जंतर-मंतर 2.0 प्रदर्शन पर पुलिसिया पहरा, 50 से अधिक मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों से थमी राजधानी की रफ्तार; मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
राष्ट्रीय डेस्क 🌐 tajnews.in | रविवार, 11 अक्टूबर 2026, 03:45 AM IST

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर राजधानी शुक्रवार को अभूतपूर्व सियासी टकराव की गवाह बनी। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन के आह्वान के बाद दिल्ली पुलिस ने पूरी राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस अनुमति खारिज होने के बावजूद सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ताओं को जगह-जगह रोक दिया गया, जबकि मुंबई से दिल्ली पहुंचे मुख्य आयोजकों अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के रनवे पर रुकते ही अंदर से हिरासत में ले लिया गया। दिनभर चली खींचतान के बीच पुलिस ने लुटियंस दिल्ली समेत विभिन्न इलाकों से 5,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम सहित अन्य अस्थाई जेलों में भेज दिया।
विमान की सीढ़ियों से ही हिरासत में लिए गए आयोजक
सीजेपी के इस प्रदर्शन को आइसा, एसएफआई और एआईएसएफ जैसे वामपंथी छात्र संगठनों का समर्थन मिलने के बाद खुफिया इनपुट पर सुबह से ही चौतरफा नाकेबंदी कर दी गई थी। मुंबई से आ रही फ्लाइट जैसे ही इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रुकी, पुलिस टीम ने विमान के भीतर प्रवेश कर मुख्य आयोजकों को अपने कब्जे में ले लिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने इस कार्रवाई को कानून सम्मत बताते हुए स्पष्ट किया कि आयोजकों ने नियम के अनुसार 10 दिन पहले आवेदन करने के बजाय महज तीन दिन पहले अनुमति मांगी थी। पूर्व में भी तय शर्तों के उल्लंघन के रिकॉर्ड को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह एहतियाती कदम उठाया गया।
मेट्रो स्टेशन बंद, ट्रेनें रद्द; बंधक बनी दिल्ली की रफ्तार
प्रदर्शनकारियों को लुटियंस जोन में जुटने से रोकने के लिए उठाए गए कदमों ने आम नागरिकों की दिनचर्या पटरी से उतार दी। राजीव चौक, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक और मंडी हाउस समेत 50 से अधिक मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही नियंत्रित कर दी गई या गेट बंद कर दिए गए। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन की ओर आने वाली कई ट्रेनों के फेरे रद्द या सीमित किए गए, जिससे हजारों दैनिक यात्री घंटों फंसे रहे। दिल्ली से सटी सीमाओं—सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर कंटीले तारों और बैरिकेड्स के बीच सघन तलाशी के चलते लंबा जाम लगा रहा।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर तकरार, जंग अब अदालत की चौखट पर
विवाद की जड़ चुनाव आयोग द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया है, जिसे लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि इसके जरिए करोड़ों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों ने हवाई अड्डे और सड़कों पर हुई धरपकड़ को नागरिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। दूसरी ओर, हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है, जहां बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर कर पुलिसिया कार्रवाई को चुनौती दी गई है। हिरासत केंद्रों से छात्र नेताओं ने साफ किया कि नेतृत्व को अलग-थलग करने के बावजूद मतदाता सूची में पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों की यह लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक जारी रहेगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष के गंभीर सवाल, जानें क्या है पूरा मामला
वोटर लिस्ट से नाम हटने के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की सफाई और विपक्षी दलों की मुख्य आपत्तियां।
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संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत गैर-कानूनी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका की प्रक्रिया।
पूरी खबर पढ़ें →दिल्ली में प्रदर्शनों पर पुलिसिया पहरा: नई धारा 163 के नियम और नागरिक अधिकारों के बीच टकराव
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत निषेधाज्ञा लागू करने के प्रावधान और अदालती दिशा-निर्देश।
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