है। जब परिवार, मां और समाज के डर ने उसके हाथ बांध दिए थे, तो उसने ठान लिया कि वह खुद अपनी लड़ाई लड़ेगी और अपने गुनाहगार पिता को उसके अंजाम तक पहुंचाएगी।
कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उसे सबसे ज्यादा जरूरत एक ऐसे पुख्ता सबूत की थी, जिसे कोई भी अदालत या उसकी शातिर मां झुठला न सके। 21 साल की हो चुकी इस बहादुर छात्रा ने एक अचूक योजना बनाई। उसने अपने मोबाइल कैमरे को इस तरह सेट किया कि कमरे का पूरा नजारा उसमें कैद हो सके। एक रात जब वह दरिंदा पिता अपनी गंदी और घिनौनी नीयत से उसके कमरे में दाखिल हुआ, तो उस छात्रा ने छिपकर अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर दिया। उस कैमरे में उस कलियुगी पिता की वह सारी हैवानियत साफ-साफ रिकॉर्ड हो गई, जिसे वह पिछले 10 सालों से अंजाम दे रहा था। इस एक वीडियो ने उस लड़की के हाथों में न्याय का सबसे बड़ा हथियार थमा दिया।
पुलिस भी रह गई सन्न: कलियुगी पिता गिरफ्तार, सलाखों के पीछे
वह पुख्ता वीडियो सबूत हाथ में आते ही पीड़िता बिना किसी खौफ के सीधे दिल्ली पुलिस के बुराड़ी थाने पहुंची। जब उसने वहां मौजूद महिला पुलिस अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई और वह मोबाइल वीडियो दिखाया, तो खाकी वर्दी वालों के भी होश उड़ गए। इतने साल पुलिसिंग करने वाले वरिष्ठ अधिकारी भी एक पिता की इस नीचता और दरिंदगी को देखकर सन्न रह गए। पुलिस ने बिना एक पल की भी देरी किए पीड़िता का बयान दर्ज किया और आरोपी पिता के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और जान से मारने की धमकी देने जैसी अत्यंत गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली।
दिल्ली पुलिस की एक टीम ने तुरंत बुराड़ी स्थित उनके मकान पर छापा मारा और आरोपी पिता को धर दबोचा। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद उस हैवान के चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा था। पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां से न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे तुरंत जेल (तिहाड़) भेज दिया है। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन कर रही है। पुलिस उस निर्दयी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से भी सख्ती से पूछताछ कर रही है, जिन्होंने इस जघन्य अपराध को छुपाने और संरक्षण देने का काम किया। कानून के जानकारों का कहना है कि अगर मां की संलिप्तता सबूतों के साथ साबित हो जाती है, तो उसे भी सह-आरोपी (Co-accused) बनाकर जेल भेजा जा सकता है। यह घटना हमारे समाज के मुंह पर एक ऐसा तमाचा है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज के समय में हमारे घरों की चारदीवारी भी हमारी बेटियों के लिए सुरक्षित बची है? इस 21 वर्षीय बहादुर छात्रा ने समाज को यह संदेश दिया है कि जुर्म सहने से बेहतर है, जुर्म के खिलाफ आवाज उठाना, चाहे गुनाहगार आपका अपना ही क्यों न हो।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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