मुंबई में भूमाफिया के खिलाफ महा-एक्शन: 2.10 एकड़ जमीन पर कब्जा कर 14 करोड़ ठगने वाला सरगना ‘रांढा’ गिरफ्तार

National Desk, tajnews.in | Thursday, April 09, 2026, 02:40:00 PM IST

Taj News Logo
Taj News
National Desk

मुंबई: सपनों के शहर मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में जमीन के एक छोटे से टुकड़े की कीमत भी किसी खजाने से कम नहीं होती। इसी अनमोल जमीन को हथियाने के लिए भूमाफियाओं और बिल्डरों का एक ऐसा खौफनाक नेक्सस काम कर रहा है, जो आम आदमी की जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को चंद पलों में निगल जाता है। महाराष्ट्र के वसई (पूर्व) इलाके से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और दुस्साहसिक मामला सामने आया है। यहां एक बेहद शातिर भूमाफिया सरगना ने किसी और की 2.10 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर खुलेआम कब्जा कर लिया और उस पर अवैध इमारतें तानकर भोले-भाले लोगों को फ्लैट बेच दिए। इस महा-ठगी में करीब 14 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया है। इस सफेदपोश अपराध और गुंडागर्दी के खिलाफ अब मीरा भायंदर-वसई विरार (MBVV) पुलिस ने अपना हंटर चलाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी और भूमाफिया सरगना सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ ‘रांढा’ को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेल दिया है। इस गिरफ्तारी ने वसई-विरार बेल्ट में सक्रिय अन्य भूमाफियाओं की रातों की नींद उड़ा दी है।

HIGHLIGHTS
  1. करोड़ों की जमीन पर डाका: वसई पूर्व में 2.10 एकड़ की निजी जमीन पर भूमाफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध कब्जा जमा लिया।
  2. भूमाफिया रांढा गिरफ्तार: एमबीवीवी पुलिस ने महा-एक्शन लेते हुए भूमाफिया सरगना सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रांढा को धर दबोचा है।
  3. 14 करोड़ की भारी ठगी: आरोपी ने जमीन पर अवैध फ्लैट बनाकर आम जनता को बेचे और करीब 14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
  4. मालिक को जान से मारने की धमकी: जब असली जमीन मालिक ने अपना हक मांगा, तो उसे गुंडों के जरिए जान से मारने की खौफनाक धमकियां दी गईं।

2.10 एकड़ जमीन पर भूमाफिया की काली नजर और खौफनाक साजिश

वसई-विरार का इलाका पिछले कुछ सालों से तेजी से विकसित हो रहा है, जिसके चलते यहां जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। इसी तेजी का फायदा उठाने के लिए भूमाफियाओं ने पूरे इलाके में अपना जाल बिछा रखा है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रांढा की नजर वसई पूर्व में स्थित एक 2.10 एकड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन पर पड़ी। यह जमीन एक स्थानीय नागरिक की निजी और पुश्तैनी संपत्ति थी। रांढा जानता था कि इतनी बड़ी जमीन की बाजार कीमत करोड़ों में है। उसने अपने गुर्गों और भ्रष्ट अधिकारियों की मदद से इस जमीन को हड़पने की एक बेहद खौफनाक और शातिर साजिश रची।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सबसे पहले फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों का सहारा लेकर खुद को इस जमीन का केयरटेकर या मालिक साबित करने की कोशिश की। जब असली जमीन मालिक को अपनी पुश्तैनी संपत्ति पर हो रहे इस अवैध कब्जे की भनक लगी और उसने इसका विरोध किया, तो भूमाफिया का असली और खूंखार चेहरा सामने आ गया। रांढा और उसके गुर्गों ने दिनदहाड़े जमीन मालिक को जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं। उसे डराया-धमकाया गया कि अगर उसने पुलिस या कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो उसके पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। डर और खौफ के उस माहौल में असली मालिक कई महीनों तक खामोश रहने को मजबूर हो गया, और इसी खामोशी का फायदा उठाकर भूमाफिया ने उस 2.10 एकड़ जमीन पर अपना कंक्रीट का अवैध साम्राज्य खड़ा करना शुरू कर दिया।

सपनों के घर के नाम पर आम जनता से 14 करोड़ की भयंकर धोखाधड़ी

किसी और की जमीन पर अवैध कब्जा करने के बाद रांढा का अगला और सबसे बड़ा कदम था आम जनता की गाढ़ी कमाई को लूटना। उसने उस विवादित और अवैध जमीन पर बिना किसी सरकारी मंजूरी, बिना किसी बिल्डिंग प्लान और बिना महारेरा (MahaRERA) रजिस्ट्रेशन के बहुमंजिला इमारतों का निर्माण शुरू कर दिया। वसई जैसे इलाके में जहां हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना अपना एक छोटा सा घर खरीदने का होता है, वहां रांढा ने सस्ते फ्लैटों का लुभावना जाल फेंका। आकर्षक ब्रोशर, बड़े-बड़े वादे और दलालों की फौज के जरिए उसने भोले-भाले घर खरीदारों को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया।

जिन लोगों ने अपनी जिंदगी भर की पाई-पाई जोड़कर या बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लेकर इन इमारतों में फ्लैट बुक किए, उन्हें जरा भी इल्म नहीं था कि वे एक बहुत बड़े और सुनियोजित घोटाले का शिकार हो रहे हैं। आरोपी ने सैकड़ों लोगों को फर्जी अलॉटमेंट लेटर थमाए और उनसे एडवांस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल लिए। पुलिस के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सुरेंद्र प्रताप सिंह ने निवेशकों और घर खरीदारों से करीब 14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम ऐंठ ली। जब निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया और फ्लैट खरीदारों ने अपने घरों का पजेशन मांगना शुरू किया, तो उन्हें गोलमोल जवाब दिए जाने लगे। जल्द ही खरीदारों को यह खौफनाक सच्चाई पता चल गई कि जिस जमीन पर उनका घर बन रहा है, वह असल में किसी और की है और पूरी इमारत ही अवैध है। रातों-रात सैकड़ों परिवारों के आशियाने का सपना एक भयानक दुःस्वप्न में तब्दील हो गया।

यह भी पढ़ें

एमबीवीवी पुलिस का महा-एक्शन: ऐसे बिछाया गया भूमाफिया के लिए जाल

धोखाधड़ी के शिकार लोगों की बढ़ती तादाद और असली जमीन मालिक की हिम्मत ने आखिरकार इस मामले को पुलिस की दहलीज तक पहुंचा ही दिया। जब पीड़ितों ने वसई पुलिस स्टेशन में सामूहिक रूप से अपनी गुहार लगाई, तो इस पूरे नेक्सस की परतें उधड़नी शुरू हो गईं। मीरा भायंदर-वसई विरार (MBVV) पुलिस कमिश्नरेट ने मामले की गंभीरता और भारी-भरकम आर्थिक अपराध को देखते हुए तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। पुलिस ने सबसे पहले उन सभी फर्जी दस्तावेजों को खंगाला जिनके आधार पर जमीन कब्जाई गई थी और फ्लैटों की बुकिंग की गई थी। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद पुलिस ने सुरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रांढा और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी देने की संगीन धाराओं के तहत एक कड़क एफआईआर दर्ज कर ली।

एफआईआर दर्ज होने की भनक लगते ही रांढा भूमिगत हो गया था। लेकिन एमबीवीवी पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों का जाल बिछाकर उसकी घेराबंदी शुरू कर दी। आखिरकार 7 अप्रैल को पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली और एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए भूमाफिया सरगना को धर दबोचा गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया है, जहां से पुलिस उसे रिमांड पर लेकर इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य सफेदपोश चेहरों और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के नामों का खुलासा करवाने की कोशिश कर रही है। पुलिस अब उन सभी बैंक खातों को भी सीज करने की प्रक्रिया में है, जिनमें ठगी का वह 14 करोड़ रुपया जमा किया गया था।

सिस्टम की गहरी नींद और प्रशासन पर उठते सबसे तीखे सवाल

भूमाफिया रांढा की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने वसई-विरार नगर निगम (VVMC) और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई शर्मनाक और चुभने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2.10 एकड़ जैसी विशाल जमीन पर महीनों तक खुलेआम एक अवैध इमारत खड़ी होती रही, लेकिन नगर निगम के अतिक्रमण विभाग और स्थानीय वार्ड अधिकारियों की आंखें क्यों बंद रहीं? क्या बिना सरकारी महकमों की मिलीभगत के इतनी बड़ी अवैध कॉलोनी बसाई जा सकती है? यह साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का एक मजबूत तंत्र काम कर रहा था, जिसने इस भूमाफिया को संरक्षण दे रखा था।

अब समय आ गया है कि सरकार और पुलिस केवल इस बिल्डर की गिरफ्तारी पर ही न रुकें, बल्कि उन सभी सरकारी अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करें जिन्होंने अपनी ड्यूटी में कोताही बरती और इस अवैध निर्माण को पनपने दिया। इसके साथ ही उन सैकड़ों आम परिवारों के सामने अब अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने का एक बहुत बड़ा और जटिल कानूनी संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को फास्ट ट्रैक पर ले जाकर पीड़ितों के पैसे वापस दिलवाने की कोई ठोस व्यवस्था करे। यह घटना हर उस घर खरीदार के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो बिना महारेरा सर्टिफिकेशन और बिना लीगल टाइटल चेक किए सिर्फ सस्ते घर के लालच में बिल्डरों को अपनी जिंदगी की पूंजी सौंप देते हैं। वसई में भूमाफिया के खिलाफ पुलिस का यह एक्शन अगर जारी रहा, तो निश्चित ही इस कंक्रीट के जंगल में पसरी गंदगी कुछ हद तक साफ हो सकेगी।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Editor in Chief, Taj News

2 thoughts on “मुंबई में भूमाफिया के खिलाफ महा-एक्शन: 2.10 एकड़ जमीन पर कब्जा कर 14 करोड़ ठगने वाला सरगना ‘रांढा’ गिरफ्तार”

Leave a Comment