Uttar Pradesh Desk, Taj News | Saturday, April 18, 2026, 10:25:30 PM IST

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले का प्रशासनिक ढांचा इन दिनों एक ऐसे भीषण और अभूतपूर्व टकराव से गुजर रहा है, जिसने पूरे राज्य के नौकरशाही (Bureaucracy) और राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है। जिले के सर्वोच्च अधिकारी यानी जिलाधिकारी (DM) और टूंडला की निवर्तमान तहसीलदार राखी शर्मा के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब बंद कमरों की फाइलों से निकलकर सरेआम सड़क और सोशल मीडिया पर आ गया है। एक महिला पीसीएस (PCS) अधिकारी द्वारा सीधे अपने ही जिले के डीएम पर भ्रष्टाचार, अमर्यादित आचरण और दोषियों को बचाने जैसे इतने गंभीर और सीधे आरोप लगाना कोई आम घटना नहीं है। इस विवाद ने तब एक बेहद सनसनीखेज और विस्फोटक मोड़ ले लिया, जब तहसीलदार राखी शर्मा ने यह दावा कर दिया कि जिलाधिकारी जिस महंगे ‘आईफोन’ (iPhone) का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह उन्होंने खुद खरीदकर उन्हें दिया था और उनके पास इसका पुख्ता बिल भी मौजूद है। इसके अलावा, सत्ताधारी दल (भाजपा) के एक जिलाध्यक्ष का पत्र वायरल होने से इस पूरे प्रशासनिक विवाद ने अब एक गहरा राजनीतिक और सियासी रंग ले लिया है। इस भारी खींचतान के बीच तहसीलदार का तबादला कर दिया गया है और जिला प्रशासन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
करोड़ों की जमीन का बैनामा और तीन बाबुओं का सिंडिकेट
किसी भी बड़े प्रशासनिक विवाद के पीछे अक्सर कोई न कोई बड़ा आर्थिक या जमीनी खेल छिपा होता है। फिरोजाबाद के इस हाई-प्रोफाइल मामले में भी विवाद की असली जड़ करोड़ों रुपये की एक कीमती जमीन का ‘कथित बैनामा प्रकरण’ (Land Registry Scam) माना जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों और स्थानीय जानकारियों के अनुसार, टूंडला तहसील में तीन बाबुओं (Clerks) का एक ऐसा मजबूत सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसने नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर एक बेहद कीमती जमीन का संदिग्ध बैनामा (Registry) करवाया था।
निवर्तमान तहसीलदार राखी शर्मा का सीधा दावा है कि जब उन्होंने एक ईमानदार अधिकारी के तौर पर इस फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की गहराई से जांच शुरू की, तो उनके ऊपर भारी प्रशासनिक दबाव बनाया जाने लगा। आरोप है कि जिले के उच्चाधिकारी उन भ्रष्ट बाबुओं पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ‘क्लीन चिट’ देने और बचाने (Shielding the Culprits) की कोशिश कर रहे थे। जब तहसीलदार ने इस अनैतिक दबाव के आगे झुकने और फाइल को दबाने से साफ इनकार कर दिया, तो उन्हें जानबूझकर एक गहरी साजिश का शिकार बनाया जाने लगा। उनके खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप गढ़े जाने लगे ताकि उन्हें पद से हटाया जा सके और उस जमीन घोटाले की निष्पक्ष जांच को हमेशा के लिए दफन किया जा सके।
‘आईफोन’ का बिल और नौकरशाही के अंदर की काली सच्चाई
इस पूरे प्रकरण में जिस एक आरोप ने सबसे ज्यादा सनसनी फैलाई है और सीधे तौर पर जिलाधिकारी की ईमानदारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है, वह है— ‘आईफोन का बिल’ (iPhone Bill Issue)। भारतीय नौकरशाही में उच्चाधिकारियों द्वारा अपने मातहतों (Subordinates) से महंगे तोहफे या ‘सुविधाएं’ लेने की दबी-छिपी चर्चाएं अक्सर होती रहती हैं, लेकिन किसी अधिकारी द्वारा सरेआम इसका खुलासा करना अपने आप में एक बहुत बड़ा ‘बम’ फटने जैसा है।
तहसीलदार राखी शर्मा ने मीडिया और शासन के सामने पूरी बेबाकी से यह विस्फोटक दावा किया है कि फिरोजाबाद के जिलाधिकारी (DM) वर्तमान में जिस महंगे और आधुनिक आईफोन का उपयोग कर रहे हैं, वह उन्होंने (राखी शर्मा ने) स्वयं अपनी जेब से खरीदकर उन्हें दिया था। बात सिर्फ मौखिक दावे तक सीमित नहीं रही, बल्कि तहसीलदार ने इस खरीद का पुख्ता और ‘ओरिजिनल बिल’ (Original Invoice) भी प्रस्तुत कर दिया है। एक जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी द्वारा अपनी ही तहसील की एक महिला अधिकारी से इतना महंगा गैजेट लेना न केवल ‘अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली’ (All India Services Conduct Rules) का खुला और घोर उल्लंघन है, बल्कि यह पद के दुरुपयोग और नैतिक पतन का भी एक बहुत बड़ा और शर्मनाक उदाहरण है। इस आईफोन वाले खुलासे ने जिला प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है और जिलाधिकारी के पास फिलहाल इसका कोई ठोस जवाब नहीं है।
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तबादला, दहशत और एक पिता का अस्पताल पहुंचना
प्रशासनिक मशीनरी ने अपने बचाव में जो सबसे पहला और चिर-परिचित हथियार इस्तेमाल किया, वह था ‘तबादला’ (Transfer)। इस भारी विवाद के बीच आनन-फानन में तहसीलदार राखी शर्मा का तबादला टूंडला से हटाकर शिकोहाबाद तहसील (Shikohabad Tehsil) कर दिया गया है और टूंडला में एक नए तहसीलदार ने अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। इस एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई से आहत होकर राखी शर्मा फिलहाल चार दिन के आकस्मिक अवकाश (Leave) पर चली गई हैं। उनके इस अवकाश ने पूरे जिले के प्रशासनिक तंत्र में एक अजीब सी असहजता और सन्नाटा पैदा कर दिया है।
राखी शर्मा ने मीडिया के सामने अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर चिंताएं (Security Concerns) जाहिर की हैं। उन्होंने रुंधे हुए गले से बताया कि एक राजपत्रित मजिस्ट्रेट (Magistrate) होने के बावजूद आज उन्हें अपने ही जिले में घर से बाहर निकलने में डर लग रहा है। भ्रष्ट तंत्र द्वारा लगातार उनका चरित्र हनन (Character Assassination) करने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के नीच हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इस पूरे तनावपूर्ण माहौल और अपनी बेटी की इस प्रताड़ना की खबर सुनकर उनके वृद्ध पिता जब उनसे मिलने फिरोजाबाद पहुंचे, तो यहां के खौफनाक हालात देखकर उन्हें गहरा सदमा लगा। सदमे के कारण उनके पिता की तबीयत अचानक इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि उन्हें तुरंत एक अस्पताल में भर्ती (Hospitalized) कराना पड़ा है। एक महिला अधिकारी का यह दर्द सिस्टम की उस क्रूरता को दर्शाता है, जो सच बोलने वालों को कुचलने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
वायरल लेटर और राजनीतिक आग: क्या लखनऊ करेगा हस्तक्षेप?
यह मामला अब केवल दो अधिकारियों के बीच की खींचतान नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सियासत का तड़का भी पूरी तरह से लग चुका है। मामले ने तब एक भयंकर राजनीतिक तूल (Political Controversy) पकड़ लिया, जब सत्ताधारी दल (भारतीय जनता पार्टी) के जिलाध्यक्ष से संबंधित एक बेहद गोपनीय पत्र सोशल मीडिया पर लीक होकर वायरल हो गया। इस पत्र में कथित तौर पर तहसीलदार पर ही उल्टे आरोपों का उल्लेख किया गया था। इस पत्र के सार्वजानिक होते ही सत्ता पक्ष के जिलाध्यक्ष भी तीखी आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। विपक्ष के साथ-साथ खुद सत्ताधारी दल के ही कुछ कद्दावर नेताओं ने इस पत्र की टाइमिंग और जिलाधिकारी की कार्यशैली पर खुलेआम गंभीर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
फिलहाल, इन इतने संगीन और सीधे आरोपों के बावजूद जिलाधिकारी (District Magistrate Firozabad) की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान, खंडन या प्रतिक्रिया (Official Response) सामने नहीं आई है। उनका यह मौन कई सवालों को जन्म दे रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance Policy) की नीति के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या लखनऊ में बैठा शासन इस हाई-प्रोफाइल मामले का स्वतः संज्ञान लेगा? यदि यह मामला उच्च स्तर पर पहुंचता है और एक निष्पक्ष एसआईटी (SIT) या उच्चाधिकारियों की कमेटी द्वारा इसकी जांच कराई जाती है, तो जमीन के बैनामे से लेकर आईफोन के बिल तक, कई रसूखदार और सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। आने वाले चंद दिन फिरोजाबाद की राजनीति और प्रशासन के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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