दिवालिया घोषित एएसएल एपीआई की शाहगंज साइट पर पुलिस की मौजूदगी से उठे सवाल; पुलिस बोली—कानून-व्यवस्था बनाए रखने पहुंचे थे, डीसीपी सिटी ने जांच के आदेश दिए
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | सोमवार, 31 अगस्त 2026, 05:36:18 AM IST

tajnews.in | आगरा: दिवालिया घोषित हो चुकी एएसएल एपीआई की शाहगंज स्थित साइट पर कब्जे को लेकर पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि एएसएल ग्रुप के कर्मचारी पुलिस बल के साथ विवादित जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे थे। वीडियो सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि कब्जा दिलाने के संबंध में कोई प्रशासनिक आदेश नहीं था तो पुलिस बल वहां किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से पहुंचा था।
मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है। डीसीपी सिटी अली अब्बास ने वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराने کی बात कही है।
शाहगंज साइट पर कब्जे की कोशिश का आरोप
जानकारी के अनुसार शाहगंज स्थित उक्त साइट पर एएसएल ग्रुप के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से कब्जा लेने का प्रयास किया गया। इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद विवाद का केंद्र केवल जमीन पर कब्जे का मामला नहीं रहा, बल्कि पुलिस की मौजूदगी भी सवालों के घेरे में आ गई। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि यदि किसी सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी का कब्जा दिलाने संबंधी लिखित आदेश नहीं था तो पुलिस की इतनी बड़ी मौजूदगी का आधार क्या था।
न प्रशासन का अधिकारी, न एडीए प्रतिनिधि मौजूद होने का दावा
विवाद से जुड़े पक्ष का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान न तो जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर मौजूद था और न ही आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) का कोई प्रतिनिधि वहां पहुंचा।
इसके बावजूद सिकंदरा पुलिस के कई जवान मौके पर मौजूद रहे। वीडियो बनाने वाले पक्ष ने सवाल उठाया कि जब जमीन के कब्जे से संबंधित कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं चल रही थी, तब पुलिस की भूमिका आखिर क्या थी।
वहीं, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों का कहना था कि वे जमीन पर किसी पक्ष को कब्जा दिलाने नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए वहां पहुंचे थे।
राजदरबार ग्रुप से जुड़े लोगों के काबिज होने का दावा
वर्तमान में संबंधित जमीन पर राजदरबार ग्रुप से जुड़े लोगों کے काबिज होने का दावा किया गया है।
राजदरबार ग्रुप की ओर से विधायक सलाहकार पवन दीक्षित ने आरोप लगाया कि करीब 25 दिन पहले एएसएल ग्रुप के कर्मचारी पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे थे और उनका उद्देश्य जमीन पर कब्जा करना था।
उनके अनुसार, मौके पर मौजूद लोगों ने जब पुलिस और एएसएल ग्रुप से यह पूछा कि कब्जे की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन, एडीए या किसी अन्य सक्षम अधिकारी का कौन-सा लिखित आदेश है, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका।
सवाल—कानून-व्यवस्था या कब्जे की कार्रवाई?
विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब पुलिस की वास्तविक भूमिका को लेकर है। यदि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पहुंची थी, तो जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि पुलिस को वहां संभावित विवाद या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सूचना किसने और किस आधार पर दी थी।
वहीं, यदि किसी पक्ष की ओर से जमीन पर कब्जे की कार्रवाई की जा रही थी तो यह भी जांच का विषय है कि उस कार्रवाई के पीछे कोई वैध प्रशासनिक, न्यायिक या अन्य सक्षम आदेश था या नहीं।
पुलिस की ओर से कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वायरल वीडियो के बाद जांच शुरू
जमीन विवाद में पुलिस की भूमिका से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। वीडियो को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
डीसीपी सिटी अली अब्बास ने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के कारणों, वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तथा घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों کے आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद साफ होगी पुलिस की भूमिका
फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक पक्ष का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में जमीन पर कब्जे की कोशिश کی गई, जबकि पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
ऐसे में जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुलिस वास्तव में केवल संभावित विवाद को रोकने के लिए वहां पहुंची थी, या उसकी मौजूदगी का इस्तेमाल किसी पक्ष द्वारा जमीन पर कब्जे کے प्रयास में किया जा रहा था?
जांच रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि शाहगंज साइट पर पुलिस बल किस सूचना और किसके निर्देश पर पहुंचा था तथा वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका नियमों और उनके अधिकार क्षेत्र के अनुरूप थी या नहीं।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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