रिवर कनेक्ट कैंपेन की बैठक में पर्यावरणविदों ने सालभर न्यूनतम जल प्रवाह, सिल्ट की वैज्ञानिक सफाई और नदी किनारे अतिक्रमण पर कार्रवाई की मांग उठाई
आगरा डेस्क, ताज न्यूज़ | बुधवार, 14 अक्टूबर 2026, 08:04:00 AM IST.

आगरा, 11 अक्टूबर। ताजनगरी की जीवनरेखा यमुना को प्रदूषण, घटते जल प्रवाह और बढ़ते पर्यावरणीय दबाव से बचाने के लिए रविवार शाम यमुना आरती स्थल पर पर्यावरणविदों और समाजसेवियों ने नदी पुनर्जीवन की मांग उठाई। रिवर कनेक्ट कैंपेन के बैनर तले आयोजित बैठक में ताजमहल के डाउनस्ट्रीम में बैराज निर्माण, सालभर न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने, नदी में जमा गाद का वैज्ञानिक आकलन और गंदे नालों को यमुना में गिरने से रोकने जैसे सुझाव सामने आए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यमुना का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था या शहर के सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं है। नदी का जल प्रवाह, पानी की गुणवत्ता, भूजल पुनर्भरण और तटीय पारिस्थितिकी आगरा के पर्यावरण और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़े हैं। उन्होंने शासन और प्रशासन से नदी संरक्षण संबंधी प्रस्तावों पर समयबद्ध कार्ययोजना बनाने और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
बैराज निर्माण पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग
बैठक में ताजमहल से लगभग 1.5 किलोमीटर नीचे की ओर यमुना पर प्रस्तावित रबर डैम परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने कहा कि नदी में जल उपलब्धता और उसके प्रबंधन को लेकर इस परियोजना पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध स्थिति के अनुसार, ताजमहल से लगभग 1.5 किलोमीटर डाउनस्ट्रीम में प्रस्तावित रबर डैम परियोजना का आवेदन अभी परीक्षणाधीन दर्ज है। इसका अर्थ है कि इसे अंतिम स्वीकृति मिल जाने या निर्माण शुरू होने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
बैराज या रबर डैम को यमुना की सभी समस्याओं का अकेला समाधान मानने के बजाय नदी में पर्याप्त जल प्रवाह, प्रदूषण नियंत्रण और पानी की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है। परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों और तकनीकी पहलुओं का आकलन भी महत्वपूर्ण है।
सिल्ट की सफाई से पहले वैज्ञानिक अध्ययन पर जोर
बैठक में यमुना के तल में जमा गाद और सिल्ट की सफाई की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि नदी की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कर जरूरत के मुताबिक गाद निकासी की योजना बनाई जानी चाहिए।
नदी तल की सफाई से पहले तलछट की गुणवत्ता, जल प्रवाह और जलीय पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन आवश्यक है। बिना वैज्ञानिक आकलन के बड़े पैमाने पर खुदाई करने से नदी के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंच सकता है।
बैठक में यमुना और आसपास के जल निकायों के संरक्षण को भूजल पुनर्भरण से जोड़ते हुए प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा और वर्षाजल के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया।
गंदे नालों को रोकने के लिए समानांतर नहर का सुझाव
पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने यमुना में गिरने वाले गंदे नालों को रोकने के लिए नदी के समानांतर नहर या अन्य उपयुक्त निकासी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि दूषित पानी को इस व्यवस्था के जरिए सीवेज शोधन संयंत्रों तक पहुंचाया जा सकता है, ताकि बिना उपचार के गंदा पानी नदी में न गिरे।
उन्होंने दोनों किनारों पर पक्के तटबंध और सुनियोजित रिवर फ्रंट विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। उनके अनुसार, नदी किनारे विकास में केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी की सुरक्षा, हरित क्षेत्र और नागरिकों की सुविधाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन के 29 सितंबर 2026 को अद्यतन जिला-स्तरीय आंकड़ों के अनुसार, आगरा में यमुना से संबंधित 90 नाले दर्ज हैं। इनमें 24 टैप किए गए, 61 आंशिक रूप से टैप किए गए और पांच ऐसे नाले दर्ज हैं जिन्हें टैप किया जाना शेष है। पोर्टल पर इन नालों के कुल डिस्चार्ज और टैपिंग की स्थिति का विवरण भी दिया गया है।
यह आंकड़ा बताता है कि नालों की टैपिंग और सीवेज प्रबंधन पर काम के साथ उनकी वास्तविक स्थिति और शोधन व्यवस्था की नियमित निगरानी भी जरूरी है। किसी नाले का टैप होना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा पूरा पानी प्रभावी ढंग से शोधित हो रहा है।
प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई और तटीय प्रबंधन की मांग
बैठक में शहतोश गौतम ने यमुना किनारे प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निरंतर निगरानी व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने नदी तट पर मवेशियों के खुले घूमने पर रोक लगाने और यमुना किनारा रोड पर संचालित ट्रांसपोर्ट कंपनियों को आबादी तथा नदी क्षेत्र से दूर स्थानांतरित करने का सुझाव भी रखा।
वक्ताओं ने कहा कि नदी संरक्षण के लिए बड़े निर्माण कार्यों के साथ कचरा निस्तारण, तटीय क्षेत्रों का व्यवस्थित प्रबंधन, प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नियंत्रण और संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी जरूरी है।
नदी से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने पर जोर
जगन प्रसाद तेहरिया ने कहा कि यमुना को बचाने के लिए आम लोगों का नदी से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत करना होगा। इसके लिए नदी किनारे नियमित सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
ब्रज खंडेलवाल ने नदी किनारे पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने लाल रंग से चिह्नित अलग लेन विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और नदी किनारे का क्षेत्र नागरिकों के लिए अधिक उपयोगी बन सके।
बैठक में गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, जुगल किशोर, चतुर्भुज तिवारी और मुकेश चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
यमुना पुनर्जीवन के लिए जरूरी है समन्वित कार्ययोजना
बैठक में उठाई गई मांगों का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि यमुना की समस्याओं का समाधान किसी एक परियोजना से नहीं होगा। जल प्रवाह, बैराज या रबर डैम के प्रस्ताव, सीवेज शोधन, नालों की टैपिंग, नदी तल का वैज्ञानिक आकलन, भूजल पुनर्भरण और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा पर एक साथ काम करना होगा।
इन सुझावों को अमल में लाने के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी, समयसीमा, वित्तीय संसाधन और पर्यावरणीय मानकों की स्पष्टता जरूरी है। अब देखना होगा कि बैठक में उठाई गई मांगों पर प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और आगरा में यमुना को स्वच्छ तथा पर्यावरणीय रूप से स्वस्थ बनाने के लिए किस तरह की कार्ययोजना सामने आती है।
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ताजनगरी में यमुना जल स्तर बनाए रखने और भूजल स्तर सुधार के लिए प्रस्तावित बैराज की तकनीकी चुनौतियां।
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