Agra Desk, tajnews.in | Tuesday, April 28, 2026, 09:25:30 PM IST

आगरा: ताजनगरी आगरा में गगनचुंबी इमारतों (High-Rise Buildings) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग बेहतर सुविधाओं और सुरक्षा की उम्मीद में इन बहुमंजिला सोसायटियों में रहना पसंद करते हैं। लेकिन मंगलवार की शाम दयालबाग इलाके में एक ऐसी खौफनाक घटना घटी, जिसने इन हाईराइज इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और निवासियों की जागरूकता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, दयालबाग स्थित प्रतिष्ठित ‘पुष्पांजलि हाइट्स’ (Pushpanjali Heights) की 11वीं मंजिल पर एक बंद फ्लैट में अचानक भीषण आग लग गई। शाम ढलते ही फ्लैट से उठता घना काला धुआं और आग की लपटें देखकर पूरी सोसायटी में भयंकर दहशत और अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर घरों से बाहर निकल आए। गनीमत यह रही कि दमकल विभाग ने सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की और महज आधे घंटे में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया। इस घटना ने एक बड़ी लापरवाही को भी उजागर किया है। बिल्डिंग में अत्याधुनिक अग्निशमन उपकरण (Fire Equipments) तो मौजूद थे, लेकिन वहां रहने वाले निवासियों को उनका इस्तेमाल करना ही नहीं आता था। आइए, हाईराइज में आग लगने की इस पूरी खौफनाक घटना, रेस्क्यू ऑपरेशन और फायर सेफ्टी की कमियों का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
शाम ढलते ही 11वीं मंजिल से उठने लगा घना धुआं
मंगलवार का दिन पुष्पांजलि हाइट्स के निवासियों के लिए सामान्य दिनों की तरह ही बीत रहा था। शाम के समय बच्चे सोसायटी के पार्क में खेल रहे थे और बड़े लोग अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में व्यस्त थे। शाम करीब 6:30 बजे अचानक इस शांत माहौल में खौफ पसर गया। सोसायटी के पर्ल ब्लॉक (Pearl Block) की 11वीं मंजिल की खिड़कियों से अचानक घना काला धुआं बाहर निकलने लगा। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद किसी ने कुछ जलाया है, लेकिन कुछ ही पलों में धुएं ने एक विकराल रूप धारण कर लिया और उसके साथ आग की डरावनी लपटें भी दिखाई देने लगीं।
यह नजारा देखते ही पूरी सोसायटी में खतरे का सायरन बजने लगा। ग्यारहवीं मंजिल से उठता धुआं देखकर नीचे खड़े लोगों में चीख-पुकार मच गई। बहुमंजिला इमारतों में आग लगने का नाम सुनते ही सबसे ज्यादा डर लिफ्ट और सीढ़ियों में फंसने का होता है। अपनी जान बचाने के लिए विभिन्न मंजिलों पर रहने वाले दर्जनों परिवार अपने घरों से बाहर निकल आए और सीढ़ियों के रास्ते नीचे की ओर भागने लगे। कुछ ही देर में पूरी बिल्डिंग खाली हो गई और नीचे परिसर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। दहशत का आलम यह था कि कुछ लोग अपने जरूरी दस्तावेज और कीमती सामान तक घर में ही छोड़कर भाग आए थे। तुरंत ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड को इस आपातकाल की सूचना दी गई।
दमकल की मुस्तैदी और 30 मिनट का रेस्क्यू ऑपरेशन
हाईराइज बिल्डिंग में आग की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। संजय प्लेस फायर स्टेशन (Sanjay Place Fire Station) को तुरंत अलर्ट किया गया। सूचना पाते ही अग्निशमन अधिकारी (FSO) सोमदत्त सोनकर अपनी पूरी टीम और कई दमकल वाहनों के साथ सायरन बजाते हुए मौके पर पहुंच गए। सोमदत्त सोनकर के नेतृत्व में दमकल कर्मियों ने बिना एक सेकंड भी गंवाए तुरंत मोर्चा संभाल लिया। जब वे 11वीं मंजिल पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि पूरा फ्लोर घने और दमघोंटू धुएं से भरा हुआ था। वहां सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था।
दमकल टीम ने ऑक्सीजन मास्क पहनकर सबसे पहले आग के मुख्य स्रोत का पता लगाया। अच्छी बात यह रही कि पुष्पांजलि हाइट्स में इंटरनल फायर फाइटिंग सिस्टम (Internal Fire Fighting System) काम कर रहा था। दमकल कर्मियों ने बिल्डिंग में लगे इन्हीं पाइप और हाइड्रेंट सिस्टम का कुशलतापूर्वक उपयोग किया। उन्होंने भारी पानी की बौछार कर केवल 30 मिनट के भीतर आग को उसी फ्लैट तक सीमित कर दिया और उसे पूरी तरह से बुझा दिया। दमकल कर्मियों की इस तत्परता और सूझबूझ ने एक बहुत बड़े हादसे को टाल दिया। यदि आग पास के फ्लैटों में फैल जाती, तो 11वीं मंजिल पर स्थिति को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता। राहत की बात यह रही कि इस भयानक घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि (Casualty) नहीं हुई।
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खाली फ्लैट में भरा था कबाड़, बनी आग की बड़ी वजह
आग बुझने के बाद जब पुलिस और दमकल विभाग ने फ्लैट के भीतर जाकर मुआयना किया, तो आग लगने का मुख्य कारण सामने आया। प्रारंभिक जांच और स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, पर्ल ब्लॉक की 11वीं मंजिल पर स्थित यह फ्लैट काफी लंबे समय से बंद पड़ा था। इस फ्लैट में कोई नहीं रहता था, लेकिन इसके भीतर भारी मात्रा में पुराना सामान और कबाड़ (Scrap) जमा करके रखा गया था। बंद फ्लैट में वेंटिलेशन न होने और ज्वलनशील कबाड़ मौजूद होने के कारण संभवतः शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) या किसी अन्य कारण से आग भड़क उठी।
फ्लैट के अंदर रखा गद्दे, पुराना फर्नीचर, प्लास्टिक का सामान और अन्य कबाड़ आग के लिए ईंधन का काम कर रहा था। इसी कबाड़ ने आग को तेजी से फैलने में मदद की। फ्लैट के अंदर रखा सारा सामान पूरी तरह से जलकर राख हो गया है। यह घटना सभी सोसायटियों के लिए एक बहुत बड़ा अलार्म है। अक्सर लोग अपने बंद फ्लैट्स या बालकनियों में अनुपयोगी सामान और कबाड़ भर देते हैं। गर्मियों के मौसम में यह कबाड़ एक ‘टिकिंग टाइम बम’ (Ticking Time Bomb) की तरह काम करता है, जो जरा सी चिंगारी मिलने पर पूरी बिल्डिंग को खाक कर सकता है। आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटी प्रबंधन को ऐसे बंद फ्लैट्स की नियमित जांच करनी चाहिए।
उपकरण थे, लेकिन इस्तेमाल करना नहीं आता था
इस पूरी घटना ने पुष्पांजलि हाइट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर एक और बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। बिल्डिंग में फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguishers), होज रील और फायर अलार्म जैसे सभी आधुनिक उपकरण मौजूद थे। लेकिन जब आग लगी, तो सोसायटी के निवासियों और वहां तैनात सिक्योरिटी स्टाफ को इन उपकरणों का इस्तेमाल करना ही नहीं आता था। अगर वे लोग इन उपकरणों को चलाना जानते, तो शायद दमकल के पहुंचने से पहले ही वे आग पर शुरुआती काबू पा सकते थे।
इस गंभीर कमी को देखते हुए एफएसओ सोमदत्त सोनकर ने आग बुझाने के तुरंत बाद एक सराहनीय कदम उठाया। उन्होंने अपनी दमकल टीम के साथ मौके पर ही सोसायटी के सभी निवासियों, गार्ड्स और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए एक आपातकालीन फायर सेफ्टी ट्रेनिंग (Fire Safety Training) का आयोजन किया। टीम ने सभी को प्रैक्टिकल करके दिखाया कि आग लगने पर बिना घबराए फायर एक्सटिंग्विशर का लॉक कैसे खोलना है, पाइप को कैसे पकड़ना है और पानी के हाइड्रेंट का इस्तेमाल कैसे करना है। इसके साथ ही धुएं से बचने और सुरक्षित बाहर निकलने के तरीके भी बताए गए। प्रशासन को अब शहर की सभी बहुमंजिला इमारतों में नियमित रूप से ‘मॉक ड्रिल’ (Mock Drill) अनिवार्य कर देनी चाहिए, ताकि लोग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से हमेशा तैयार रहें।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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