कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान परंपरा: क्या तकनीक नैतिकता का स्थान ले सकती है?

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Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 08 February 2026, 07:39 PM IST डॉ प्रमोद कुमार के इस विचारोत्तेजक लेख में इक्कीसवीं सदी की सबसे प्रभावशाली शक्ति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के बीच संवाद, नैतिकता और सामूहिक प्रज्ञा के संबंधों की गहन पड़ताल की गई है। लेखक बताता है कि … Read more

घुसपैठिया मंत्र जपता भस्मासुर: असम से देश तक फैलता ज़हर और लोकतंत्र पर खतरा

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Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 08 February 2026, 07:39 PM IST लेखक: बादल सरोज — भारत में आम तौर से तीन दिन कुछ विशेष माने जाते हैं और ये सभी भारतीयों के होते हैं; 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे अवसरों पर देश मेल-मिलाप, शांति, एकजुटता और संविधान की ताकत की … Read more

क्या भारत की छोटी नदियाँ और धाराएँ यूँ ही मरने दी जाएँगी?

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Political Desk, Taj News | Updated: Monday, 08 February 2026, 09:39 PM IST बृज खंडेलवाल लिखते हैं कि भारत की हजारों छोटी नदियाँ और धाराएँ आज अपनी पहचान खोकर कूड़े, सीवर और अतिक्रमण के नीचे दबती जा रही हैं, और यह संकट अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि देश की जल-सुरक्षा, भूजल भविष्य और सभ्यतागत … Read more

अखण्ड और विकसित भारत की परिकल्पना में सामाजिक समरसता: आंबेडकर और आरएसएस के साझा वैचारिक आधार

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Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 29 January 2026, 08:10 PM IST “अखण्ड और विकसित भारत” की परिकल्पना केवल आर्थिक प्रगति या भौगोलिक एकता तक सीमित नहीं है, और लेखक डॉ प्रमोद कुमार इस लेख में तर्क देते हैं कि सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के बिना राष्ट्र-निर्माण अधूरा है, क्योंकि आंबेडकर के सामाजिक … Read more

भारत–यूरोपीय संघ एफटीए: सौदों की अम्मा या मोदी का मास्टरस्ट्रोक?

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Political Desk, Taj News | Updated: Wednesday, 28 January 2026, 08:10 PM IST दो दशकों की कूटनीतिक रस्साकशी के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेखक बृज खंडेलवाल वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का बड़ा टर्निंग पॉइंट मानते हैं, जहाँ ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच यूरोप से … Read more

भारत का कोचिंग उद्योग: सपनों का बाज़ार, टूटती उम्मीदें और दबाव की फैक्ट्री

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Political Desk, Taj News | Updated: Sunday, 25 January 2026, 10:40 AM IST महंगी फीस, झूठे वादों और असहनीय मानसिक दबाव के बीच पिसते लाखों छात्रों की हक़ीक़त को लेखक बृज खंडेलवाल अपने इस विचारात्मक आलेख में सामने रखते हैं, जहाँ कोचिंग अब शिक्षा का सहारा नहीं बल्कि डर और मजबूरी का उद्योग बन चुकी … Read more

उत्तर प्रदेश: गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत विरासत, सहअस्तित्व और सांस्कृतिक सौहार्द की भूमि

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Political Desk, Taj News | Updated: Friday, 24 January 2026, 04:40 PM IST भारत की सांस्कृतिक आत्मा और साझा सभ्यता की बहुरंगी परंपरा को रेखांकित करते हुए लेखक डॉ. प्रमोद कुमार अपने इस विचारोत्तेजक आलेख में उत्तर प्रदेश को गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत प्रतीक बताते हैं, जहाँ गंगा और यमुना के संगम की तरह ही … Read more

क्या Davos से जन्म ले रही है एक नई UN? ट्रंप, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और भारत की दुविधा

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Political Desk, Taj News | Updated: Saturday, 24 January 2026, 11:10 AM IST संयुक्त राष्ट्र को वर्षों तक “बेकार टॉक शॉप” कहकर उपहास उड़ाने वाले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा Davos में प्रस्ताव 2803 की छत्रछाया में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ जैसी नई व्यवस्था खड़ी करने की पहल को लेखक बृज खंडेलवाल वैश्विक राजनीति के गहरे विरोधाभास के … Read more

ज्ञान की गर्दन और हिंदुत्व की तलवार: विश्वविद्यालयों में विचार की घेराबंदी

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Political Desk, Taj News | Updated: Friday, 23 January 2026, 06:55 PM IST दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमों को लेकर बढ़ते वैचारिक हस्तक्षेप और अकादमिक स्वतंत्रता पर मंडराते संकट को लेखक अपूर्वानंद अपने इस तीखे आलेख में सामने रखते हैं, जहाँ जेंडर, भेदभाव, समाज, विश्व इतिहास और आधुनिक सामाजिक विज्ञान जैसे … Read more

जब मोहब्बत जानलेवा हो जाए: शायरी से पोस्टमार्टम तक रिश्तों का पतन

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Political Desk, Taj News | Updated: Friday, 23 January 2026, 11:05 AM IST नाकाम मोहब्बत के बदलते चेहरे और प्रेम से जुड़ी बढ़ती हिंसा को लेखक बृज खंडेलवाल अपने इस विचारोत्तेजक आलेख में बेहद सख़्त सामाजिक यथार्थ के साथ रखते हैं, जहाँ कभी टूटे दिलों से शायरी और गीत जन्म लेते थे, वहीं आज प्रेम … Read more

जनतंत्र की खोखली होती नींव: चुनाव, संस्थाएं और तानाशाही की बढ़त

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Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 22 January 2026, 06:35 PM IST आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर उठते गंभीर सवालों को लेखक राजेंद्र शर्मा अपने इस आलेख में सघन मतदाता पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सत्ता के चुनावी दुरुपयोग के संदर्भ में सामने रखते … Read more

काहे के विश्व गुरु? जब सभ्यता, शिष्टाचार और तहज़ीब की भाषा ही लुप्त हो रही हो

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Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 22 January 2026, 10:55 AM IST तेज़ तकनीकी प्रगति और डिजिटल आत्मनिर्भरता के दावों के बीच समाज में घुलती जा रही बदज़ुबानी, असहिष्णुता और शिष्टाचारहीन व्यवहार को लेखक बृज खंडेलवाल अपने इस विचारप्रधान आलेख में एक गहरे सांस्कृतिक संकट के रूप में देखते हैं, जहाँ कबीर की “ऐसी … Read more