Ashtahnika Mahaparva Sikandra Agra Ghatyatra

सिकंदरा में अष्टानिका महापर्व: 108 कलशों संग निकली भव्य घटयात्रा, सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 24 Feb 2026, 06:45 pm IST

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धर्म, आस्था और संस्कृति

आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में इन दिनों पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म की बयार बह रही है। आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा के सेक्टर 7 स्थित शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में ‘अष्टानिका महापर्व’ के पावन अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ और सिद्धचक्र महामंडल विधान का अत्यंत भव्य शुभारंभ हुआ। विधान के पहले दिन मंगलवार को पूरे हर्षोल्लास और धार्मिक विधि-विधान के साथ एक विशाल ‘घटयात्रा’ (कलश यात्रा) निकाली गई। इस घटयात्रा में समाज की महिलाओं ने 108 कलश धारण कर पुण्य अर्जन किया, वहीं समाज के श्रेष्ठि वर्ग ने स्वर्ग के देवताओं (इंद्रों) का स्वरूप धारण कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अंश (Highlights)

  • सिकंदरा के शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में शुरू हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान।
  • नारियल फोड़कर किया गया 108 कलशों वाली भव्य घटयात्रा का पावन शुभारंभ।
  • सेक्टर 7 से शुरू होकर सेक्टर 10 होते हुए सेक्टर 4 जैन मंदिर पर संपन्न हुई यात्रा।
  • बाल ब्रह्मचारी पीयूष शास्त्री के सानिध्य में हीरालाल बैनाड़ा और अशोक जैन परिवार ने किया ध्वजारोहण।
Ashtahnika Mahaparva Sikandra Agra Ghatyatra

▲ आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा में 108 कलश लेकर घटयात्रा में चलतीं जैन समाज की महिलाएं।

नारियल फोड़कर हुआ घटयात्रा का भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार सुबह शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 7 प्रांगण से हुई। आयोजन समिति और समाज के वरिष्ठजनों ने मंगलाचरण के साथ नारियल फोड़कर इस पावन घटयात्रा का विधिवत शुभारंभ किया। जैन धर्म में घटयात्रा या जलयात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। कलश में भरा हुआ पवित्र जल जीवन की शुद्धता और निर्मलता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं जब सिर पर इन मंगल कलशों को धारण कर चलती हैं, तो यह समाज में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक होता है।

यह विशाल घटयात्रा सेक्टर 7 जैन मंदिर से प्रारंभ हुई और प्रॉपर्टी, सेक्टर 10 एवं पुलिस चौकी सेक्टर 4 के मुख्य मार्गों से होते हुए सेक्टर 4 स्थित जैन मंदिर पर जाकर पूरे हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। पूरे मार्ग में जैन धर्मावलंबियों ने अपने घरों के बाहर रंगोलियां सजाकर और पुष्प वर्षा कर इस यात्रा का भव्य स्वागत किया।

बग्गियों पर सवार होकर निकले स्वर्ग के ‘इंद्र’

जैन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भी कोई महान धार्मिक अनुष्ठान या विधान होता है, तो स्वर्ग से देवता (इंद्र) भी धरती पर आते हैं। इसी मान्यता को जीवंत करते हुए इस घटयात्रा में समाज के श्रेष्ठ श्रावकों ने इंद्र और इंद्राणी का स्वरूप धारण किया। सबसे आगे ढोल-नगाड़ों की थाप पर मंगल गीत गातीं 108 महिलाएं कलश लेकर चल रही थीं। उनके पीछे सजी-धजी बग्गियों पर इंद्र-इंद्राणी विराजमान थे।

इस पावन विधान में ध्वजारोहणकर्ता बनने का सौभाग्य ओमप्रकाश जैन और लक्ष्मी जैन को प्राप्त हुआ। वहीं, सौधर्म इंद्र के रूप में अशोक जैन-निर्मला, ईशान इंद्र के रूप में प्रमोद जैन-मंजु जैन, माहेंद्र इंद्र के रूप में गिरीश जैन-मालती जैन, सानत इंद्र के रूप में संजीव जैन-रेनू जैन, ब्रह्म इंद्र के रूप में अरुण जैन-रचना जैन और ब्रह्मोत्तर इंद्र की भूमिका में सतेंद्र जैन-मीना जैन बग्गियों पर सवार थे।

इसके अतिरिक्त, लान्तव इंद्र डॉ. अतुल जैन-पिंकी जैन, महायज्ञनायक अंकित जैन-माधवी जैन, कुबेर इंद्र सचिन जैन-मेघा जैन और चक्रवर्ती के रूप में सुरेश चंद जैन-बीना जैन शामिल हुए। वहीं विधान के प्रमुख पात्रों (श्रीपाल और मैना सुंदरी) के रूप में राजकुमार जैन और सुलेखा जैन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

भक्ति गीतों पर झूम उठा पूरा जैन समाज

घटयात्रा में ‘आनंदा बैंड’ की मधुर स्वरलहरियों ने सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बैंड द्वारा बजाए जा रहे “तुम से लगी लगन” जैसे सुमधुर जैन भजनों की धुन पर युवा, महिलाएं और बच्चे सभी भक्ति-भाव में डूबकर नृत्य कर रहे थे। पूरा वातावरण जिनेंद्र भगवान के जयकारों और भक्ति संगीत से गुंजायमान हो रहा था। यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि समाज के सभी वर्गों के एक साथ मिलकर धर्म के मार्ग पर चलने का एक खूबसूरत संदेश था।

पीयूष शास्त्री के निर्देशन में हुआ ध्वजारोहण

घटयात्रा के सेक्टर 4 मंदिर पहुंचने के पश्चात, विधान की सभी महत्वपूर्ण धार्मिक और मांगलिक क्रियाएं बाल ब्रह्मचारी पीयूष शास्त्री के कुशल सानिध्य और मार्गदर्शन में संपन्न कराई गईं। उन्होंने श्रद्धालुओं को अष्टानिका पर्व और सिद्धचक्र महामंडल विधान का गहरा आध्यात्मिक महत्व समझाया। जैन धर्म में अष्टानिका पर्व साल में तीन बार आता है, जिसमें अष्टाह्निका (आठ दिन) तक सिद्धों और नवपदों की विशेष आराधना की जाती है। माना जाता है कि इन आठ दिनों में देवतागण नंदीश्वर द्वीप जाकर आराधना करते हैं, इसलिए पृथ्वी पर मनुष्य भी विशेष विधान आयोजित कर पुण्यार्जन करते हैं।

कार्यक्रम के इस चरण में मुख्य ध्वजारोहण हीरालाल बैनाड़ा और अशोक जैन परिवार के कर-कमलों द्वारा किया गया। ध्वजारोहण इस बात का प्रतीक है कि धर्म की पताका हमेशा आकाश में ऊंचे लहराती रहे और समाज में सत्य एवं अहिंसा का मार्ग प्रशस्त होता रहे।

समाज के इन गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

इस विश्व शांति महायज्ञ और विधान के पहले दिन राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, डॉ. पार्थसारथी शर्मा, हीरालाल बैनाड़ा, आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, महामंत्री विजय जैन निमोरब, भाजपा मंडल अध्यक्ष राहुल जैन, कोषाध्यक्ष मगन कुमार जैन विशेष रूप से मौजूद रहे।

इनके अलावा महेश चंद जैन, अनिल, आदर्श जैन, हेमा जैन, सतेंद्र जैन, आलोक जैन, सिद्धार्थ जैन, विपुल जैन, दीपक जैन, रवि जैन, दीपेश जैन, विकास जैन, चंदन जैन, आदिश जैन, संजय जैन, अभिषेक जैन, अमित जैन, पूर्व पार्षद सुषमा जैन और मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित शान्तिनाथ महिला मण्डल, वधु मण्डल और सम्पूर्ण सकल जैन समाज ने पूरी श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।

25 मार्च को होगी शांतिधारा और मुख्य विधान

आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अगले दिन यानी 25 मार्च 2026 को बाल ब्रह्मचारी पीयूष भैया के मंगल सानिध्य में सुबह 8:30 बजे से भगवान जिनेंद्र की विशेष शांतिधारा की जाएगी। शांतिधारा के पश्चात सिद्धचक्र महामंडल विधान की मुख्य पूजा शुरू होगी, जिसमें सभी इंद्र-इंद्राणी और श्रद्धालु अष्टद्रव्यों से नवपदों की आराधना कर अपने कर्मों की निर्जरा करेंगे। समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ उठाने की अपील की है।

घटयात्रा और विधान की विशेष झलकियां (Photo Gallery)

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