आगरा के कपड़ा बाजार में दुकानों के आवंटन पर सवाल: खुद कारोबार के बजाय किराये पर चढ़ाईं दुकानें, एडीए जांच में जुटा

खबर शेयर कीजिए

2004 में कपड़ा व्यापार के लिए हुआ था करीब 75 प्रतिष्ठानों को आवंटन; निरीक्षण में कई दुकानों पर मूल आवंटी की जगह दूसरे लोग करते मिले कारोबार

आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | सोमवार, 31 अगस्त 2026, 08:31:21 AM IST

Taj News Logo
Taj News
आगरा डेस्क

tajnews.in | आगरा: संजय प्लेस स्थित कपड़ा बाजार में दुकानों के आवंटन और उनके वास्तविक संचालन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। कपड़ा व्यापार को बढ़ावा देने کے उद्देश्य से करीब दो दशक पहले आवंटित की गईं कई दुकानें अब मूल आवंटियों के बजाय दूसरे लोगों द्वारा संचालित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ मूल आवंटियों ने स्वयं कारोबार करने के बजाय दुकानों को किराये पर देकर आर्थिक लाभ उठाया।

HIGHLIGHTS
  1. संजय प्लेस कपड़ा बाजार में दुकानों के आवंटन और संचालन पर उठे गंभीर सवाल।
  2. 2004 में 75 दुकानों का हुआ था आवंटन, निरीक्षण में मूल आवंटी की जगह दूसरे मिले काबिज।
  3. खुद व्यापार करने के बजाय मोटी रकम पर दुकानें किराये पर उठाने का लगा गंभीर आरोप।
  4. एडीए ने शुरू की 619 दुकानों के रिकॉर्ड की जांच, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की तैयारी।

मामले में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) کے निरीक्षण کے दौरान कई दुकानों पर आवंटियों की जगह दूसरे लोगों द्वारा कारोबार संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद अब एडीए दुकानों के आवंटन की शर्तों, मूल आवंटियों और वास्तविक संचालकों کی विस्तृत जांच में जुट गया है।

2004 में करीब 75 प्रतिष्ठानों को हुआ था आवंटन

संजय प्लेस कपड़ा बाजार में वर्ष 2004 کے दौरान करीब 75 प्रतिष्ठानों को दुकानों का आवंटन किया गया था। उस समय इन दुकानों का उद्देश्य कपड़ा व्यापार से जुड़े कारोबारियों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराना बताया गया था।

करीब 22 वर्ष बाद अब इन दुकानों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई मूल आवंटी स्वयं दुकान संचालित करने के बजाय उन्हें दूसरे कारोबारियों को उपयोग के लिए दे रहे हैं।

यदि जांच में यह स्थिति सही पाई जाती है तो यह भी सवाल उठेगा कि आवंटन के मूल उद्देश्य और संबंधित शर्तों का वर्षों तक किस स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित किया गया।

एडीए के निरीक्षण में सामने आई वास्तविक संचालन की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, एडीए के निरीक्षण के दौरान कई दुकानें मूल आवंटियों के बजाय अन्य लोगों द्वारा संचालित मिलीं। कुछ दुकानों में निर्धारित उद्देश्य या शर्तों से अलग प्रकार के कारोबार संचालित होने की बात भी सामने आई है।

अब एडीए यह पता लगाने में जुटा है कि संबंधित दुकानों का संचालन किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर हो रहा है। जांच में मूल आवंटी, दुकान के वर्तमान संचालक और दुकानों के उपयोग की वास्तविक स्थिति की पड़ताल की जा रही है।

यह भी देखा जाएगा कि दुकानों को किराये या किसी अन्य व्यवस्था کے तहत दूसरे व्यक्तियों को दिया गया था तो उसके लिए संबंधित नियमों के तहत अनुमति ली गई थी या नहीं

619 दुकानों वाले बाजार में व्यापक जांच की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, संजय प्लेस कपड़ा बाजार में कुल 619 दुकानें हैं। ऐसे में कुछ दुकानों में सामने आई अनियमितताओं کے बाद पूरे बाजार में आवंटन और वास्तविक संचालन की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

मामला केवल दुकान के भीतर कारोबार करने वाले व्यक्ति की पहचान तक सीमित नहीं है। जांच का मुख्य विषय यह भी है कि दुकान किस उद्देश्य से आवंटित की गई थी, उसका वास्तविक उपयोग क्या हो रहा है और आवंटन की शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं

नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

एडीए ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवंटन और दुकानों के संचालन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित मूल आवंटियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों کے खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है

जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी दुकानें मूल आवंटियों द्वारा संचालित की जा रही हैं और कितनी दुकानों का संचालन अन्य लोगों के हाथों में है

कपड़ा व्यापार के लिए विकसित इस बाजार کو लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन दुकानों का आवंटन मूल रूप से व्यापारिक उद्देश्य से किया गया था, उनका वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है—मूल आवंटियों को या फिर उन लोगों को, जो किराये अथवा अन्य व्यवस्था کے तहत वहां कारोबार कर रहे हैं।

🏷️ ट्रेंडिंग टॉपिक्स & हैशटैग्स:
#SanjayPlaceClothMarket #ADAAgraShopAllotment #AgraDevelopmentAuthority #ClothMarketShopRentScam #SanjayPlaceAgra #TajNews

यह भी पढ़ें

इतिहास का वो अद्भुत स्वाद: कैसे चाट, गोल गप्पे बने भारत की सबसे लोकतांत्रिक डिश | बृज खंडेलवाल पासपोर्ट है, नागरिकता नहीं! भारतीय पहचान का नया गणित | वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल का प्रहार काफी हुआ है, बहुत बाकी है! चमकते एक्सप्रेसवे, जर्जर इंसाफ़: क्या सिर्फ़ सड़कें विकसित होने से देश विकसित होता है? | बृज खंडेलवाल सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने को मौलिक अधिकार बनाया, अब परीक्षा आगरा की है | बृज खंडेलवाल का विशेष विश्लेषण “जनता मालिक, प्रतिनिधि सेवक: लोकतंत्र में वास्तविक VIP कौन?” | डॉ प्रमोद कुमार का विशेष विश्लेषण
Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

Pawan Kumar Singh

Chief Editor, Taj News


खबर शेयर कीजिए

Leave a Comment