नदियाँ बचेंगी, तभी जीवन बचेगा: विश्व नदी दिवस पर आह्वान

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विश्व नदी दिवस पर रिवर कनेक्ट अभियान के साथियों के नाम संदेश; राष्ट्रीय नदी नीति की मांग, यमुना के अस्तित्व और नदियों के संरक्षण पर वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का जमीनी आलेख

आर्टिकल डेस्क | 🌐 tajnews.in | 27 सितंबर 2026 | 16:08 बजे

आर्टिकल डेस्क
Brij Khandelwal

बृज खंडेलवाल

संयोजक, River Connect Campaign व वरिष्ठ पर्यावरण पत्रकार
नदी संरक्षण, अविरल यमुना प्रवाह, पर्यावरण संतुलन और नागरिक सरोकारों के लिए निरंतर समर्पित।

नदियाँ बचेंगी, तभी जीवन बचेगा
विश्व नदी दिवस पर नदी कनेक्ट अभियान के साथियों के नाम

क्या हम नदियों के बिना भारत की कल्पना कर सकते हैं?

नदियाँ केवल बहता हुआ पानी नहीं हैं। वे हमारी सभ्यता, संस्कृति, खेती, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों की जीवनरेखा हैं। गंगा हो, यमुना हो, नर्मदा हो, कावेरी हो या देश की कोई छोटी नदी, हर नदी अपने साथ जीवन लेकर चलती है।

लेकिन आज हमारी नदियाँ संकट में हैं। कहीं पानी कम हो रहा है, कहीं नदी का प्रवाह रोक दिया गया है। कहीं सीवर और औद्योगिक गंदगी नदी में गिर रही है। कहीं नदी के बाढ़ क्षेत्र पर कब्जे हो रहे हैं। नदी को हमने जीवित धारा मानने के बजाय जमीन और नाले की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

HIGHLIGHTS
  • नदियों का गहराता संकट: अनियंत्रित सीवर, औद्योगिक कचरा, घटता प्रवाह और फ्लडप्लेन पर अतिक्रमण से खतरे में नदियां।
  • यमुना और ब्रज की संस्कृति: आगरा की आत्मा है यमुना; केवल सजावटी घाटों और रोशनी से नहीं, प्राकृतिक प्रवाह से बचेगी नदी।
  • राष्ट्रीय नदी नीति की मांग: केंद्र और राज्यों की योजनाओं में तालमेल, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (e-flow) की संवैधानिक गारंटी जरूरी।
  • जनसहभागिता का संकल्प: नदी बचेगी तो खेत, किसान और भविष्य बचेगा; हर गांव व शहर तक अलख जगाने का आह्वान।

यमुना का संकट और ब्रज की जीवनरेखा

यमुना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

आगरा के लिए यमुना केवल एक नदी नहीं है। यह आत्मा है। यह ब्रज की संस्कृति का हिस्सा है। इसके किनारे सदियों से बस्तियाँ, मंदिर, घाट और लोक परंपराएँ विकसित हुई हैं। लेकिन अगर नदी में स्वच्छ और पर्याप्त पानी ही न बचे, तो केवल घाट और सजावटी रोशनी किसी नदी को जीवित नहीं कर सकती।

हमें समझना होगा कि नदी का मतलब केवल पानी नहीं, उसका प्राकृतिक प्रवाह भी है। नदी को बचाने के लिए पानी चाहिए, साफ पानी चाहिए और सबसे बढ़कर नदी को बहने की जगह चाहिए।

प्रशासनिक जवाबदेही और सीवर ट्रीटमेंट की हकीकत

राज्य सरकारों को शहरों का पूरा सीवर नदी में जाने से रोकना होगा। सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट वास्तव में चलें, उनकी नियमित निगरानी हो और नालों पर जवाबदेही तय हो। नदी के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण पर कठोर रोक लगनी चाहिए।

केंद्र सरकार को भी केवल अलग-अलग योजनाएँ चलाने के बजाय नदियों को एक समग्र राष्ट्रीय दृष्टि से देखना होगा। नदियों का पानी, प्रवाह, प्रदूषण, रेत, बाढ़ क्षेत्र, भूजल, बांध और नदी किनारे की जमीन आपस में जुड़े विषय हैं। इन्हें अलग-अलग विभागों में बाँटकर नदी नहीं बचाई जा सकती।

एक व्यापक राष्ट्रीय नदी नीति की जरूरत

इसीलिए भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय नदी नीति की जरूरत है।

ऐसी नीति में हर नदी के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित हो। नदी के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र की रक्षा हो। शहरों और उद्योगों के प्रदूषण की जिम्मेदारी स्पष्ट हो। राज्यों के बीच नदी जल विवादों का समाधान हो। बांधों और बैराजों का संचालन नदी के पर्यावरणीय हित को ध्यान में रखकर हो।

नदी नीति केवल सरकारी दस्तावेज न बने। इसमें वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, किसानों, मछुआरों, नदी किनारे रहने वाले लोगों और नागरिक संगठनों की भागीदारी हो।

रिवर कनेक्ट अभियान का अटूट संकल्प

हम सरकारों से लड़ने के लिए नहीं, नदियों के लिए खड़े होने के लिए निकले हैं।

रिवर कनेक्ट अभियान का संकल्प साफ है।
नदी बचेगी तो खेत बचेंगे।
खेत बचेंगे तो किसान बचेंगे।
पानी बचेगा तो शहर बचेंगे।
नदी बचेगी तो संस्कृति बचेगी।
और नदी बचेगी तो हमारा भविष्य बचेगा।

यमुना को अविरल और निर्मल बनाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार की जवाबदेही है, लेकिन समाज की भागीदारी भी जरूरी है।

नदी को नाला बनने से रोकना होगा।
नदी को जमीन बनने से रोकना होगा।
नदी को फिर से नदी बनाना होगा।

आइए, इस संकल्प को हर घाट, हर गांव और हर शहर तक ले जाएँ।
नदी कनेक्ट अभियान जिंदाबाद।
नदियाँ बहेंगी, तभी भारत बचेगा।

बृज खंडेलवाल
River Connect Campaign
📞 7895852750

Pawan Singh

Pawan Singh

Editor in chief, Taj News Network

pawansingh@tajnews.in

WhatsApp: 7579990777


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