Uttar Pradesh Desk, Taj News | Friday, April 10, 2026, 06:55:40 PM IST

वृंदावन/मथुरा: कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार की तीसरी पहर आस्था के जयकारों के बीच मौत ने ऐसा खौफनाक झपट्टा मारा कि यमुना की पावन लहरें आंसुओं और चीखों से नम हो गईं। श्रीबांके बिहारी मंदिर के दर्शन कर पुण्य कमाने आए पंजाब के पर्यटकों का एक बड़ा समूह एक ऐसी प्रशासनिक और मानवीय चूक का शिकार हो गया, जिसकी कीमत 10 जिंदगियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रसिद्ध केसी घाट पर करीब 27 श्रद्धालुओं से भरी एक ओवरलोडेड नाव अचानक तेज हवा के थपेड़ों और नाविक की जिद के कारण यमुना नदी पर बने पांटून (पीपा) पुल से जा टकराई और देखते ही देखते गहरे पानी में समा गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस नाव पर सवार किसी भी शख्स ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। घटना के बाद पूरे मथुरा-वृंदावन में हड़कंप मच गया और लापता लोगों की तलाश के लिए सेना (Indian Army) और एनडीआरएफ को मोर्चा संभालना पड़ा। इस भीषण हादसे ने न केवल उत्तर प्रदेश की पर्यटन व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, बल्कि ‘यमुना विहार’ के नाम पर फैले अराजकता के तंत्र को भी बेनकाब कर दिया है।

पंजाब से पुण्य कमाने आए थे 130 श्रद्धालु, जश्न बना मातम
पंजाब के लुधियाना, हिसार और मुक्तेश्वर से ‘बांके बिहारी क्लब’ के करीब 130 सदस्यों का एक दल 9 अप्रैल की शाम बड़ी उम्मीदों और खुशियों के साथ दो टूरिस्ट बसों में सवार होकर वृंदावन के लिए रवाना हुआ था। ये सभी श्रद्धालु वृंदावन के फोगला आश्रम में रुके थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे, जब मंदिर के पट खुलने का समय नजदीक था, इनमें से करीब 33 लोगों ने यमुना में नौका विहार का आनंद लेने का मन बनाया। श्रद्धालु दो नावों में सवार हुए, जिनमें से एक नाव (स्टीमर) पर 25 से 27 लोग सवार हो गए।
नाव पर सवार लुधियाना के तनिष जैन ने रोते हुए वह खौफनाक मंजर बयां किया। तनिष ने बताया कि जब नाव बीच यमुना में पहुंची, तो हवा की रफ्तार अचानक बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार उस समय हवा की गति 31 किमी प्रति घंटा थी। तेज हवाओं के कारण नाव डगमगाने लगी, लेकिन नाविक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। श्रद्धालुओं ने नाविक को बार-बार आगाह किया कि सामने पीपा पुल आ रहा है और नाव को किनारे ले लिया जाए, लेकिन नाविक अपनी जिद पर अड़ा रहा। दो बार नाव पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार में तेज रफ्तार और हवा के दबाव ने नाव को सीधे लोहे के गर्डरों से टकरा दिया। टक्कर होते ही नाव एक तरफ पलटी और देखते ही देखते 27 जिंदगियां यमुना के काले पानी में समा गईं।

लापरवाही का पीला सिंदूर: 10 चिराग बुझे, नाविक मौके से फरार
हादसा इतना भीषण था कि पानी में गिरे लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। डूबते हुए लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लाइफ जैकेट न होने की वजह से वे भारी कपड़ों के साथ नीचे बैठते चले गए। घाट पर मौजूद स्थानीय गोताखोर गुलाब और उनके साथियों ने जब यह मंजर देखा, तो वे अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में कूद पड़े। गोताखोरों की फुर्ती से 15 लोगों को किसी तरह जिंदा बाहर निकाल लिया गया, लेकिन बाकी 10 लोग मौत की आगोश में सो चुके थे।
इस हादसे में जान गंवाने वालों में सपना अरोरा, इशान कटारिया, कविता बहल, आशा रानी, मीनू बंसल, राकेश गुलाटी, अंजू, प्रिंसी, करोरी और मधुर बहल शामिल हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं थीं जो अपने परिवार के साथ भगवान के दर्शन करने आई थीं। हादसे के तुरंत बाद खुद को सुरक्षित पाते ही नाविक मौके से फरार हो गया। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि जिस नाव पर 27 लोग सवार थे, उसकी वास्तविक क्षमता मात्र 15 लोगों की थी। लालच के चक्कर में नाविक ने क्षमता से दोगुने लोग बिठाए और सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया।

आर्मी और NDRF ने संभाला मोर्चा, तलाश अब भी जारी
डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और डीआईजी शैलेश पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। लापता 3 से 5 लोगों की तलाश के लिए डीएम ने तुरंत मथुरा कैंट से सेना की मदद मांगी। कुछ ही घंटों में सेना के जवान और पीएसी के गोताखोरों ने यमुना में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में जुट गई। रात के अंधेरे और यमुना के तेज बहाव के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण भी मांट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और जिला प्रशासन को मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता और घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

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अराजकता और अनियंत्रित नौकायन: कब तक बलि चढ़ेंगे बेगुनाह?
वृंदावन में यमुना के तट पर हो रहे नौकायन में अराजकता कोई नई बात नहीं है। स्थानीय निवासी लाला पहलवान ने प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा, “यमुना विहार के नाम पर यहां हुड़दंग मचाया जाता है। हमारे ठाकुरजी ने यहां नौका विहार किया था, लेकिन आज नावों पर उन्मादी गाने बजाए जाते हैं और लोग नावों की छतों पर सवार होकर स्टंट करते हैं। प्रशासन और नाविकों के बीच कोई तालमेल नहीं है।” कांग्रेस पार्षद घनश्याम चौधरी ने भी प्रशासन की घेराबंदी करते हुए सवाल उठाया कि जब प्रशासन को पता है कि यमुना में पीपा पुल बना हुआ है, तो वहां सुरक्षा जाल या पर्याप्त चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?
सबसे बड़ा सवाल लाइफ जैकेट (Life Jacket) को लेकर है। नियम के अनुसार, किसी भी व्यावसायिक नौकायन में हर यात्री को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य है, लेकिन वृंदावन के घाटों पर इस नियम की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जाती हैं। नाविकों के पास न तो पर्याप्त लाइफ जैकेट हैं और न ही प्रशासन उन्हें इसके लिए मजबूर करता है। पीपा पुल जिसे पांटून पुल भी कहा जाता है, वह नदी के बीच में एक बाधा की तरह होता है। तेज हवा और बहाव के समय नावों का इससे टकराना हमेशा घातक साबित होता है।
आज पंजाब के जिन 10 परिवारों ने अपनों को खोया है, वे कभी भी इस तीर्थ यात्रा को भुला नहीं पाएंगे। आशा रानी, जो हिसार के भिवानी की रहने वाली थीं, उनकी तस्वीर आज हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों की आंखें नम कर रही है। प्रशासन के लिए यह हादसा एक ऐसी चेतावनी है जिसे अब नजरअंदाज करना नामुमकिन होगा। अगर अब भी नावों की क्षमता, फिटनेस और सुरक्षा मानकों पर लगाम नहीं कसी गई, तो पवित्र यमुना की लहरें ऐसे ही बेगुनाह खून से लाल होती रहेंगी। वृंदावन का घाट आज शाम सन्नाटे और सिसकियों में डूबा हुआ है, और हर कोई यही पूछ रहा है—आखिर इन 10 मौतों का असली जिम्मेदार कौन है? नाविक की जिद या प्रशासन की अनदेखी?

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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