कानपुर किडनी कांड: ओटी टेक्नीशियनों ने खोला एक और नामी नर्सिंगहोम का राज

Uttar Pradesh Desk, Taj News | 📍कानपुर, उत्तर प्रदेश | Friday, April 3, 2026, 08:05:48 AM IST

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कानपुर: कानपुर किडनी कांड में पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद रोज नए और बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, शहर के अंदर मानव अंगों की तस्करी का एक बहुत बड़ा और शातिर सिंडिकेट चल रहा था। गौरतलब है कि, पुलिस ने इस मामले में दो ओटी (OT) टेक्नीशियनों को गिरफ्तार किया है। इसलिए, उन्होंने रिमांड के दौरान पुलिस के सामने कई अहम और खौफनाक राज उगल दिए हैं। इन आरोपियों ने रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक और बहुत ही नामी नर्सिंगहोम का बड़ा नाम लिया है। क्योंकि, उस नए अस्पताल में भी हाल ही में अवैध गुर्दा प्रत्यारोपण का यह गंदा खेल खेला गया था। नतीजतन, पुलिस ने अब उस अस्पताल पर भी अपना कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

HIGHLIGHTS
  • नया खुलासा: गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियनों ने शहर के एक और बड़े नर्सिंगहोम में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट होने की पक्की जानकारी दी है।
  • अधूरा ऑपरेशन: डॉक्टरों की टीम रविवार रात दो किडनी ट्रांसप्लांट करने आई थी, लेकिन किसी कारण से एक ही ऑपरेशन हो पाया।
  • महंगे टेक्नीशियन: गाजियाबाद और हापुड़ से हवाई जहाज से आने वाले ये टेक्नीशियन एक केस का 40 से 50 हजार रुपये लेते थे।
  • पुलिस का एक्शन: कानपुर पुलिस ने नए नर्सिंगहोम के दो कर्मचारियों को तुरंत हिरासत में लेकर अपनी जांच बहुत तेज कर दी है।

कानपुर किडनी कांड: नामी नर्सिंगहोम के कर्मचारी हिरासत में

कानपुर किडनी कांड की परतें अब एक-एक करके पूरी तरह खुल रही हैं। गौरतलब है कि, गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने पुलिस को उस नए नर्सिंगहोम की सटीक लोकेशन बताई है। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल रेलवे क्रॉसिंग के ठीक बगल में स्थित है। चूंकि वहां रोजाना बहुत भारी संख्या में मरीज आते हैं, इसलिए किसी को उन पर शक नहीं होता था। इसके अलावा, इस नर्सिंगहोम में कई छोटे-बड़े वैध ऑपरेशन भी लगातार होते रहते हैं।

इसी भारी भीड़ और व्यस्तता की आड़ में यह खतरनाक किडनी गैंग अपना अवैध काम करता था। इसके बाद, पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस अस्पताल के दो स्टाफ सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, पुलिस अभी भी उन दोनों कर्मचारियों से बहुत ही कड़ाई से अपनी पूछताछ कर रही है। ताकि, अस्पताल के मुख्य संचालक और फरार डॉक्टरों का पक्का सुराग आसानी से मिल सके। नतीजतन, शहर के कई अन्य बड़े अस्पतालों में भी अब भारी दहशत का माहौल बन गया है।

कानपुर किडनी कांड: एनसीआर के बड़े अस्पतालों का नेटवर्क

कानपुर किडनी कांड का यह पूरा नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित बिल्कुल नहीं है। पुलिस जांच में यह बात एकदम साफ हो गई है कि इस गैंग के तार सीधे दिल्ली-एनसीआर (NCR) से जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि, राजेश कुमार नोएडा के सर्वोदय अस्पताल में काम करता था। जबकि, कुलदीप गाजियाबाद के शांति गोपाल नर्सिंगहोम में एक पेशेवर ओटी टेक्नीशियन के रूप में तैनात था। इसलिए, दोनों को सर्जरी और बड़े ऑपरेशनों का बहुत ही अच्छा और लंबा अनुभव था।

इसके साथ ही, राजेश का हाल ही में प्रमोशन हुआ था और उसे 70 हजार रुपये महीने का अच्छा वेतन भी मिल रहा था। इसके बावजूद, वे दोनों लालच में आकर डॉक्टर रोहित के संपर्क में आ गए। डॉक्टर रोहित एनेस्थीसिया का एक बहुत ही शातिर डॉक्टर है। उसने इन दोनों को डॉक्टर अली और डॉक्टर सैफ जैसे बड़े सर्जनों के साथ सीधे जोड़ दिया था। इसके बाद, गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र के कई प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर भी इस गंदे खेल का हिस्सा बन गए। पुलिस अब एनसीआर में भी अपनी कई विशेष टीमें भेज चुकी है।

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कानपुर किडनी कांड: रविवार रात होने थे दो ऑपरेशन

कानपुर किडनी कांड में एक और बहुत ही चौंकाने वाली बात सामने आई है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रविवार की देर रात आहूजा अस्पताल में डॉक्टरों की टीम असल में दो लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट करने आई थी। लेकिन, कुछ तकनीकी या सुरक्षा कारणों से वे सिर्फ एक ही ऑपरेशन पूरा कर पाए। गौरतलब है कि, उन्होंने बेगूसराय के छात्र आयुष की किडनी निकालकर मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को लगा दी थी।

इसके बाद, वे लोग डर के मारे दूसरा ऑपरेशन किए बिना ही वहां से रातों-रात भाग निकले। चूंकि पुलिस ने इन दोनों ओटी टेक्नीशियनों को पकड़ लिया है, इसलिए अब दूसरे डोनर का सच भी सामने आ गया है। पूछताछ में पता चला है कि झारखंड और नेपाल के रहने वाले दो अन्य डोनर भी इस गैंग के चंगुल में पूरी तरह फंसे हुए हैं। इसके अलावा, जिस दूसरे मरीज को वह नई किडनी लगनी थी, वह अभी भी शहर के ही एक अस्पताल में भर्ती है। पुलिस अब उन सभी लोगों की सरगर्मी से अपनी तलाश कर रही है।

कानपुर किडनी कांड: फ्लाइट से आते थे डॉक्टर और टेक्नीशियन

कानपुर किडनी कांड में शामिल यह पूरा गिरोह बहुत ही ज्यादा हाई-प्रोफाइल तरीके से अपना काम करता था। गौरतलब है कि, ये सभी डॉक्टर और ओटी टेक्नीशियन हमेशा हवाई जहाज से ही कानपुर आते-जाते थे। पुलिस ने उस अर्टिगा कार के ड्राइवर से भी बहुत ही सख्ती से अपनी पूछताछ की है, जिसने इन लोगों को लखनऊ एयरपोर्ट पर ड्रॉप किया था। ड्राइवर ने बताया कि वे सभी लोग अपनी अगली ट्रिप के लिए हवाई जहाज की टिकटों के बारे में आपस में बात कर रहे थे।

चूंकि राजेश और कुलदीप बहुत ही पेशेवर थे, इसलिए वे हर एक ट्रांसप्लांट के लिए 40 से 50 हजार रुपये अलग से लेते थे। उनका मुख्य काम ऑपरेशन से पहले सारी दवाएं, इंजेक्शन और महंगे उपकरण पूरी तरह तैयार रखना होता था। इसके अलावा, वे सर्जरी के बाद डोनर और रिसीवर को अपनी तरफ से कुछ मेडिकल परामर्श भी देते थे। इन टेक्नीशियनों की एनसीआर क्षेत्र की बड़ी दवा कंपनियों से बहुत गहरी और अच्छी जान-पहचान थी। इसलिए, वे बहुत आसानी से सारा प्रतिबंधित सामान कानपुर ले आते थे।

कानपुर किडनी कांड: शनिवार-रविवार को होता था गंदा खेल

कानपुर किडनी कांड का यह पूरा काला कारोबार मुख्य रूप से वीकेंड (Weekend) पर ही चलता था। डीसीपी पश्चिमी जोन के मुताबिक, ये आरोपी पहले भी आठ से दस बार इस शहर में अपना यह अवैध काम कर चुके हैं। गौरतलब है कि, वे लोग हमेशा शनिवार या रविवार की रात को ही अपना ऑपरेशन करते थे। क्योंकि, छुट्टी के दिन अस्पतालों में आम स्टाफ और चेकिंग काफी कम होती है। इसके बाद, शिवम अग्रवाल नाम का एजेंट उन्हें केशवपुरम और रावतपुर के बड़े होटलों में रुकवाने की पूरी जिम्मेदारी लेता था।

नतीजतन, यह गिरोह कई महीनों से पुलिस की आंखों में बहुत ही आसानी से धूल झोंक रहा था। लेकिन, हर अपराधी कभी न कभी अपनी कोई गलती जरूर करता है। इस बार आहूजा अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे तो जानबूझकर बंद कर दिए गए थे। हालांकि, पास की एक दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रात तीन बजे वहां से निकलने वाली लग्जरी कारों की पूरी फुटेज साफ तौर पर रिकॉर्ड हो गई। इसके अलावा, आरोपियों के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन ने भी पुलिस को उनके गिरेबान तक पहुंचने का एक बहुत बड़ा रास्ता दिखा दिया।

अंततः, कानपुर पुलिस अब इस पूरे मेडिकल माफिया की कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि वे इस रैकेट से जुड़े हर एक डॉक्टर और दलाल को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजेंगे। पुलिस की यह त्वरित और शानदार कार्रवाई निश्चित रूप से बहुत ही ज्यादा काबिले तारीफ है। ताज न्यूज़ इस पूरे सनसनीखेज मामले की हर एक एक्सक्लूसिव अपडेट आप तक लगातार पहुंचाता रहेगा।

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Pawan Singh

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Chief Editor, Taj News

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