uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Wednesday, 08 July, 2026, 06:55:12 AM IST.

tajnews.in | अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि परिसर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी और महालूटकांड के बाद उपजे भारी विवाद के बीच एक और बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राम मंदिर प्रबंधन के भीतर चल रही तीव्र प्रशासनिक खींचतान के मध्य यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पूर्व महासचिव चंपत राय की अब ट्रस्ट में वापसी की राहें पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। हालांकि, उनके भविष्य को लेकर कोई भी अंतिम और औपचारिक निर्णय विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम जांच रपट आने के बाद ही लिया जाएगा, परंतु सूत्रों का दावा है कि संघ, सरकार और खुद ट्रस्ट के भीतर उनकी पुनर्वापसी न होने देने को लेकर एक मजबूत आम सहमति बन चुकी है। इस बड़े विवाद को शांत करने और श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचने से बचाने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय भी अब ट्रस्ट के संपूर्ण पुनर्गठन की वकालत कर रहे हैं, जिससे पूरे देश में एक सकारात्मक संदेश भेजा जा सके।
सूत्रों से प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, शुरुआत में नैतिक आधार पर भी इस्तीफा देने से कतराने वाले चंपत राय अब ट्रस्ट में अपनी खोई हुई प्रशासनिक कमान वापस पाने के लिए लगातार पूरा जोर लगा रहे हैं। इसी कवायद के तहत मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पत्र जारी करते हुए यह घोषणा की कि वे एसआईटी की अंतिम जांच रपट आने के बाद अपना पक्ष सबके सम्मुख रखेंगे। राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में उनके इस कदम को ट्रस्ट के भीतर अपनी वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसके विपरीत, विहिप की केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक में हुए व्यापक मंथन के बाद यह तय हुआ है कि संगठन में उनका अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद तो कायम रखा जाएगा, परंतु ट्रस्ट के कामकाज से उन्हें पूरी तरह दूर रखा जाएगा। चूंकि मंदिर प्रबंधन की वास्तविक कमान उन्हीं के हाथों में केंद्रित थी, इसलिए इस महालूटकांड में उनका सीधे तौर पर बचाव करना संगठन के लिए भी अत्यंत जटिल साबित हो रहा है।
इस संवेदनशील विवाद पर स्थायी रूप से विराम लगाने के लिए केंद्र सरकार अब ट्रस्ट के भावी स्वरूप और उसके पुनर्गठन की दिशा में कदम बढ़ा रही है। पूर्व में विश्व हिंदू परिषद की यह प्रबल इच्छा थी कि चंपत राय की जगह बजरंग लाल बागड़ा को मंदिर की मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जाए, लेकिन संगठन के भीतर सर्वसम्मति और आमराय न बन पाने के कारण कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव के रूप में तैनात किया गया। उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों के भीतर आगामी विधानसभा चुनाव होने तय हैं, ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में केंद्र सरकार मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर रत्ती भर भी जोखिम मोल लेने के पक्ष में नहीं है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय का यह स्पष्ट मत है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन बेहद जरूरी है ताकि जनता के बीच पारदर्शिता की एक साफ छवि पेश की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आंतरिकखेमे में भी गहरे मतभेद और दो फाड़ की स्थिति उभरकर सामने आई है। संघ और विहिप के शीर्ष नेतृत्व ने इस महाघोटाले के उजागर होने के शुरुआती दिनों में ही यह स्पष्ट सलाह दी थी कि चंपत राय को नैतिक आधार पर स्वयं ही ट्रस्ट का पद त्याग देना चाहिए। इसके बाद विहिप की उत्तराखंड में आयोजित हुई बैठक के दौरान भी उन्हें यही विधिक राय दी गई थी, परंतु उनके द्वारा इसे न मानने पर संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय ने कड़ा और सख्त रवैया अख्तियार किया। इसी सख्ती के परिणामस्वरूप, पूर्व में अयोध्या में आयोजित होने वाली केंद्रीय पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक को अंतिम समय में चंपत राय की अनुपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था। विहिप के एक बेहद प्रभावशाली धड़े का अब यह साफ मानना है कि जब तक पूरे मामले में स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो जाती, तब तक संगठन को चंपत राय से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
दूसरी ओर, चंपत राय ने अपने ऊपर लग रहे इन संगीन आरोपों पर पहली बार खुल कर अपनी बात कही है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि चढ़ावा चोरी के इस मामले में उन पर लगातार कई तरह के मनगढ़ंत और गंभीर आरोप मढ़े गए हैं, जिसके कारण उन्होंने अभी तक पूरी तरह से मौन धारण कर रखा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, ‘एसआईटी की अंतिम और संपूर्ण रिपोर्ट पटल पर आने के बाद मैं विरोधियों के हर एक सवाल और झूठे आरोप का तार्किक जवाब दूंगा। मेरा ४५ वर्षों का लंबा सार्वजनिक जीवन पूरी दुनिया के सामने एक खुली किताब की भांति रहा है और मुझे पूरा विधिक विश्वास है कि अंततः सत्य की ही जीत होगी।’ बहरहाल, उनके इन दावों के बावजूद यह स्पष्ट है कि आगामी २२ जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही राम मंदिर के नए प्रशासनिक ढांचे की विधिक और वास्तविक रूपरेखा तय होगी।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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