अबान की मौत के बाद झांसी जेल में अकेला पड़ा अली: नए मुलाकाती का नाम तक नहीं दिया, वकील ही बने सहारा

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छोटे भाई की सड़क हादसे में मौत के बाद बदला जेल का माहौल; हर हफ्ते मिलने वाला इकलौता सहारा छीना, किसी नए रिश्तेदार का नाम दर्ज नहीं, कानूनी मुलाकातों तक सीमित संपर्क

उत्तर प्रदेश डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 12 सितंबर 2026, 09:48:15 AM IST

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उत्तर प्रदेश डेस्क

tajnews.in | झांसी/प्रयागराज। छोटे भाई अबान अहमद की मौत को एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने के लिए अब तक परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है। अली ने भी जेल प्रशासन को किसी नए रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज नहीं कराया है। फिलहाल जेल में उससे मुलाकात करने वालों में उसके वकील ही शामिल हैं। यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि अबान ही लंबे समय तक अली से मिलने की जिम्मेदारी संभालता था। वह प्रयागराज से लगभग हर सप्ताह झांसी आता था और अब तक 30 से अधिक बार जेल में अपने बड़े भाई से मुलाकात कर चुका था। अली की जरूरत की कई चीजें भी अबान के जरिए ही पहुंचती थीं। 6 अगस्त 2026 को अली से मिलने झांसी आ रहे अबान की सड़क हादसे में मौत के बाद यह पूरा सिलसिला अचानक थम गया।

HIGHLIGHTS
  • झांसी जेल में बंद अतीक के बेटे अली अहमद से मिलने एक महीने में नहीं पहुंचा कोई परिजन।
  • जेल प्रशासन को नहीं दी नए मुलाकाती की सूची, फिलहाल सिर्फ वकील ही बने कानूनी सहारा।
  • हर हफ्ते प्रयागराज से झांसी मिलने आने वाले छोटे भाई अबान की 6 अगस्त को हादसे में हुई थी मौत।
  • पैरोल पर जनाजे में शामिल होकर लौटा अली, बाहरी दुनिया से पारिवारिक संपर्क पूरी तरह टूटा।

अबान की मौत के बाद अली का कोई नया मुलाकाती नहीं

वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार के अनुसार, अली ने अब तक किसी रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज कराने के लिए जेल प्रशासन को नहीं दिया है। जेल में बंद कैदियों से मिलने आने वालों का रिकॉर्ड रखा जाता है और सुरक्षा व्यवस्था के तहत मुलाकातियों की सूचना संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को भी दी जाती है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल अली के परिवार की ओर से जेल में नियमित मुलाकात की व्यवस्था दोबारा शुरू नहीं हुई है। अबान की मौजूदगी में जो जिम्मेदारी हर सप्ताह निभाई जा रही थी, उसकी जगह फिलहाल केवल कानूनी मुलाकातें रह गई हैं।

जिस भाई से मिलने जा रहा था, उसी की हादसे में मौत

6 अगस्त की सुबह अबान प्रयागराज से झांसी के लिए निकला था। उसका मकसद अपने बड़े भाई अली से जेल में मुलाकात करना था। झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र के पास उसकी कार हादसे का शिकार हो गई। दुर्घटना में अबान और उसके एक साथी की मौत हुई, जबकि कार में सवार अन्य लोग घायल हुए। हादसे की तकनीकी जांच में कार की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे होने की बात सामने आई। जांच में वाहन के ब्रेकिंग सिस्टम, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, पहियों, व्हील अलाइनमेंट, एयरबैग और सीट-बेल्ट सिस्टम समेत कई हिस्सों की जांच की गई। दुर्घटना के तकनीकी कारणों को लेकर जांच में कई पहलुओं का परीक्षण किया गया, हालांकि केवल इस रिपोर्ट के आधार पर हादसे की एकमात्र अंतिम वजह तय करना उचित नहीं होगा।

अबान के जनाजे के लिए अली को मिली थी पैरोल

छोटे भाई की मौत की खबर के बाद अली और उसके बड़े भाई उमर ने अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल की मांग की थी। अदालत ने दोनों को सशर्त अंतरिम पैरोल दी थी। 8 अगस्त को अली और उमर कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज पहुंचे और अबान के जनाजे में शामिल हुए। अबान को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के पास सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान दोनों जेल में बंद भाइयों को अपने छोटे भाई को अंतिम विदाई देने के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली थी।

जनाजे के बाद फिर झांसी जेल लौट आया अली

अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद अली वापस झांसी जेल पहुंच गया। लेकिन जेल लौटने के बाद उसके साथ मुलाकात का पुराना सिलसिला फिर शुरू नहीं हुआ। जेल प्रशासन के मुताबिक, अबान की मौत के बाद से अब तक कोई नया पारिवारिक मुलाकाती अली से मिलने नहीं आया है। अली ने भी किसी दूसरे रिश्तेदार को अधिकृत मुलाकाती के तौर पर दर्ज नहीं कराया है। ऐसे में जेल रिकॉर्ड में फिलहाल उसके वकीलों की मुलाकातें ही दर्ज हो रही हैं।

परिवार में जेल मुलाकात की जिम्मेदारियां अलग-अलग थीं

अतीक अहमद के बेटों के बीच जेल में बंद भाइयों से मुलाकात की जिम्मेदारियां अलग-अलग बताई जाती रही हैं। अली झांसी जेल में बंद है और उससे मिलने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अबान संभालता था। दूसरी ओर उमर लखनऊ जेल में बंद है और उससे मिलने के लिए परिवार के दूसरे सदस्य के जाने की बात सामने आती रही है। अबान की मौत के बाद अली के मामले में यह नियमित व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। यही वजह है कि अली द्वारा किसी नए रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज न कराना इस पूरे घटनाक्रम का अहम पहलू बन गया है।

अबान की मौत के बाद सामने आईं हादसे की तकनीकी जानकारियां

अबान की मौत के बाद सामने आई तकनीकी जांच में दुर्घटना से जुड़े कई पहलुओं का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कार हादसे से पहले करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। टक्कर के बाद कार के उछलने और फिर नीचे गिरने की स्थिति का भी तकनीकी विश्लेषण किया गया। इस जांच का उद्देश्य वाहन की तकनीकी स्थिति और दुर्घटना की परिस्थितियों को समझना था। इसलिए तेज रफ्तार का तथ्य सामने आने के बावजूद हादसे की पूरी जिम्मेदारी या अंतिम कारण के बारे में निष्कर्ष केवल इसी आधार पर निकालना उचित नहीं होगा।

झांसी से अतीक परिवार का दर्दनाक कनेक्शन

अबान की मौत ने अतीक अहमद के परिवार का झांसी से जुड़ा एक और दर्दनाक अध्याय सामने ला दिया। अप्रैल 2023 में अतीक अहमद के बेटे असद अहमद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। करीब तीन साल बाद 6 अगस्त 2026 को उसी जिले में अतीक के सबसे छोटे बेटे अबान की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। अब अली भी झांसी जेल में बंद है और अबान की मौत के बाद उसी जेल में उसके बाहरी संपर्क का एक महत्वपूर्ण जरिया खत्म हो गया है।

अली के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—कौन बनेगा नया मुलाकाती?

अबान के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अली से मिलने की पारिवारिक जिम्मेदारी अब कौन संभालेगा। फिलहाल इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। जेल प्रशासन के अनुसार, अली ने अभी तक किसी नए रिश्तेदार का नाम मुलाकाती के तौर पर दर्ज नहीं कराया है। इसलिए यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि आगे कौन नियमित रूप से उससे मिलने आएगा। एक तरफ अबान की मौत ने परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी को और गहरा कर दिया है, तो दूसरी तरफ जेल में बंद अली की रोजमर्रा की जिंदगी में भी इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। जिस भाई से मिलने के लिए अबान हर सप्ताह प्रयागराज से झांसी आता था, उसी भाई के लिए अब जेल में फिलहाल कोई नया पारिवारिक मुलाकाती नहीं है।

फिलहाल अली की झांसी जेल की मुलाकात व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यही है—अबान नहीं है, कोई नया रिश्तेदार दर्ज नहीं है और बाहरी दुनिया से उसका नियमित संपर्क फिलहाल वकीलों की मुलाकात तक सीमित दिखाई दे रहा है।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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