डॉ. अरुण शर्मा: जेईई एडवांस 2026: गणित ने बढ़ाई मुश्किलें, केमिस्ट्री बनी सबसे बड़ी राहत

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Agra Desk, tajnews.in | Sunday, May 17, 2026, 10:31:00 PM IST

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देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। परीक्षा के बाद पूरे देश के लाखों छात्रों के मन में कटऑफ और पेपर के स्तर को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है। ताजनगरी आगरा में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी मोशन एकेडमी ने इस परीक्षा का सबसे सटीक और वैज्ञानिक विश्लेषण जारी किया है। मोशन एकेडमी आगरा के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने इस वर्ष के पेपर को मध्यम से कठिन (Moderate to Tough) स्तर का बताया है। उनके अनुसार, इस बार परीक्षा में केवल रटने वाले छात्रों को सफलता नहीं मिलेगी। गहरी वैचारिक समझ और बेहतर समय प्रबंधन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित होंगे। गणित ने छात्रों के सबसे ज्यादा पसीने छुड़ाए हैं, जबकि केमिस्ट्री ने एक बड़े रक्षक की भूमिका निभाई है।

Dr Arun Sharma Director of Motion Academy Agra doing JEE Advanced 2026 paper analysis
विश्लेषण के मुख्य बिंदु
  • पेपर का ओवरऑल स्तर: जेईई एडवांस 2026 का पेपर मध्यम से कठिन रहा। रटने के बजाय वैचारिक समझ की सख्त जरूरत पड़ी।
  • गणित ने बढ़ाई मुश्किलें: गणित का खंड सबसे ज्यादा लंबा और कठिन साबित हुआ। इसने छात्रों का बहुत ज्यादा समय खराब किया।
  • केमिस्ट्री बनी तारणहार: रसायन विज्ञान का खंड अपेक्षाकृत काफी आसान और स्कोरिंग रहा। यह एनसीईआरटी पर ही आधारित था।
  • कटऑफ पर सीधा असर: पेपर के कठिन होने के कारण इस बार कटऑफ बहुत ज्यादा ऊपर जाने की संभावना बिल्कुल नहीं है।

आईआईटी में प्रवेश का सपना और छात्रों की चिंता

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश पाना देश के हर विज्ञान और इंजीनियरिंग छात्र का सबसे बड़ा सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए छात्र दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत करते हैं। जेईई एडवांस की परीक्षा इस सपने का अंतिम और सबसे कठिन पड़ाव मानी जाती है। साल 2026 की यह बहुप्रतीक्षित परीक्षा अब पूरी तरह से संपन्न हो चुकी है। परीक्षा हॉल से बाहर निकलते ही हर छात्र के चेहरे पर सवाल और तनाव साफ नजर आ रहा था। सभी विद्यार्थी अपने प्रदर्शन का सटीक आकलन करने के लिए विषय विशेषज्ञों की तरफ देख रहे थे। आगरा शहर शिक्षा का एक बहुत बड़ा केंद्र है। यहां के छात्र भी इस परीक्षा में बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

परीक्षा के तुरंत बाद पेपर का सही स्तर जानना हर छात्र और अभिभावक के लिए बेहद जरूरी होता है। इसी भारी मांग को देखते हुए मोशन एकेडमी आगरा ने छात्रों के लिए एक बहुत ही विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। मोशन एकेडमी पूरे उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के लिए एक बहुत ही विश्वसनीय नाम बन चुका है। संस्थान के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का बहुत गहरा और लंबा अनुभव है। उनके द्वारा किए गए सटीक विश्लेषण का छात्र बहुत बेसब्री से इंतजार करते हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, डॉ. अरुण शर्मा ने पेपर के हर पहलू को बहुत ही बारीकी से परखा है। उनका यह आकलन छात्रों को अपनी आगे की रणनीति बनाने में भारी मदद करेगा।

रटने वालों की राह हुई बंद, वैचारिक समझ की हुई जीत

डॉ. अरुण शर्मा ने जेईई एडवांस 2026 के पेपर का ओवरऑल स्तर मध्यम से कठिन (Moderate to Tough) बताया है। उन्होंने एक बहुत ही खास और अहम बात पर जोर दिया है। इस बार के पेपर ने यह साफ कर दिया है कि आईआईटी में रटकर पढ़ाई करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। परीक्षा में पूछे गए सवालों को हल करने के लिए विषयों की बहुत गहरी वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) की जरूरत पड़ी। जिन छात्रों ने केवल सूत्रों को याद किया था, उन्हें परीक्षा में भारी निराशा का सामना करना पड़ा। सवालों को बहुत ही घुमा-फिरा कर पूछा गया था।

परीक्षा में समय प्रबंधन (Time Management) ने भी एक बहुत बड़ा खेल खेला। डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि पेपर को हल करते समय छात्रों को अपने दिमाग को बहुत शांत रखना था। कई सवाल ऐसे थे जो दिखने में आसान लग रहे थे, लेकिन उनमें कई तरह की बारीक अवधारणाएं छिपी हुई थीं। इन सवालों ने छात्रों का बहुत ज्यादा समय खा लिया। जो छात्र समय के जाल में उलझ गए, उनका पूरा पेपर बिगड़ गया। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि पेपर ट्रिकी (Tricky) जरूर था, लेकिन इसे अनुचित (Unfair) बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। आईआईटी हमेशा से ही छात्रों की मानसिक क्षमता की कड़ी परीक्षा लेता रहा है। इस बार भी उसने अपनी इस पुरानी परंपरा को पूरी तरह से कायम रखा है।

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विषयवार विश्लेषण: गणित ने किया परेशान, फिजिक्स ने चकराया

मोशन एकेडमी के विश्लेषण में हर विषय की बहुत गहरी और बारीक समीक्षा की गई है। डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि इस बार गणित (Mathematics) का हिस्सा छात्रों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुआ है। गणित को सबसे ज्यादा कठिन और लंबा (Lengthy) माना गया। इस विषय में कई प्रश्न मल्टी-कॉन्सेप्ट (Multi-concept) पर आधारित थे। इसका मतलब है कि एक ही सवाल को हल करने के लिए छात्रों को दो या तीन अलग-अलग पाठों की जानकारी होनी चाहिए थी। इसके अलावा, गणित के सवालों में कैलकुलेशन (Calculation) का हिस्सा बहुत ज्यादा भारी था। छात्रों को अंतिम उत्तर तक पहुंचने में काफी पसीना बहाना पड़ा।

भौतिक विज्ञान (Physics) के विषय का स्तर भी कोई बहुत आसान नहीं था। इसे मध्यम से कठिन श्रेणी में रखा गया है। फिजिक्स के पेपर में कांसेप्चुअल (Conceptual) और लॉजिकल रीजनिंग (Logical Reasoning) वाले प्रश्नों की संख्या काफी अधिक थी। सीधे तौर पर फॉर्मूले लगाकर उत्तर निकालने वाले सवाल बहुत कम थे। छात्रों को हर सवाल के पीछे छिपे विज्ञान के नियम को बहुत गहराई से सोचना पड़ा। फिजिक्स के कुछ सवालों ने छात्रों का बहुत ज्यादा कीमती समय बर्बाद किया। इस विषय ने छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता का बहुत ही कड़ा परीक्षण किया है।

केमिस्ट्री ने छात्रों को दी सबसे बड़ी राहत

जहां गणित और फिजिक्स ने छात्रों की धड़कनें तेज कर दी थीं, वहीं रसायन विज्ञान (Chemistry) ने उन्हें बहुत बड़ी राहत प्रदान की। डॉ. अरुण शर्मा के अनुसार, केमिस्ट्री का खंड अपेक्षाकृत आसान और स्कोरिंग रहा। यह विषय उन छात्रों के लिए संजीवनी बूटी साबित हुआ है, जिनकी तैयारी थोड़ी भी संतुलित थी। केमिस्ट्री में एनसीईआरटी (NCERT) पर आधारित सवालों की संख्या बहुत अधिक थी। जिन छात्रों ने एनसीईआरटी की किताबों का गहराई से अध्ययन किया था, उन्होंने इस विषय में बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है। केमिस्ट्री ने छात्रों का आत्मविश्वास वापस लौटाने का बहुत बड़ा काम किया।

केमिस्ट्री में संतुलित प्रश्नों के कारण छात्रों ने इस खंड को बहुत ही कम समय में हल कर लिया। इस बचे हुए समय का उपयोग उन्होंने गणित और फिजिक्स के उलझे हुए सवालों को सुलझाने में किया। कुल मिलाकर, यह साफ है कि केमिस्ट्री ने छात्रों के स्कोर को डूबने से पूरी तरह बचा लिया है। डॉ. अरुण शर्मा ने बहुत ही अहम सलाह देते हुए कहा कि इस परीक्षा में स्पीड (Speed) से ज्यादा एक्यूरेसी (Accuracy) महत्वपूर्ण थी। जिन विद्यार्थियों ने सवालों को तेजी से हल करने के चक्कर में गलतियां कीं, उन्हें भारी निगेटिव मार्किंग (Negative Marking) का नुकसान उठाना पड़ेगा। सटीकता ही रैंक तय करेगी।

2025 से तुलना: कटऑफ पर क्या होगा असर?

छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल कटऑफ को लेकर है। डॉ. अरुण शर्मा ने वर्ष 2025 और 2026 के प्रश्नपत्रों की एक बहुत ही शानदार और तार्किक तुलना की है। उन्होंने बताया कि दोनों वर्षों के पेपर के पैटर्न में लगभग समानता देखने को मिली है। लेकिन, 2026 के पेपर में सवालों की वैचारिक गहराई (Conceptual Depth) थोड़ी अधिक महसूस की गई। इसके अलावा, गणना (Calculation Pressure) का दबाव पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया था। गणित के सवालों ने छात्रों को पिछले साल से ज्यादा थकाया है। इस बदलाव का सीधा असर छात्रों के कुल स्कोर कार्ड पर पड़ना तय है।

इन सभी कारणों को देखते हुए कटऑफ के बारे में एक बहुत ही सटीक अनुमान लगाया गया है। डॉ. शर्मा का स्पष्ट मानना है कि इस बार कटऑफ के बहुत ज्यादा ऊपर जाने की संभावना काफी कम है। पेपर आसान नहीं होने के कारण अधिकतम अंक भी थोड़े नीचे आ सकते हैं। विशेष रूप से गणित के भारी कठिन होने से छात्रों का औसत स्कोर (Average Score) नीचे जाने की पूरी उम्मीद है। यह उन सामान्य छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है, जिन्होंने परीक्षा में अपना धैर्य और सटीकता बनाए रखी है। मोशन एकेडमी आगरा ने सभी छात्रों को अच्छे परिणाम के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

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