सोनभद्र: बस की खिड़की से सिर निकालने पर किशोर की दर्दनाक मौत

Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Tuesday, April 28, 2026, 11:20:30 PM IST

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Uttar Pradesh Desk | Road Safety & Accident Report

सोनभद्र: खुशियों से भरे किसी भी मांगलिक समारोह में जब अचानक मौत दस्तक दे दे, तो उस मंजर की कल्पना करना भी रूह कंपा देता है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में मंगलवार को एक ऐसी ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली दुर्घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को मातम में डुबो दिया। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, बीजपुर थाना क्षेत्र के महरिकला गांव में एक तिलक समारोह में शामिल होने जा रहे 13 वर्षीय मासूम किशोर की एक छोटी सी लापरवाही के कारण जान चली गई। सफर के दौरान चलती प्राइवेट बस की खिड़की से बाहर सिर निकालकर झांकना उस किशोर के लिए काल बन गया। सड़क किनारे लगे एक भारी-भरकम बिजली के पोल से उसका सिर इतनी जोर से टकराया कि मौके पर ही खून की धार बह निकली। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना ने जहां एक ओर परिवार के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया, वहीं दूसरी ओर सफर के दौरान बच्चों की सुरक्षा और माता-पिता की निगरानी पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है। आइए, इस पूरी दर्दनाक दुर्घटना, मौके पर मची चीख-पुकार और सफर के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

HIGHLIGHTS
  1. सोनभद्र में दर्दनाक हादसा: बीजपुर क्षेत्र के महरिकला गांव से तिलक चढ़ाने जा रही बस में सवार 13 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत।
  2. खिड़की से सिर निकालना बना काल: चलती बस की खिड़की से बाहर झांकते समय सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराया मासूम का सिर।
  3. अस्पताल में घोषित हुआ मृत: गंभीर रूप से घायल किशोर को तुरंत बभनी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
  4. खुशियां मातम में तब्दील: घटना के बाद पूरे परिवार और गांव में कोहराम मच गया, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

तिलक समारोह की खुशियां और वह मनहूस सफर

किसी भी घर में जब कोई शादी या तिलक का समारोह होता है, तो कई दिनों पहले से ही वहां उत्साह और उल्लास का माहौल बन जाता है। सोनभद्र जिले के बीजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महरिकला गांव के मेझरोट टोला में भी मंगलवार को बिल्कुल ऐसा ही खुशनुमा माहौल था। गांव के ही एक परिवार में तिलक का कार्यक्रम था और सभी रिश्तेदार तथा पड़ोसी इस खुशी में शामिल होने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। मिली जानकारी के अनुसार, महरिकला के मेझरोट टोला से कई लोगों को एक साथ तिलक चढ़ाने के लिए शक्तिनगर जाना था। इस सफर के लिए गांव वालों ने मिलकर एक प्राइवेट बस (Private Bus) बुक की थी।

दोपहर के समय जब बस गांव से रवाना होने लगी, तो सभी लोग खुशी-खुशी उसमें सवार हो गए। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस सफर का आनंद लेने के लिए उत्साहित थे। इसी बस में गांव के ही निवासी विष्णुकांत गुप्ता का 13 वर्षीय पुत्र ऋषि गुप्ता भी सवार था। बच्चों की स्वाभाविक फितरत के अनुसार, ऋषि भी दौड़कर बस की खिड़की वाली सीट पर बैठ गया ताकि वह बाहर के नजारों का आनंद ले सके। सफर शुरू हुआ और बस में हंसी-मजाक तथा मंगल गीतों का दौर चल रहा था। किसी को इस बात का रत्ती भर भी अंदेशा नहीं था कि अगले ही पल यह बस एक बहुत बड़ी त्रासदी का गवाह बनने वाली है। बच्चों की चंचलता अक्सर उन्हें खतरों से अनजान रखती है, और यही नासमझी ऋषि के लिए भी जानलेवा साबित हुई।

एक छोटी सी चूक और खंभे से टकराया मासूम का सिर

जैसे ही बस गांव की कच्ची-पक्की सड़कों को पार करते हुए मुख्य मार्ग की ओर आगे बढ़ी, बस की रफ्तार थोड़ी तेज हो गई। खिड़की के पास बैठा 13 वर्षीय ऋषि गुप्ता बाहर के दृश्यों को देखने के लिए बेहद उत्सुक था। हवा के झोंकों का आनंद लेने और पीछे छूटते नजारों को देखने की अपनी बालसुलभ उत्सुकतावश उसने अचानक अपना सिर बस की लोहे वाली खिड़की से बाहर निकाल लिया। जिस समय उसने सिर बाहर निकाला, बस काफी तेज गति में थी और सड़क के बिल्कुल किनारे से गुजर रही थी।

सड़क के किनारे बिजली के भारी-भरकम सीमेंटेड पोल (Electric Pole) लगे हुए थे। बस चालक ने संभवतः किसी दूसरे वाहन को पास देने या गड्ढे से बचने के लिए बस को किनारे की तरफ ज्यादा दबा दिया। इसी दौरान एक भयानक और दिल दहला देने वाली आवाज आई। बस की खिड़की से बाहर झांक रहे ऋषि का सिर सीधे उस बिजली के पोल से जोरदार तरीके से टकरा गया। यह टक्कर इतनी भीषण और खौफनाक थी कि ऋषि का सिर बुरी तरह से फट गया और मौके पर ही खून का फव्वारा फूट पड़ा। झटके से ऋषि का शरीर बस के अंदर आ गिरा और वह खून से लथपथ होकर तड़पने लगा। कुछ ही पलों में बस की सीट और फर्श खून से लाल हो गए।

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बस में मची चीख-पुकार, अस्पताल में टूटा परिवार का पहाड़

इस खौफनाक दृश्य को देखते ही बस में सवार महिलाओं और बच्चों में चीख-पुकार मच गई। मंगल गीत गा रही महिलाओं की आवाजें अचानक गगनभेदी रुदन में बदल गईं। बस के चालक ने तुरंत ब्रेक लगाकर बस को रोका। ऋषि के परिजनों और अन्य लोगों ने बदहवास हालत में उसे तुरंत उठाया। खून को रोकने का हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन चोट इतनी गहरी थी कि खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था। बिना एक भी पल गंवाए, परिजन उसे उसी बस से या स्थानीय वाहन की मदद से पास के बभनी अस्पताल (Babhani Hospital) लेकर भागे।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत ऋषि का परीक्षण किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिर में लगी गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव (Blood Loss) के कारण उसकी नब्ज टूट चुकी थी। जांच के बाद डॉक्टरों ने भारी मन से 13 वर्षीय ऋषि गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। विष्णुकांत गुप्ता और उनके परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा, जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। मां की हालत बेसुध थी, और पिता अपने जवान होते बेटे के शव को देखकर सुध-बुध खो बैठे थे। जिस बेटे को वे खुशी-खुशी तिलक समारोह में ले जा रहे थे, चंद मिनटों में ही उसका कफन तैयार हो गया। यह दर्दनाक खबर जैसे ही महरिकला गांव पहुंची, तो वहां भी सन्नाटा पसर गया और शादी की सारी खुशियां मातम में तब्दील हो गईं।

पुलिस की कार्रवाई और सड़क सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

घटना की सूचना मिलते ही बभनी थाना पुलिस तत्काल हरकत में आई और अस्पताल पहुंच गई। पुलिस ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। बभनी पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद, मृत्यु के सही कारणों की आधिकारिक पुष्टि के लिए शव को पोस्टमार्टम (Post-Mortem) हेतु दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भेज दिया गया। बभनी थाने के थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इस दुर्घटना पर जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि पीड़ित परिजनों की ओर से थाने में अभी तक कोई लिखित शिकायत या सूचना नहीं दी गई है, लेकिन पुलिस अपने स्तर पर इस मामले की आवश्यक विधिक कार्रवाई कर रही है।

यह हृदयविदारक घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और वाहनों में बच्चों की निगरानी को लेकर हमारी घोर लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण है। अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट बसों या स्कूल वैन में सफर करते समय बच्चे अपने हाथ या सिर खिड़की से बाहर निकाल लेते हैं। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत चलती गाड़ी से शरीर का कोई भी अंग बाहर निकालना सख्त मना है। माता-पिता और अभिभावकों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे सफर के दौरान अपने बच्चों पर कड़ी नजर रखें। इसके साथ ही, बस चालकों और कंडक्टरों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी यात्री खतरनाक तरीके से न बैठे। अगर समय रहते ऋषि को खिड़की से झांकने से रोक लिया गया होता, तो शायद आज एक मासूम की जान बच जाती। प्रशासन को भी चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली प्राइवेट बसों में लोहे की जालियां अनिवार्य करे, ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझे।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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