लखनऊ में शनिवार शाम एसयूवी समेत लापता हुए महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष का शव रविवार को शारदा सहायक नहर से मिला, शरीर पर गोली लगने के निशान; प्रॉपर्टी विवाद समेत कई पहलुओं से जांच
क्राइम डेस्क, 🌐 tajnews.in | रविवार, 30 अगस्त 2026, 08:00:15 PM IST

tajnews.in | लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा से जुड़े नेता और महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। शनिवार शाम एसयूवी समेत लापता होने के बाद रविवार शाम उनका शव दुबग्गा क्षेत्र में शारदा सहायक नहर سے बरामद किया गया। घटना के बाद पुलिस ने उनके ड्राइवर रवि तिवारी समेत एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, धीरेंद्र प्रताप सिंह शनिवार शाम पलासियो मॉल के पास سے अपनी एसयूवी के साथ लापता हुए थे। उनके अचानक संपर्क से बाहर होने के बाद तलाश शुरू की गई। रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे दुबग्गा क्षेत्र के सराय प्रेमराज इलाके में शारदा सहायक नहर से एक शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान धीरेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की। इसके बाद फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
सीने और सिर में गोली लगने के निशान
पुलिस की प्रारंभिक जांच में धीरेंद्र प्रताप सिंह के शरीर पर गोली लगने के निशान पाए गए हैं। पुलिस کے अनुसार, उनके दाहिने सीने और सिर के पिछले हिस्से में गोली मारे जाने के संकेत मिले हैं।
शव मिलने के बाद पुलिस हत्या की पूरी वारदात की कड़ी जोड़ने में जुट गई है। फोरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या कब और कहां की गई तथा शव को नहर तक किस तरह पहुंचाया गया।
रुमाल सुंघाकर बेहोश करने का दावा
मामले में हिरासत में लिए गए ड्राइवर रवि तिवारी से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती पूछताछ और अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह को पहले किसी पदार्थ से भीगा रुमाल सुंघाकर बेहोश किया गया।
इसके बाद उन्हें गोली मारने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद शव को फॉर्च्यूनर कार से दुबग्गा क्षेत्र की ओर ले जाया गया। इसके बाद किसान पथ के किनारे एक सुनसान स्थान पर पहुंचकर शव को सड़क से करीब 50 मीटर दूर स्थित शारदा सहायक नहर में फेंक दिया गया।
हालांकि, हत्या की पूरी घटनाक्रम और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने और साक्ष्यों کے आधार पर ही होगी।
ड्राइवर समेत दो लोगों से पूछताछ
पुलिस ने मामले में धीरेंद्र प्रताप सिंह के ड्राइवर रवि तिवारी समेत एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया है। दोनों से अलग-अलग पूछताछ कर पुलिस घटनाक्रम को समझने का प्रयास कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि धीरेंद्र प्रताप सिंह के लापता होने से लेकर शव मिलने तक उनके साथ कौन-कौन लोग संपर्क में थे। उनकी कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, वाहन की गतिविधियों और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के सामने यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि हत्या की वारदात में कितने लोग शामिल थे। क्या यह घटना किसी एक व्यक्ति ने अंजाम दी या इसके पीछे कई लोगों की भूमिका थी, इसकी जांच जारी है।
प्रॉपर्टी विवाद समेत कई पहलुओं पर जांच
इंस्पेक्टर श्रीकांत राय के अनुसार, शुरुआती जांच में प्रॉपर्टी विवाद को हत्या की संभावित वजह के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, पुलिस ने अभी हत्या के पीछे किसी एक निश्चित कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच टीम संपत्ति विवाद के साथ-साथ व्यक्तिगत, आर्थिक और अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हत्या किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी या वारदात के पीछे कोई अन्य विवाद था।
वारदात में इस्तेमाल किए गए संभावित हथियार, वाहन और अन्य साक्ष्यों को लेकर भी जांच की जा रही है।
उन्नाव के रहने वाले थे धीरेंद्र प्रताप सिंह
धीरेंद्र प्रताप सिंह मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले थे और वर्तमान में लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र स्थित वृंदावन कॉलोनी में निवास करते थे।
वह महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष थे और विभिन्न सामाजिक व संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे। वह भाजपा और हिंदू युवा संगठन से जुड़े नेता के रूप में भी सक्रिय बताए जाते थे।
उनकी हत्या के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हत्या की पूरी साजिश और अन्य आरोपियों की तलाश
पुलिस अब हत्या की पूरी साजिश का पता लगाने में जुटी है। जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह को कथित रूप से बेहोश करने से लेकर गोली मारने और फिर शव को नहर में फेंकने तक की वारदात में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ के साथ पुलिस इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का आधार बना रही है।
फिलहाल मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं—हत्या की वास्तविक वजह क्या थी, वारदात में कितने लोग शामिल थे, गोली कहां मारी गई और शव को नहर तक पहुंचाने में किसने मदद की।
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों کے बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों کے आधार पर की जाएगी।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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