भारत में Starlink की लॉन्चिंग में देरी को लेकर मस्क ने फिर लगाए ‘ओलिगार्क्स’ के आरोप; केंद्र ने कहा—तीनों सैटेलाइट ऑपरेटर समान नियामकीय चरण में, सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया जारी
राष्ट्रीय डेस्क 🌐 tajnews.in | गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026, 08:50 PM IST

नई दिल्ली। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink की व्यावसायिक शुरुआत में हो रही देरी को लेकर SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने भारत सरकार पर एक बार फिर सवाल उठाया है। सरकार की ओर से Starlink के साथ भेदभाव के आरोपों को खारिज किए जाने के कुछ घंटे बाद मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पूछा—“क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?” उनका यह सवाल Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर सीधे संकेत के तौर पर सामने आया है।
मस्क ने दावा किया कि Starlink को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार की कानूनी और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि इसके बावजूद भारत में व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा। इससे एक दिन पहले मस्क ने X पर बिना किसी कारोबारी का नाम लिए आरोप लगाया था कि कुछ ‘ओलिगार्क्स’ Starlink को भारत में रोक रहे हैं, ताकि भारतीय बाजार पर अपना एकाधिकार बनाए रखा जा सके। मस्क ने यह भी कहा था कि Starlink उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद कर सकता है जहां मोबाइल या इंटरनेट कवरेज कमजोर है।
केंद्र सरकार ने आरोपों को बताया आधारहीन
मस्क के आरोपों के बाद संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन नियामकीय ढांचा सभी कंपनियों के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि तीन लाइसेंसधारी सैटेलाइट कम्युनिकेशन ऑपरेटरों का सुरक्षा मूल्यांकन फिलहाल जारी है और तीनों व्यापक रूप से एक ही नियामकीय चरण में हैं। सरकार के अनुसार, सुरक्षा मूल्यांकन पूरा होने के बाद संबंधित लाइसेंसधारी कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में आगे बढ़ सकती है। मंत्रालय ने Starlink के साथ भेदभाव किए जाने के सुझाव को आधारहीन और गलत धारणा पर आधारित बताया है।
गृह मंत्रालय के स्तर पर चल रही सुरक्षा जांच
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने India Mobile Congress 2026 के दौरान कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मामलों को गृह मंत्रालय देख रहा है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग ने सैटेलाइट कंपनियों को लाइसेंस और प्रोविजनल स्पेक्ट्रम से संबंधित प्रक्रिया पूरी की है, जबकि सुरक्षा मंजूरी का मुद्दा फिलहाल गृह मंत्रालय के स्तर पर लंबित है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है और सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद संबंधित कंपनियां आगे की प्रक्रिया में बढ़ सकेंगी।
Starlink को मिल चुके हैं अहम नियामकीय अप्रूवल
भारत में Starlink की स्थिति पूरी तरह शुरुआती चरण में नहीं है। कंपनी को दूरसंचार विभाग से GMPCS यानी Global Mobile Personal Communications by Satellite सेवा के लिए लाइसेंस मिल चुका है। इसके अलावा जुलाई 2026 में IN-SPACe ने Starlink के सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन को लेकर आवश्यक प्राधिकरण दिया था। इसके बावजूद व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए सुरक्षा मूल्यांकन और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। सरकार की ओर से सुरक्षा शर्तों के अनुपालन को अंतिम चरणों में महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया गया है।
Starlink के साथ Jio और OneWeb भी दौड़ में
भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में Starlink अकेली कंपनी नहीं है। सरकार के अनुसार Starlink के अलावा Jio Satellite Communications और भारती ग्रुप से जुड़ी Eutelsat OneWeb को भी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए लाइसेंस मिले हैं और तीनों का सुरक्षा मूल्यांकन चल रहा है। Bharti Airtel के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने भी मस्क के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका उद्यम भी भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक मंजूरियों का इंतजार कर रहा है।
क्या मस्क का निशाना सीधे अंबानी पर है?
मस्क के शुरुआती आरोप में किसी कारोबारी का नाम नहीं था। उन्होंने केवल कुछ प्रभावशाली कारोबारी हितों पर Starlink को रोकने का आरोप लगाया था। इसके बाद 8 अक्टूबर को उन्होंने X पर सीधे पूछा—“Is Ambani the real boss of India?” इससे उनके आरोपों का संदर्भ मुकेश अंबानी और Reliance Jio की ओर जाता दिखाई देता है। हालांकि, यह मस्क की निजी टिप्पणी और सवाल है। भारत सरकार ने मुकेश अंबानी या Reliance Jio पर Starlink को रोकने का कोई आरोप स्वीकार नहीं किया है। सरकार का आधिकारिक रुख है कि सभी लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह समान है।
Reliance Jio भी सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में सक्रिय
Starlink की भारत में एंट्री ऐसे समय में अटकी है जब Reliance Jio भी सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में अपनी योजनाओं पर काम कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार Jio भारत में लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी वजह से भारतीय सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में Starlink, Jio और OneWeb के बीच प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, मौजूदा नियामकीय देरी को केवल कारोबारी प्रतिस्पर्धा से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि सरकार ने सार्वजनिक रूप से सुरक्षा मूल्यांकन को सभी लाइसेंसधारी कंपनियों के लिए समान रूप से लागू प्रक्रिया बताया है।
Starlink की भारत में एंट्री क्यों महत्वपूर्ण है?
Starlink का कहना है कि उसकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा उन ग्रामीण, दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना कठिन है। मस्क ने भी अपने हालिया पोस्ट में भारत के ऐसे क्षेत्रों का उल्लेख किया है जहां इंटरनेट या मोबाइल कवरेज उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, भारत सरकार के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं में सुरक्षा शर्तों, यूजर डेटा की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन जैसे मुद्दे सर्वोपरि हैं। यही वजह है कि लाइसेंस और अंतरिक्ष संबंधी अनुमति मिलने के बाद भी सुरक्षा मूल्यांकन तथा उसके बाद स्पेक्ट्रम आवंटन को व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले के आवश्यक चरणों में रखा गया है।
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मामला अब केवल Starlink की व्यावसायिक लॉन्चिंग तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर एलन मस्क नियामकीय देरी और कथित कारोबारी प्रभाव को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार समान नियमों और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को देरी का आधार बता रही है। फिलहाल Starlink, Jio और OneWeb के लिए सुरक्षा मूल्यांकन पूरा होना और उसके बाद स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया का आगे बढ़ना ही इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण चरण साबित होगा।

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