आगरा: भीम नगरी आयोजन पर बसपा पार्षदों का भारी बवाल, निमंत्रण में भेदभाव और विकास कार्यों में ‘बंदरबांट’ का आरोप

Agra Desk, Taj News | Saturday, April 18, 2026, 11:45:30 PM IST

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आगरा: ताजनगरी आगरा में हर साल बड़े ही हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाने वाला ‘भीम नगरी’ (Bhimnagari) का ऐतिहासिक आयोजन इस बार एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गया है। भारत रत्न डॉ. बी.आर. आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में सजने वाली इस भीम नगरी को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पार्षदों ने क्षेत्रीय आयोजन कमेटी और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। बसपा पार्षदों ने आयोजन कमेटी पर तीखा हमला बोलते हुए निमंत्रण में खुलेआम भेदभाव करने और नगर निगम के फंड से होने वाले विकास कार्यों में भारी ‘बंदरबांट’ करने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। पार्षदों का स्पष्ट कहना है कि नगर निगम (Agra Nagar Nigam) के सदन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं और चुने हुए जनप्रतिनिधियों का घोर अपमान किया गया है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने आगरा की स्थानीय राजनीति में भारी उबाल ला दिया है और बसपा पार्षदों ने महापौर (Mayor) और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र जांच कमेटी से निष्पक्ष जांच कराने की कड़ी मांग कर डाली है。

HIGHLIGHTS
  1. बसपा पार्षदों का खुला विद्रोह: भीम नगरी आयोजन कमेटी पर निमंत्रण में भेदभाव और नगर निगम सदन के अपमान का बेहद गंभीर आरोप लगाया गया है।
  2. विकास कार्यों में भारी पक्षपात: आरोप है कि आयोजन स्थल के आसपास बुनियादी विकास कराने के बजाय चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए दूर-दराज के वार्डों में काम कराए गए।
  3. स्वतंत्र जांच कमेटी की मांग: पार्षदों ने महापौर और नगर आयुक्त से बचे हुए कार्यों पर रोक लगाने और पूरे फंड आवंटन की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
  4. 15 से अधिक पार्षद लामबंद: मोहम्मद आसिफ, डॉ. यशपाल सिंह और इमराना अब्बास सहित बसपा के दर्जनों कद्दावर पार्षदों ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा।

सदन का अपमान: प्रस्ताव की उड़ी धज्जियां, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में नगर निगम का सदन (Municipal House) शहर की सबसे बड़ी पंचायत होती है। इसके द्वारा पारित प्रस्तावों का पालन करना नगर निगम प्रशासन और उससे जुड़ी हर आयोजन समिति का नैतिक और कानूनी दायित्व होता है। बहुजन समाज पार्टी के आक्रोशित पार्षदों ने बताया कि आगरा नगर निगम के सदन में कुछ समय पूर्व ही यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो चुका है कि निगम सीमा के अंतर्गत होने वाले सभी बड़े सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों (खासकर जिनमें निगम का फंड या मशीनरी लगती है) में शहर के सभी पार्षदों को पूरे सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाएगा। यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया था ताकि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शहर के सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि इन आयोजनों का हिस्सा बन सकें।

लेकिन, बसपा पार्षदों का आरोप है कि इस बार भीम नगरी आयोजन में इस प्रस्ताव की खुलेआम हत्या की गई है। आयोजन कमेटी ने भारी राजनीतिक दुर्भावना और सुनियोजित भेदभाव (Planned Discrimination) के तहत बहुजन समाज पार्टी के कई वरिष्ठ और सक्रिय पार्षदों को निमंत्रण तक नहीं भेजा। पार्षदों का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों का अपमान नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर नगर निगम के सदन, शहर के लाखों मतदाताओं और उस महान लोकतांत्रिक व्यवस्था का घोर अपमान है, जिसके रचयिता स्वयं बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर थे। जिन लोगों के हाथों में इस महान आयोजन की कमान थी, उन्होंने अपनी संकीर्ण राजनीति चमकाने के लिए जनप्रतिनिधियों का तिरस्कार किया है।

विकास कार्यों में ‘बंदरबांट’: चहेते वार्डों पर लुटाया गया निगम का फंड

विवाद केवल निमंत्रण पत्र न मिलने तक ही सीमित नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा और गंभीर पहलू भीम नगरी आयोजन के नाम पर स्वीकृत किए गए ‘विकास कार्यों’ (Development Works) में हुई भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। परंपरा के अनुसार, हर साल जिस भी क्षेत्र में भीम नगरी सजती है, नगर निगम द्वारा उस क्षेत्र और उससे सटे हुए वार्डों में सड़क निर्माण, नाली मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था (Street Lighting) और स्वच्छता के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाता है ताकि आयोजन में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।

बसपा पार्षदों ने सीधे तौर पर नगर निगम के अधिकारियों और आयोजन कमेटी की मिलीभगत की ओर इशारा करते हुए बेहद सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनका स्पष्ट आरोप है कि इस बार आयोजन स्थल और उससे सटे उन वार्डों में जहां बुनियादी विकास कार्यों की सख्त जरूरत थी, वहां जानबूझकर कोई काम नहीं कराया गया। इसके विपरीत, इस विशेष बजट को उन दूर-दराज के वार्डों में डायवर्ट (Divert) कर दिया गया, जिनका भीम नगरी आयोजन से कोई सीधा वास्ता ही नहीं था। पार्षदों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण (Biased) है और केवल अपने चहेते ठेकेदारों और राजनीतिक रूप से जुड़े क्षेत्रों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने की मंशा से लिया गया है। जनता के टैक्स के पैसे का यह दुरुपयोग पूरी तरह से गैर संवैधानिक है और यह भीम नगरी जैसे पवित्र आयोजन की आड़ में किया गया एक बड़ा ‘घोटाला’ प्रतीत होता है।

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जांच कमेटी की मांग: बचे हुए कार्यों पर तुरंत लगे रोक

अब जब भीम नगरी का मुख्य आयोजन समाप्त हो चुका है, तो बसपा पार्षदों ने अपनी लड़ाई को एक निर्णायक मोड़ पर ला दिया है। पार्षदों ने एकजुट होकर आगरा के महापौर (Mayor) और नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में स्पष्ट मांग की गई है कि भीम नगरी आयोजन के नाम पर स्वीकृत की गई जो भी विकास योजनाएं या टेंडर अभी तक शुरू नहीं हुए हैं, उन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। बिना जांच के किसी भी ठेकेदार को नया कार्य शुरू करने की अनुमति बिल्कुल न दी जाए।

बसपा पार्षदों ने प्रशासन से एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कमेटी (Independent Inquiry Committee) गठित करने की जोरदार मांग उठाई है। यह कमेटी इस बात की गहन समीक्षा करे कि आयोजन के लिए कुल कितना बजट आवंटित हुआ था, वह बजट किन-किन वार्डों में खर्च किया गया, और क्या उन कार्यों का सीधा संबंध आयोजन स्थल की सुविधाओं से था या नहीं? पार्षदों का दो टूक कहना है कि जब तक इस जांच रिपोर्ट के नतीजे सार्वजनिक नहीं हो जाते और दोषियों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक आगे का कोई भी भुगतान या कार्य नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। इसके साथ ही, पार्षदों ने भविष्य के लिए यह भी सख्त मांग उठाई है कि निगम निधि से जुड़े किसी भी आयोजन में सभी जनप्रतिनिधियों को नियमानुसार आमंत्रित करना अनिवार्य (Mandatory) किया जाए, ताकि कोई भी आयोजन कमेटी भविष्य में ऐसी तानाशाही और मनमानी करने की हिम्मत न जुटा सके।

विरोध में लामबंद हुए बसपा के दिग्गज पार्षद

भीम नगरी आयोजन कमेटी और निगम प्रशासन के खिलाफ इस खुले विद्रोह में बहुजन समाज पार्टी का पूरा पार्षद दल (BSP Councilors) एक चट्टान की तरह एकजुट खड़ा नजर आ रहा है। इस भारी नाराजगी और विरोध को नेतृत्व प्रदान करने वालों में बसपा के कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद आसिफ, पूर्व नेता पार्षद दल डॉ. यशपाल सिंह, और पूर्व उपनेता पार्षद दल सुनील शर्मा जैसे कद्दावर चेहरे शामिल हैं।

इनके साथ ही, इस अन्याय के खिलाफ अपनी बुलंद आवाज उठाने वालों में पार्षद दल सचेतक इमराना अब्बास, पार्षद गंगा राम माथुर, पार्षद निधि पटेल, पार्षद प्रीति भारती, पार्षद ममता कुशवाह, पार्षद संजू देवी, पार्षद रजनी देवी, पार्षद चौधरी राधेलाल, पार्षद पुष्पा कुमारी मौर्या, पार्षद सुरेश कुशवाहा, पार्षद उषा देवी और पार्षद बेबी सहित पार्टी के कई अन्य प्रमुख पार्षद शामिल हैं। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया और पक्षपातपूर्ण रवैया जारी रहा, तो वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक और भी उग्र रूप में लड़ने के लिए विवश होंगे। आगरा का नगर निगम प्रशासन अब इस भारी राजनीतिक दबाव से कैसे निपटता है, यह देखने वाली बात होगी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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