हिमंता बिस्वा शर्मा का कांग्रेस पर महा-प्रहार: पवन खेड़ा के घर असम पुलिस का छापा, राहुल गांधी को दी खुली चेतावनी

National Desk, tajnews.in | Wednesday, April 08, 2026, 11:45:30 AM IST

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नई दिल्ली/गुवाहाटी: देश की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर से भारी गर्माहट और कड़वाहट घुल गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और कांग्रेस पार्टी के बीच काफी लंबे समय से चल रही जुबानी जंग अब एक सीधी और आक्रामक पुलिसिया कार्रवाई में तब्दील हो चुकी है। मंगलवार को जब असम पुलिस की एक विशेष टीम ने दिल्ली में कांग्रेस के कद्दावर नेता पवन खेड़ा के घर पर अचानक छापा मारा, तो पूरे राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया। यह पूरा विवाद पवन खेड़ा के उस सनसनीखेज बयान के बाद शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर तीन अलग-अलग पासपोर्ट रखने का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले ने तब और भी ज्यादा तूल पकड़ लिया जब खुद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने इस लड़ाई में सीधा मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी कि यह मामला सिर्फ पवन खेड़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी आंच सीधे तौर पर कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी तक पहुंचेगी। देश की राजनीति में इस घटना ने एक नए भूचाल को जन्म दे दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. दिल्ली में पुलिस का एक्शन: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम पुलिस ने अचानक छापेमारी कर भारी राजनीतिक भूचाल ला दिया है।
  2. तीन पासपोर्ट का गंभीर आरोप: पवन खेड़ा ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर अवैध रूप से तीन अलग-अलग पासपोर्ट रखने का सनसनीखेज आरोप लगाया था।
  3. राहुल गांधी को सीधी चुनौती: सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा ने खुलेआम चेतावनी दी है कि इस फर्जी आरोप के पीछे राहुल गांधी हैं और पुलिस उन तक भी जरूर पहुंचेगी।
  4. गैजेट्स की जब्ती: असम पुलिस की स्पेशल टीम ने खेड़ा के घर से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ आपत्तिजनक सामग्रियां जब्त करने का बड़ा दावा किया है।

असम पुलिस की अचानक छापेमारी से दिल्ली की राजनीति में मचा हड़कंप

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के आवास पर मंगलवार की सुबह उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली जब असम पुलिस की एक टीम दलबल के साथ वहां पहुंच गई। इस कार्रवाई को इतनी गुप्त और तेज गति से अंजाम दिया गया कि दिल्ली की स्थानीय पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शुरुआत में भनक तक नहीं लगी। पुलिस टीम अपने साथ सर्च वारंट लेकर आई थी और उन्होंने बिना समय गंवाए तुरंत ही पवन खेड़ा के घर की सघन तलाशी लेना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस दौरान खेड़ा के कई करीबियों और स्टाफ से भी लंबी पूछताछ की। घर के चप्पे-चप्पे को खंगाला गया और कुछ अहम दस्तावेजों की तलाश की गई।

असम पुलिस की यह कार्रवाई गुवाहाटी के एक थाने में दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, आपराधिक साजिश रचने और मुख्यमंत्री परिवार के खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। जैसे ही इस छापेमारी की खबर फैली, पवन खेड़ा के घर के बाहर कांग्रेस समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई। समर्थकों ने असम सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस को माहौल शांत करने के लिए वहां अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। गौरतलब बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब पवन खेड़ा असम पुलिस के रडार पर आए हैं; इससे पहले भी उन्हें एक विवादास्पद टिप्पणी के मामले में दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट से उतारकर गिरफ्तार किया जा चुका है, जो उस वक्त देश भर में एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था।

तीन पासपोर्ट का वह विवादित आरोप जिसने इस राजनीतिक आग को भड़काया

इस पूरी राजनीतिक और कानूनी खींचतान की असल जड़ में वह बयान है, जो कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। खेड़ा ने बहुत ही आक्रामक अंदाज में मीडिया के सामने कुछ दस्तावेज लहराते हुए दावा किया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास एक या दो नहीं, बल्कि पूरे तीन अलग-अलग पासपोर्ट हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा अलग-अलग नामों या पहचान से कई पासपोर्ट रखना न सिर्फ देश के पासपोर्ट कानूनों का खुला उल्लंघन है, बल्कि इसके पीछे किसी बड़े आर्थिक घोटाले या मनी लॉन्ड्रिंग की गहरी साजिश की बू भी आती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस मकसद से एक ही व्यक्ति को तीन पासपोर्ट रखने की जरूरत आन पड़ी।

पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से तुरंत जांच की मांग की थी। उनके इस बयान के बाद असम की राजनीति में मानो एक भूचाल सा आ गया। हिमंता बिस्वा शर्मा, जो अपने परिवार पर हुए किसी भी हमले का जवाब बेहद बेबाकी और कठोरता से देने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने तुरंत ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। असम सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से तत्काल एक बयान जारी किया गया कि यह आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत, बेबुनियाद और मुख्यमंत्री की साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। इसके ठीक बाद गुवाहाटी के एक थाने में खेड़ा के खिलाफ एक कड़क एफआईआर दर्ज करा दी गई, जिसने मंगलवार को हुई इस भारी-भरकम पुलिसिया कार्रवाई का कानूनी आधार तैयार किया।

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राहुल गांधी तक आंच पहुंचने की सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा की सीधी चेतावनी

इस पूरे प्रकरण ने तब एक बेहद आक्रामक और राष्ट्रीय रूप ले लिया जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने खुद कैमरे के सामने आकर कांग्रेस आलाकमान को खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने बेहद सख्त और तल्ख लहजे में कहा कि पवन खेड़ा सिर्फ एक मोहरा हैं, जबकि इस पूरे फर्जी प्रोपेगेंडा की असली स्क्रिप्ट दिल्ली में बैठे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा लिखी गई है। शर्मा ने बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे तौर पर राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि मेरी पत्नी को निशाना बनाकर कांग्रेस अपनी राजनीतिक हताशा निकाल रही है और यह सब राहुल गांधी के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि यह मामला सिर्फ एक पुलिस छापे पर जाकर खत्म नहीं होगा, बल्कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और वे उन लोगों के गिरेबान तक पहुंचेंगे जो इस गंदी साजिश के असली मास्टरमाइंड हैं।

हिमंता बिस्वा शर्मा की इस चेतावनी ने राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी और हिमंता बिस्वा शर्मा के बीच की राजनीतिक अदावत किसी से छिपी नहीं है। एक समय राहुल गांधी के बेहद खास रहे हिमंता ने जब कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था, तब से ही दोनों नेताओं के बीच लगातार भयंकर कड़वाहट बनी हुई है। मुख्यमंत्री का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में असम पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए कांग्रेस के कई और बड़े नेताओं को समन भेज सकती है, जिससे देश का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच जाएगा। बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व भी इस मुद्दे पर पूरी तरह से असम के मुख्यमंत्री के साथ खड़ा नजर आ रहा है।

कांग्रेस का भयंकर हंगामा: ‘तानाशाही और राजनीतिक बदले की कार्रवाई’

पवन खेड़ा के आवास पर हुई इस पुलिसिया कार्रवाई ने कांग्रेस पार्टी के भीतर एक भारी उबाल ला दिया है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने इसे सीधे तौर पर ‘लोकतंत्र की हत्या’, ‘तानाशाही’ और ‘राजनीतिक बदले की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई’ करार दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार और असम सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सत्ता के नशे में चूर होकर विपक्षी नेताओं की आवाज को डराने और दबाने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों का इस तरह का दुरुपयोग देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह से खोखला कर रहा है। खड़गे ने सवाल पूछा कि अगर विपक्ष कोई वाजिब सवाल उठाता है, तो उसका जवाब पुलिस की छापेमारी से क्यों दिया जा रहा है?

कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रवक्ताओं ने हिमंता बिस्वा शर्मा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो वे पवन खेड़ा के आरोपों का दस्तावेजों के साथ जवाब क्यों नहीं देते? कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस का इस तरह से किसी नेता के घर घुस जाना विपक्ष को खौफजदा करने की एक सोची-समझी रणनीति है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे इस तरह की पुलिसिया धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और तीन पासपोर्ट वाले इस कथित घोटाले को लेकर संसद से लेकर सड़क तक अपनी लड़ाई को और भी ज्यादा तेज करेंगे। देश भर के कांग्रेस कार्यकर्ता अब इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने की रणनीति बना रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जब्ती और आगे की कानूनी लड़ाई का खाका

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, असम पुलिस की टीम खाली हाथ नहीं लौटी है। टीम ने पवन खेड़ा के घर से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। इनमें उनके पर्सनल मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कुछ अहम पेन ड्राइव शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन सभी उपकरणों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ जो कथित फर्जी दस्तावेज या जानकारियां फैलाई गईं, उनका मूल स्रोत क्या था और वे किसके निर्देश पर तैयार की गई थीं। इसके अलावा, पुलिस ने घर से कुछ अन्य ‘आपत्तिजनक सामग्रियां’ और प्रिंटेड दस्तावेज मिलने का भी दावा किया है, जिसे लेकर पवन खेड़ा की कानूनी मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं। पुलिस की साइबर टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन दस्तावेजों को किसी विदेशी सर्वर के जरिए भेजा गया था।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब कोर्ट के एक लंबे और पेचीदा गलियारे में जाने वाला है। पवन खेड़ा की लीगल टीम अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की पूरी तैयारी कर रही है ताकि असम पुलिस की इस एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण बताकर रद्द करवाया जा सके और उन्हें किसी भी संभावित गिरफ्तारी से फौरी राहत मिल सके। वहीं दूसरी तरफ, असम पुलिस खेड़ा को आगे की पूछताछ के लिए गुवाहाटी ले जाने की कानूनी जद्दोजहद में लगी हुई है। जैसे-जैसे देश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं, हिमंता बिस्वा शर्मा बनाम कांग्रेस की यह लड़ाई सिर्फ एक मानहानि का केस न रहकर, सत्ता और विपक्ष के बीच एक आर-पार की राजनीतिक जंग में तब्दील हो गई है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह कानूनी दांव-पेंच देश की राजनीति को किस नई दिशा में ले जाता है और क्या सच में पुलिस की जांच का दायरा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचता है या नहीं।

Pawan Singh - Chief Editor Taj News

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