By: Taj News Crime Desk | tajnews.in | 24 Feb 2026, 08:35 pm IST
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जुर्म और तहकीकात की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
लखनऊ (Lucknow): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। रिश्तों का कत्ल करते हुए एक 21 वर्षीय इकलौते बेटे ने अपने ही पिता की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। कातिल बेटे की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी; हत्या के बाद उसने शव को बाथरूम में आरी से काटा, उसके टुकड़े किए और उन्हें एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में भरकर छिपा दिया। पिता के सिर को उसने धड़ से अलग कर दिया और घर से 21 किलोमीटर दूर जाकर फेंक आया। यह खौफनाक वारदात लखनऊ के पॉश इलाके आशियाना कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-L की है, जहां वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे।
क्राइम डायरी: वारदात के मुख्य अंश (Highlights)
- 21 साल के बीकॉम के छात्र अक्षत प्रताप सिंह ने लाइसेंसी राइफल से की पिता मानवेंद्र सिंह की हत्या।
- एमबीबीएस (MBBS) करने का दबाव बना रहे थे पिता, जबकि बेटा खोलना चाहता था होटल या रेस्टोरेंट।
- शव को जलाने के लिए 10 लीटर तारपिन का तेल लाया था आरोपी, दुर्गंध छिपाने के लिए छिड़क रहा था रूम स्प्रे।
- 17 वर्षीय छोटी बहन के सामने दिया वारदात को अंजाम, पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उगल दिया सच।
▲ मृतक मानवेंद्र सिंह का घर, जहां उनके बेटे ने इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दिया।
हत्या की असली वजह: एमबीबीएस बनाम होटल बिजनेस
पुलिस जांच और आरोपी अक्षत से पूछताछ में हत्या के पीछे एक बहुत ही सामान्य लेकिन घातक पारिवारिक विवाद सामने आया है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता मानवेंद्र सिंह चाहते थे कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) क्वालीफाई करके एमबीबीएस करे और एक सफल डॉक्टर बने। लेकिन अक्षत का पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। वह अपने पिता से लगातार कहता था कि मेडिकल की पढ़ाई के लिए उस पर जबरदस्ती न की जाए। वह चाहता था कि पैथोलॉजी लैब को बंद करके वहां एक बड़ा लॉन या रेस्टोरेंट खोल दिया जाए, क्योंकि उसे लगता था कि होटल बिजनेस में ज्यादा मुनाफा है।
इसी करियर और व्यवसाय को लेकर दोनों के बीच अक्सर तीखी नोकझोंक होती थी। 20 फरवरी (मंगलवार) की सुबह करीब 4:30 बजे इसी बात पर दोनों के बीच भयंकर बहस हुई। गुस्से में आकर अक्षत ने घर में रखी लाइसेंसी राइफल उठा ली और अपने पिता को मौत के घाट उतार दिया।
▲ पुलिस ने इसी नीले ड्रम से मानवेंद्र सिंह के शव के टुकड़े बरामद किए हैं।
बहन को दी धमकी, आरी से किए टुकड़े और छिड़का रूम स्प्रे
इस हत्याकांड की सबसे खौफनाक कड़ी शव को ठिकाने लगाने की साजिश थी। जिस वक्त अक्षत ने पिता को गोली मारी, उस वक्त उसकी 17 वर्षीय छोटी बहन कृति भी वहां मौजूद थी। बहन ने जब चिल्लाने की कोशिश की, तो अक्षत ने उसे भी जान से मारने की धमकी दी। उसने कहा कि अगर इस घटना के बारे में किसी को भनक भी लगी, तो वह उसका भी वही हाल करेगा। खौफजदा बहन घर में ही कैद होकर रह गई।
इसके बाद आरोपी बेटे ने तीसरे फ्लोर से पिता की खून से लथपथ लाश को घसीटकर ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में रखा। वह बाजार गया और वहां से एक आरी और 10 लीटर तारपिन का तेल खरीद कर लाया। बाथरूम में ले जाकर उसने पिता के शव के कई टुकड़े किए। सिर और कुछ अंगों को कार में रखकर वह काकोरी इलाके के सदरौना गांव गया और वहां फेंक आया। बाकी बचे हुए धड़ और अंगों को उसने पॉलीथिन में लपेटकर एक नीले ड्रम में भर दिया। तारपिन के तेल से वह शव को जलाकर राख करने की फिराक में था। शव से उठने वाली बदबू बाहर न जाए, इसके लिए वह लगातार कमरे में रूम स्प्रे छिड़क रहा था।
9 साल पहले उठ गया था मां का साया
पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड अधिकारी हैं और उनके छोटे भाई एसएस रजावत भी यूपी पुलिस में हैं, जिनकी तैनाती वर्तमान में सचिवालय में है। मानवेंद्र सिंह कई साल पहले लखनऊ आ गए थे और आशियाना सेक्टर-L में तीन मंजिला मकान बनवाकर रहने लगे थे।
विडंबना यह है कि करीब 9 साल पहले मानवेंद्र की पत्नी का निधन हो गया था। तब से वह एक मां और पिता, दोनों की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति की देखभाल कर रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस बेटे को उन्होंने इतने लाड़-प्यार से पाला, वही उनके बुढ़ापे का सहारा बनने के बजाय उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा।
▲ फोरेंसिक टीम और पुलिस अधिकारी देर रात तक वारदात वाले घर में सबूत जुटाते रहे।
ऐसे खुला राज: खुद थाने पहुंचा और रची झूठी कहानी
पिता का कत्ल करने और सिर ठिकाने लगाने के बाद अक्षत ने बड़े ही शातिराना अंदाज में अपनी कार की सफाई की और घर के खून के धब्बे मिटाए। हत्या के इस्तेमाल में ली गई राइफल को उसने गद्दे के नीचे छिपा दिया। पुलिस को गुमराह करने के लिए वारदात के तीन दिन बाद यानी सोमवार को वह खुद आशियाना थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
उसने पुलिस को मनगढ़ंत कहानी सुनाते हुए कहा कि उसके पिता 20 फरवरी की सुबह दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और 21 फरवरी को लौटने वाले थे, लेकिन उनके तीनों मोबाइल नंबर बंद आ रहे हैं। लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से वह बच नहीं सका। उसके हाव-भाव और बार-बार बदलते बयानों ने पुलिस के कान खड़े कर दिए। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया। पहले उसने कहा कि पिता ने आत्महत्या कर ली है, लेकिन जब पुलिस ने थर्ड डिग्री का खौफ दिखाया तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पड़ोसियों का बयान: रिजर्व रहता था अक्षत, 4 साल पहले भागा था घर से
पड़ोस में रहने वाले मानवेंद्र सिंह के करीबी दोस्त धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि अक्षत मोहल्ले में किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था और उसका स्वभाव काफी ‘रिजर्व’ था। करीब चार साल पहले भी वह घर से भाग गया था और 6 पन्नों की एक चिट्ठी छोड़ गया था। उस चिट्ठी में भी उसने यही लिखा था कि वह मेडिकल की पढ़ाई नहीं करना चाहता। हालांकि, पिता के समझाने पर वह लौट आया था।
दूसरी तरफ, मृतक मानवेंद्र सिंह बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। वे समाज को जोड़कर चलते थे और स्थानीय पार्क में रामलीला का आयोजन भी करवाते थे, जिसमें अक्षत मेघनाद का रोल करता था। फिलहाल पुलिस ने हत्यारोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और उसे क्राइम सीन पर ले जाकर ‘सीन रीक्रिएट’ कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस खौफनाक वारदात ने हर मां-बाप को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर जनरेशन गैप और करियर का दबाव किस कदर खतरनाक रूप ले सकता है।
क्राइम सीन और तफ्तीश की विशेष तस्वीरें (Photo Gallery)
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