Sanjay Parate translated article on Kerala LDF government Wayanad landslide rehabilitation township model

पुनर्वास का केरल मॉडल: केंद्र की उपेक्षा के बीच महज 10 महीने में खड़ा कर दिया ‘नया वायनाड’

आर्टिकल

Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | Agra | 18 Mar 2026, 10:15 AM IST

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Taj News Opinion Desk

विशेष राजनीतिक एवं सामाजिक आलेख
Sanjay Parate Translator
संजय पराते
अनुवादक एवं राजनीतिक विश्लेषक
उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ किसान सभा
वामपंथी मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ में प्रकाशित इस विशेष टिप्पणी का अनुवाद राजनीतिक विश्लेषक संजय पराते ने किया है। इस आलेख में बताया गया है कि कैसे केंद्र सरकार की भारी उपेक्षा और दुष्प्रचार के बावजूद, केरल की एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के लिए महज 10 महीने में एक विश्वस्तरीय टाउनशिप खड़ी कर दी। पढ़िए यह शानदार रिपोर्ट:

मुख्य बिंदु

  • केरल की एलडीएफ सरकार ने 2024 के वायनाड भूस्खलन पीड़ितों को रिकॉर्ड 10 महीने में सौंपे 178 नए घर।
  • केंद्र सरकार की उपेक्षा और राजनीतिक झूठे प्रचार के बावजूद ‘सीएमडीआरएफ’ के जरिए जुटाया गया 773 करोड़ का फंड।
  • आपदा पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के कृषि और अन्य कर्ज राज्य सरकार ने किए पूरी तरह माफ।
  • 5 क्षेत्रों और 35 समूहों में बंटी नई टाउनशिप ‘बेहतर पुनर्निर्माण’ का एक शानदार वैश्विक मॉडल बनी।

पिछले हफ्ते, केरल में एलडीएफ (LDF) सरकार ने 2024 के विनाशकारी वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों को 178 नए घर सौंपे हैं। यह राज्य सरकार द्वारा आपदा पीड़ितों के लिए बनाई जा रही एक विशाल टाउनशिप का पहला चरण था। इस मौके पर जमीन के स्वामित्व के स्थायी दस्तावेज भी पीड़ित परिवारों को सुरक्षित सौंपे गए। मानसून के दोबारा शुरू होने से पहले ही सभी पीड़ितों को जमीन और घर प्रदान करने के लिए एक बेहद मजबूत कार्य योजना तैयार की गई है। ताकि किसी भी पीड़ित को बारिश में दर-दर न भटकना पड़े।

आपको याद होगा कि उस भीषण आपदा के परिणामस्वरूप, मुंडक्काई और चूरलमाला का एक पूरा इलाका रातों-रात गायब हो गया था। उस रात लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, अपने सपनों के घरों को खो दिया और अपनी आजीविका को हमेशा के लिए खो दिया। कई लोगों को उम्र भर के लिए विकलांगता का सामना करना पड़ा। लेकिन उस मुश्किल घड़ी में केरल के पूरे समाज ने पीड़ितों को सहारा और सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट होकर काम किया। समाज ने सुनिश्चित किया कि वे अपने जीवन को फिर से सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके साथ ही केरल की एलडीएफ सरकार द्वारा अपनाए गए उच्च मानवतावादी दृष्टिकोण ने भी इस पुनर्वास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह समाज और सरकार का जैविक सहयोग ही था, जिसने उन तबाह हो चुके लोगों की जीवित रहने की एक नई कहानी को लिखा।

आपदा के पहले हफ्ते से ही सरकार के सामने कई बड़े अवरोध सामने आए। मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (CMDRF) के धन के उपयोग के खिलाफ एक बहुत ही गंदा और झूठा प्रचार किया गया। कुछ विपक्षी राजनीतिक दलों ने तो जनता से सीएमडीआरएफ में एक पैसा भी न देने की अमानवीय अपील तक कर डाली। राज्य सरकार की सहायता और पुनर्वास के बारे में पीड़ितों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर सचेत प्रयास किए गए। जब राज्य सरकार ने टाउनशिप बनाने के लिए सुरक्षित जमीन अधिग्रहित की, तो इन लोगों ने सरकार को अदालत में घसीट लिया। इस महान पुनर्वास परियोजना को पटरी से उतारने के लिए मुख्यधारा के मीडिया में एक दुर्भावनापूर्ण अभियान भी चलाया गया। इसके ऊपर से, अन्य आपदा प्रभावित राज्यों को तुरंत सहायता देने में अत्यधिक उदार रहने वाली केंद्रीय सरकार ने भी पुनर्वास के लिए केरल को कोई भी आर्थिक सहायता देने से साफ इंकार कर दिया। इसके बावजूद, निर्माण शुरू करने के सिर्फ 10 महीनों के भीतर ही, केरल में एलडीएफ सरकार वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पहला चरण पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हुई।

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इन सभी भारी अवरोधों और राजनीति के बीच, केरल के लोगों की सच्ची एकता शुरु से ही स्पष्ट थी। केरल के सभी हिस्सों से लोग स्वेच्छा से बचाव कार्यों में शामिल हुए। राहत शिविर बहुत जल्दी से स्थापित किए गए। जहां भोजन, दवाएं और आवश्यक वस्तुओं के अलावा, प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविरों में पूरे राज्य से सहायता का भारी प्रवाह हुआ। एक विशेष मंत्रिमंडलीय उप-समिति के नेतृत्व में राज्य के मंत्रियों ने प्रभावित स्थल पर ही अपना डेरा डाल लिया। उन्होंने सभी बचाव और राहत गतिविधियों की सीधे तौर पर निगरानी की। मृतकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए पुतुमाला एस्टेट में एक प्लॉट में उचित व्यवस्था की गई। जिसे कुछ ही दिनों में अधिग्रहित कर एक श्मशान घाट के रूप में स्थापित किया गया। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने शिविरों में रहने वालों को किराए के घरों और सरकारी आवासों में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए। जिससे पीड़ितों को कुछ ही हफ्तों में अपने सामान्य जीवन में वापस आने में बहुत मदद मिली।

सहायता और सहयोग के मामले में भी सरकार ने बेहतरीन काम किया। अनुपयोगी पड़े सरकारी आवासों की तुरंत मरम्मत की गई और उन्हें पीड़ितों के लिए उपलब्ध कराया गया। जो लोग अपनी पसंद के सुरक्षित स्थान पर किराए पर रहना चाहते थे, उनके लिए राज्य सरकार ने खुद किराया प्रदान किया। प्रति परिवार 6,000 रुपये किराए के लिए आवंटित किए गए, जिसमें अब तक सरकार द्वारा 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। 858 प्रभावित परिवारों को प्रति माह 1,000 रुपये के खाद्य कूपन भी प्रदान किए गए। अपनी आजीविका खोने वाले पीड़ितों को प्रति दिन 300 रूपये के हिसाब से प्रति माह 9,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस मद में अभी तक कुल 17.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 13 करोड़ रुपये राहत सहायता के रूप में और 1.3 करोड़ रुपये आपातकालीन सहायता के रूप में वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उस भयानक आपदा में अपने माता-पिता दोनों को खोने वाले 21 अनाथ बच्चों को लंबी अवधि की सहायता प्रदान करने के लिए 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

इन बेबस लोगों को मदद करने से रोकने के सभी कुत्सित प्रयासों के बावजूद, सीएमडीआरएफ में आम जनता से अभूतपूर्व सहायता का प्रवाह हुआ। वायनाड आपदा के पीड़ितों की सीधी मदद के लिए विशेष रूप से 773.98 करोड़ रुपये दान किए गए। समाज के सभी क्षेत्रों के संगठनों और आम व्यक्तियों ने खुले दिल से मदद का हाथ बढ़ाया। यहां तक कि, कुछ अन्य राज्य सरकारें भी अपनी तरफ से केरल की मदद के लिए आगे आईं। केरल में एलडीएफ सरकार ने वायनाड भूस्खलन के 555 पीड़ितों के 18.75 करोड़ रुपये के बकाए ऋण को भी पूरी तरह से माफ कर दिया है। इसका सीधा मतलब 1,620 अलग-अलग ऋणों को माफ करना था। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से आपदा पीड़ितों के राष्ट्रीयकृत बैंकों के ऋण माफ करने के लिए कई बार लिखित अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद केरल की राज्य सरकार ने खुद अपने खजाने से यह काम किया।

जब पीड़ितों के स्थायी पुनर्वास की बात आई, तो एलडीएफ सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से व्यापक समाज से उनकी राय हासिल की। सबसे पहले यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि ये नए घर बिल्कुल सुरक्षित स्थान पर हों। जहां पीड़ित एक साथ रह सकें और अपनी आजीविका भी सुचारू रूप से चला सकें। शुरुआत में वायनाड जिले में 31 स्थानों पर जमीन की पहचान की गई थी। इसे छानकर आगे 9 स्थानों का अंतिम रूप से चयन किया गया। अंत में, पीड़ितों की जरूरतों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए, नेडुम्बाला एस्टेट और एल्स्टन एस्टेट को अधिग्रहित करने का ऐतिहासिक फैसला किया गया। बाद में, 410 परिवारों को एल्स्टन एस्टेट में प्रति परिवार सात सेंट (लगभग 3050 वर्ग फीट) जमीन और अन्य सभी सार्वजनिक सुविधाओं के साथ एक नई टाउनशिप में पुनर्वास किया जाना सुनिश्चित किया गया।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकारी आदेश अक्टूबर 2024 में जारी किया गया था। नवंबर 2024 में, पहले चरण में लाभार्थियों की पहचान करने की जमीनी प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच, भूमि अधिग्रहण में कुछ लोगों द्वारा पैदा किए गए कानूनी विवाद के कारण थोड़ी देरी हुई। उच्च न्यायालय से स्पष्ट अनुमति मिलने के बाद, जमीन के मूल्यांकन और सर्वेक्षण की प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की गई। अप्रैल 2025 में, अदालत में 44.33 करोड़ रुपये जमा करके सिर्फ एक ही दिन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। और अगले ही दिन से टाउनशिप का निर्माण भी तुरंत शुरू हो गया।

इस आधुनिक टाउनशिप का निर्माण ‘उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी’ (ULCCS) ने किया था। यूएलसीसीएस की स्थापना 100 साल पहले वाग्भटानंदन (जो केरल के एक महान पुनर्जागरण नेता थे) के नेतृत्व में मजदूरों को वेतन गुलामी से मुक्त करने के महान उद्देश्य से की गई थी। गर्मियों की भारी बारिश और मानसून की कठिन चुनौतियों के बावजूद, टाउनशिप का निर्माण लगातार आगे बढ़ा और रिकॉर्ड 10 महीनों में पूरा हुआ। आज वायनाड पुनर्वास टाउनशिप एक जीती-जागती वास्तविकता है। जो हजारों निर्माण मजदूरों और सरकारी अधिकारियों की अथक मेहनत का सबसे बड़ा प्रमाण है, जिन्होंने पूरी तरह योजनाबद्ध होकर और कड़े अनुशासन के साथ यह काम किया है।

इस टाउनशिप में पक्के घरों के साथ-साथ, सामुदायिक हॉल, एक बड़ा फुटबॉल मैदान, लोगों के लिए दुकानें, सामग्री संग्रह सुविधा, एक बड़ा जलाशय, 9.5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की विशाल टंकी, उन्नत जल निकासी प्रणाली, मलजल उपचार संयंत्र (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), प्रत्येक घर में 2 केवी क्षमता का अपना सौर ऊर्जा संयंत्र, भूमिगत (अंडरग्राउंड) बिजली वितरण नेटवर्क, आपदा आश्रय और एक आपदा स्मारक जैसी बेहतरीन सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हैं। 5 अलग-अलग क्षेत्रों में डिज़ाइन की गई इस टाउनशिप को 35 समूहों (क्लस्टर्स) में बसाया गया है। प्रत्येक समूह में 8 से 20 घर हैं। प्रत्येक समूह के बीच में एक विशाल और हरा-भरा बगीचा है। साढ़े पांच मीटर चौड़ी पक्की सड़क इस बगीचे को पूरी तरह घेरती है। प्रत्येक समूह के घर उस सड़क का सामना करते हुए बहुत ही सुंदर ढंग से बनाए गए हैं। यह बगीचा बड़े लोगों के इकत्र होने, बच्चों के खेलने और यदि परिवार चाहें तो एक छोटे ‘किचन गार्डन’ के रूप में उपयोग किया जा सकता है। टाउनशिप में बनाए गए हर घर के लिए आवश्यक फर्नीचर प्रदान करने पर भी सरकार द्वारा विचार किया जा रहा है।

‘बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण’ (Build Back Better) ही वह एकमात्र लक्ष्य था, जिसने इस टाउनशिप के निर्माण के दौरान एलडीएफ सरकार का कड़ाई से मार्गदर्शन किया। इसलिए, सभी घरों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं का मजबूती से सामना करने के लिए ही किया गया था। प्रत्येक घर 9 कंक्रीट दीवारों के साथ बनाया गया है, जो 90 सेंटीमीटर चौड़ी हैं। इसके अलावा, डेढ़ फीट ऊंचाई वाले मजबूत बीम, प्लिंथ बीम और छत बीम जमीन के स्तर और छत के स्तर पर स्थापित किए गए हैं। इसलिए, हालांकि ये घर वर्तमान में एक मंजिला हैं, आवश्यकता होने पर इनके ऊपर और मंजिलें भी सुरक्षित रूप से बनाई जा सकती हैं। निर्माण के हर चरण में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है। निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री का परीक्षण निर्माण स्थल पर ही स्थापित एक विशेष प्रयोगशाला में किया गया था। इसके अलावा, निर्माण सामग्री का परीक्षण एक स्वतंत्र और बाहरी एजेंसी द्वारा भी किया गया था। प्रत्येक घर के पूरा होने से पहले 58 प्रकार के कड़े निरीक्षण किए गए थे। निर्माण मानकों को पूरा करने के लिए प्रत्येक निर्माण चरण से पहले और बाद में यह निरीक्षण किए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण में उत्तीर्ण होने के बाद ही निर्माण अगले चरण में आगे बढ़ा है।

एलडीएफ सरकार ने पीड़ितों को पुनर्वास के दो विकल्प दिए थे। वे या तो इस नई टाउनशिप में एक घर ले सकते थे, या फिर वे 15 लाख रुपये का सीधा नकद मुआवजा स्वीकार कर सकते थे। अधिकांश समझदार परिवारों ने वायनाड पुनर्वास टाउनशिप में एक सुरक्षित घर चुनना ही पसंद किया। टाउनशिप के पहले चरण में, जिनके घर भूस्खलन में पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर घर दिए गए हैं। आपदा में अपना व्यापार और व्यवसाय खोने वाले छोटे उद्यमियों के लिए एक विशेष पुनरुद्धार योजना भी उनकी सलाहों को ध्यान में रखते हुए लागू की जा रही है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, जब वायनाड पुनर्वास टाउनशिप का पूरी तरह से काम पूरा हो जाएगा, तो वहां 402 परिवारों के 1,662 लोग सुरक्षित रहेंगे। एलडीएफ सरकार ने एक ऐसा सुरक्षित स्थान बनाया है, जहां लोग अपने अवर्णनीय दुखों को पीछे छोड़ते हुए सामंजस्य से एक नया जीवन जी सकते हैं। पुनर्वास का यह ‘केरल मॉडल’ आज वैश्विक स्तर पर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। क्योंकि केंद्र सरकार की निष्ठुर उपेक्षा के बावजूद एक राज्य सरकार द्वारा अपने बलबूते इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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