Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Tuesday, April 28, 2026, 10:20:30 PM IST

वाराणसी: भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी (Varanasi) में एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने समाज में खत्म होती इंसानियत और बढ़ती असहिष्णुता की खौफनाक तस्वीर पेश की है। अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो बैठते हैं, लेकिन किसी की जान ले लेना ‘मॉब लिंचिंग’ (Mob Lynching) जैसी खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के भरथरा (घमहापुर) गांव में कार से एक महिला को मामूली धक्का लगने के बाद भीड़ इस कदर हैवान बन गई कि उन्होंने एक युवा उद्यमी मनीष सिंह को 20 मिनट तक लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। दरिंदगी की हद तो यह थी कि हत्यारों ने मनीष सिंह का सिर ईंटों से बुरी तरह कूंच डाला। इस नृशंस हत्याकांड के बाद मृतक की पत्नी अंकिता का दर्द सुनकर वहां मौजूद हर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो गईं। अंकिता ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों से कहा कि आरोपी उनके पति के हाथ-पैर तोड़ देते, लेकिन कम से कम उनकी जान तो बख्श देते। इस घटना ने पूरे वाराणसी जिले में भारी आक्रोश और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए, इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड, पुलिस की कार्रवाई और एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ने की पूरी कहानी का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
कार का मामूली धक्का और भड़क उठी खूनी भीड़
यह पूरी दर्दनाक घटना रविवार रात की है। 36 वर्षीय युवा उद्यमी मनीष सिंह अपने घर के पास ही दोना-पत्तल बनाने की एक फैक्टरी चलाते थे। वह अपने मिलनसार स्वभाव और सामाजिक कार्यों के लिए गांव भर में काफी लोकप्रिय थे। रविवार रात करीब 10 बजे मनीष सिंह अपना कारखाना बंद करके अपनी कार से घर वापस लौट रहे थे। उनका घर कारखाने से कुछ ही दूरी पर स्थित था। जब वह भरथरा गांव में अपने घर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर पहुंचे, तो वहां गांव की ही एक महिला बिंदु देवी अपने घर के बाहर अंधेरे में बर्तन धो रही थीं। संकरे रास्ते और अंधेरे के कारण मनीष सिंह की कार का एक हिस्सा बिंदु देवी को हल्का सा छू गया, जिससे वह गिरकर मामूली रूप से घायल हो गईं।
एक सभ्य समाज में ऐसी दुर्घटनाओं के बाद लोग घायल की मदद करते हैं या पुलिस को बुलाते हैं। लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। महिला को धक्का लगते ही उसके परिजन और आस-पड़ोस के लोग अचानक उग्र हो गए। देखते ही देखते मनबढ़ों और असमाजिक तत्वों की एक भारी भीड़ वहां जमा हो गई। उन्होंने मनीष सिंह की कार को चारों तरफ से घेर लिया। मनीष सिंह ने अपनी गलती मानते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ खून की प्यासी हो चुकी थी। उन्होंने गालियां देते हुए मनीष सिंह को कार से बाहर घसीट लिया और बिना कुछ सोचे-समझे उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।
20 मिनट तक चला मौत का नंगा नाच, ईंटों से कूंचा सिर
सड़क पर उस रात दरिंदगी का जो नंगा नाच हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। लगभग 15 हमलावरों ने मनीष सिंह को चारों तरफ से घेर लिया। जब मनीष ने खुद को बचाने के लिए थोड़ा विरोध किया, तो हमलावर और ज्यादा उग्र हो गए। उन्होंने लाठियों से पीट-पीटकर मनीष को जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद भी उनकी हैवानियत शांत नहीं हुई। वहां पड़े भारी ईंट-पत्थर उठाकर उन्होंने मनीष के सिर पर दे मारे। हमलावरों ने उनके सिर को इतनी बेरहमी से कूंचा कि मनीष की आंखें तक बाहर निकल आईं।
यह अमानवीय और क्रूर कृत्य लगातार 20 मिनट तक चलता रहा। मनीष दर्द से चीखते रहे और रहम की भीख मांगते रहे, लेकिन किसी भी पड़ोसी या तमाशबीन ने उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। जब हमलावरों को लगा कि मनीष की सांसें थम गई हैं, तो वे उन्हें खून से लथपथ और मरणासन्न हालत में वहीं सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही मनीष के परिजन बदहवास हालत में मौके पर दौड़े। वे तुरंत उन्हें उठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बसनी ले गए। लेकिन मनीष की हालत इतनी गंभीर थी कि वहां के डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। बीएचयू पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद मनीष सिंह को मृत घोषित कर दिया। बाद में आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस दरिंदगी की पुष्टि कर दी। रिपोर्ट के अनुसार, मनीष के हाथ-पैर कई जगहों से बुरी तरह फ्रैक्चर (Fracture) थे और उनका ब्रेन (Brain) पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था।
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‘हाथ-पैर तोड़ देते, पर जान तो बख्श देते’: पत्नी का रुला देने वाला विलाप
मनीष सिंह की मौत की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। मनीष की पत्नी अंकिता की हालत देखकर वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों की आंखें भी डबडबा गईं। डीसीपी (DCP) नीतू कात्यायन और एसडीएम (SDM) पिंडरा प्रतिभा मिश्रा जब पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, तो अंकिता उनके सामने फफक कर रो पड़ीं।
अंकिता ने सुबकते हुए कहा, “मारने वालों के दिल में जरा भी दया नहीं आई? मेरे पति की जान नहीं लेनी चाहिए थी। अगर उन्हें इतना ही गुस्सा था, तो उनका हाथ-पैर तोड़ देते। मैं जिंदगी भर उन्हें अपने हाथों से बैठाकर खिला देती, उनकी सेवा करती। कम से कम वे मेरी और मेरे बच्चों की आंखों के सामने तो जिंदा रहते। मेरा तो पूरा सुहाग उजड़ गया। अब इन छोटे-छोटे बेटे-बेटियों को लेकर मेरी जिंदगी कैसे कटेगी?” यह कहते-कहते अंकिता बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ीं। दोनों महिला अधिकारियों (नीतू और प्रतिभा मिश्रा) ने अंकिता को किसी तरह संभाला, उन्हें ढांढस बंधाया और यह पक्का भरोसा दिलाया कि उनके पति के हत्यारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
सड़क पर शव रखकर चक्काजाम, क्या थी चुनावी रंजिश?
सोमवार दोपहर जब पोस्टमार्टम के बाद मनीष सिंह का क्षत-विक्षत शव उनके गांव भरथरा पहुंचा, तो ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने गांव के बाहर बावतपुर-जमालापुर मुख्य मार्ग पर शव को रखकर भारी चक्काजाम कर दिया। वे स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। दोपहर 3:30 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक यह हंगामा और चक्काजाम जारी रहा। ग्रामीण मांग कर रहे थे कि सभी नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई हो।
स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए डीसीपी नीतू और एसडीएम प्रतिभा मिश्रा ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला। उन्होंने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर और सख्त कार्रवाई का लिखित आश्वासन देकर किसी तरह जाम को समाप्त कराया। इस दौरान गांव के कुछ दबी जुबान से यह भी चर्चा कर रहे थे कि इस हत्याकांड के पीछे आगामी ग्राम प्रधान चुनावों की पुरानी रंजिश भी हो सकती है। मनीष सिंह गांव में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे और इस बार ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की मजबूत तैयारी कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर, आरोपियों का गुट भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाना चाहता था। हालांकि, फूलपुर थाना पुलिस ने फिलहाल किसी भी तरह की चुनावी रंजिश के एंगल से साफ इनकार किया है और इसे केवल सड़क दुर्घटना के बाद उपजा तात्कालिक विवाद ही बताया है।
पुलिस का कड़ा एक्शन: 8 नामजद, 2 गिरफ्तार, पीएसी तैनात
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस (Murder Case) की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। गोमती जोन के एडीसीपी नृपेंद्र कुमार और कार्यवाहक पिंडरा एसीपी अंजनी राय ने कई थानों की फोर्स के साथ गांव में डेरा डाल लिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित जातीय तनाव को रोकने के लिए पूरे भरथरा गांव में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई है। पूरा गांव इस वक्त पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए मृतक के परिजनों की तहरीर पर आठ नामजद और कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या (धारा 302) और बलवा सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। नामजद आरोपियों में आशीष राजभर, मनीष राजभर, नागेंद्र प्रजापति, दीपक राजभर, मनोज प्रजापति, हरिश्चंद्र राजभर, योगेंद्र प्रजापति और गोविंद राजभर शामिल हैं। पुलिस की विशेष टीमों ने ताबड़तोड़ दबिश देते हुए मुख्य आरोपियों में से दो— हरिश्चंद्र और योगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा 11 अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जल्द ही बाकी फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज में जागरूकता और पुलिस के खौफ की अत्यंत आवश्यकता है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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