चार घंटे के शटडाउन की जगह आठ घंटे तक अंधेरा रहने का आरोप, अकोला में रोजाना 7 से 9 घंटे कटौती की शिकायत; कई गांवों में महज 4-5 घंटे बिजली मिलने का दावा
आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | सोमवार, 31 अगस्त 2026, 05:36:18 AM IST

tajnews.in | आगरा: जिले में बिजली की उपलब्धता सामान्य बताई जा रही है और विभाग के अनुसार मांग में भी कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके बावजूद रविवार को शहर से लेकर देहात तक बिजली आपूर्ति की अव्यवस्था ने हजारों उपभोक्ताओं को परेशान किया। कहीं मेंटेनेंस के नाम पर निर्धारित समय से दोगुनी देर तक बिजली बंद रही तो कहीं रोस्टर के अलावा फॉल्ट और शटडाउन के कारण घंटों कटौती की शिकायतें सामने आईं।
उमस भरे मौसम में लंबे बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब बिजली की कमी नहीं है और मांग भी सामान्य है, तो आखिर बार-बार और लंबे समय तक आपूर्ति बाधित क्यों हो रही है। सवाल केवल बिजली कटौती का नहीं, बल्कि निर्धारित शेड्यूल और वास्तविक आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर का भी है।
चार घंटे के शटडाउन की जगह आठ घंटे तक गुल रही बिजली
सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट रोड के दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड क्षेत्र में मेंटेनेंस कार्य के लिए चार घंटे के शटडाउन की जानकारी दी गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली आपूर्ति करीब आठ घंटे तक बाधित रही।
लंबे समय तक बिजली नहीं आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई। उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित शटडाउन के बाद भी यदि बिजली बहाल नहीं होती तो विभाग को स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी देनी चाहिए। अधिकारियों की ओर से क्षेत्र में पूर्व सूचना दिए जाने का दावा किया गया।
लेकिन उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि शटडाउन की अवधि बढ़ रही थी तो इसकी समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई और बिजली बहाल करने में इतनी देरी क्यों हुई।
अकोला में रोजाना 7 से 9 घंटे कटौती का आरोप
देहात क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को लेकर शिकायतें और गंभीर हैं। अकोला क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि उन्हें रोजाना करीब 7 से 9 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार तय रोस्टर के अलावा अलग-अलग समय पर शटडाउन और फॉल्ट का हवाला देकर बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ दुकानदारों और अन्य कामकाजी लोगों को भी परेशानी हो रही है।
लोगों का आरोप है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार फोन कॉल का जवाब नहीं मिलता। ऐसे में उपभोक्ताओं को यह जानकारी तक नहीं मिल पाती कि बिजली कब तक बहाल होगी।
बाह और जैतपुर में भी बिजली संकट से परेशानी
बाह और जैतपुर क्षेत्र में भी करीब 3 से 4 घंटे तक बिजली कटौती की शिकायत सामने आई है। इसका असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने से खेती और सिंचाई से जुड़े कार्य प्रभावित होते हैं, जबकि व्यापारियों को भी बिजली आधारित कामकाज में परेशानी उठानी पड़ती है।
क्षेत्र के लोगों ने बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। जैतपुर के समाजसेवी कुलदीप भदौरिया और भाकियू नेता मोनू शर्मा ने मांग की कि निर्धारित शेड्यूल के अनुसार नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
25 से अधिक गांवों में महज 4 से 5 घंटे बिजली मिलने का दावा
सैंया, फतेहाबाद और लादूखेड़ा उपकेंद्र से जुड़े 25 से अधिक गांवों के लोगों ने बिजली आपूर्ति की स्थिति को लेकर गंभीर शिकायत की है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ गांवों में 24 घंटे के दौरान महज 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
सैंया व्यापार मंडल अध्यक्ष अशोक सिंघल और फतेहाबाद क्षेत्र के गरिया निवासी पूरन सिंह के अनुसार सुबह और शाम की निर्धारित कटौती के अलावा दिनभर बिजली की आंख-मिचौनी जारी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। इससे घरेलू जरूरतों के साथ खेती, छोटे कारोबार और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है।
विभाग का दावा—रोस्टर के अनुसार हो रही है आपूर्ति
आगरा जोन के मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बिजली कटौती की शिकायतों पर कहा कि विभाग रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति कर रहा है।
उन्होंने बताया कि मरम्मत कार्य के लिए कई बार शटडाउन लेना आवश्यक होता है। इसके अलावा अचानक फॉल्ट आने की स्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऐसी स्थिति में तकनीकी खराबी को जल्द दूर कर आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाता है।
मुख्य अभियंता کے अनुसार पूर्व निर्धारित शटडाउन की जानकारी उपभोक्ताओं को एसएमएस और सोशल मीडिया के माध्यम से दी जा रही है।
असली सवाल—बिजली उपलब्ध है तो कटौती क्यों?
रविवार को सामने आई अलग-अलग क्षेत्रों की शिकायतों ने बिजली व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विभाग का कहना है कि बिजली की उपलब्धता सामान्य है और रोस्टर के अनुसार आपूर्ति की जा रही है, जबकि कई क्षेत्रों के उपभोक्ता घंटों तक बिजली नहीं मिलने का दावा कर रहे हैं।
ऐसे में जरूरत केवल बिजली उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की भी है। यदि मेंटेनेंस के लिए चार घंटे का शटडाउन घोषित किया गया है और बिजली आठ घंटे तक बंद रहती है, तो उपभोक्ताओं को वास्तविक कारण और संशोधित समय की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
शहर से देहात तक लगातार सामने आ रही शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि समस्या केवल बिजली उत्पादन या उपलब्धता की नहीं, बल्कि स्थानीय वितरण व्यवस्था, फॉल्ट प्रबंधन और शटडाउन کی जवाबदेही से भी जुड़ी हो सकती है।
उमस और गर्मी के बीच परेशान उपभोक्ताओं के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—जब बिजली की कमी नहीं और मांग भी सामान्य है, तो आखिर घंटों तक बत्ती गुल रहने की जिम्मेदारी किसकी है?
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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