काहे के विश्व गुरु? जब सभ्यता, शिष्टाचार और तहज़ीब की भाषा ही लुप्त हो रही हो

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Political Desk, Taj News | Updated: Thursday, 22 January 2026, 10:55 AM IST तेज़ तकनीकी प्रगति और डिजिटल आत्मनिर्भरता के दावों के बीच समाज में घुलती जा रही बदज़ुबानी, असहिष्णुता और शिष्टाचारहीन व्यवहार को लेखक बृज खंडेलवाल अपने इस विचारप्रधान आलेख में एक गहरे सांस्कृतिक संकट के रूप में देखते हैं, जहाँ कबीर की “ऐसी … Read more