बिना लाइसेंस ड्राइविंग के खिलाफ अभियान में AI तस्वीर के साथ दी गई थी देश छोड़ने की चेतावनी; भारतीय-अमेरिकी संगठनों, कैलिफोर्निया के गवर्नर और सांसद राजा कृष्णमूर्ति के कड़े विरोध के बाद डीएचएस ने वापस लिया विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 11 सितंबर 2026, 08:08:15 AM IST

tajnews.in | वॉशिंगटन। अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग यानी DHS के एक सोशल मीडिया विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों के खिलाफ चलाए गए अभियान में ‘मिस्टर सिंह’ नाम और सांवले रंग-दाढ़ी वाले एक व्यक्ति की एआई तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। विज्ञापन में उसे अमेरिका छोड़ने की चेतावनी दी गई थी। भारतीय-अमेरिकी, सिख और हिंदू संगठनों के साथ डेमोक्रेट नेताओं ने इसे नस्लीय और समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाला बताया। विरोध बढ़ने के बाद DHS ने पोस्ट हटा दिया।
‘मिस्टर सिंह’ से कहा, हमारी सड़कों से हट जाओ
DHS के अभियान में एक्स पर एआई से तैयार एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। इसमें दाढ़ी वाले एक सांवले रंग के व्यक्ति के साथ संदेश दिया गया कि ‘मिस्टर सिंह’ अमेरिका की सड़कों से हट जाएं और उन्हें गाड़ी चलाना नहीं आता। एक अन्य पोस्ट में ट्रांसफॉर्मर्स के किरदार ऑप्टिमस प्राइम को DHS के निशान वाले कपड़ों में दिखाया गया। उसके सामने उसी व्यक्ति को दिखाकर खुद देश छोड़ने या अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई। यही प्रस्तुति विवाद का केंद्र बन गई।
सिंह सरनेम को निशाना बनाने पर उठे सवाल
भारतीय-अमेरिकी और सिख संगठनों ने सवाल उठाया कि सड़क सुरक्षा या बिना लाइसेंस ड्राइविंग के खिलाफ कार्रवाई को किसी खास जातीय पहचान और सरनेम से क्यों जोड़ा गया। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन समेत संगठनों ने कहा कि सिंह सरनेम रखने वाले लोग केवल सिख ही नहीं, बल्कि हिंदू और अन्य भारतीय-अमेरिकी भी हो सकते हैं। संगठनों के अनुसार, ऐसे में किसी संघीय एजेंसी की ओर से ‘सिंह’ नाम को नकारात्मक और धमकी भरे संदेश के साथ जोड़ना पूरे समुदाय को निशाना बनाने जैसा है।
कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने भी कहा कि कानून तोड़ने वाले किसी भी समुदाय, धर्म, रंग या सरनेम से हो सकते हैं। किसी खास सरनेम को निशाना बनाने से सड़क सुरक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
गवर्नर और सांसद ने भी की आलोचना
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम और डेमोक्रेट सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी पोस्ट की आलोचना की। न्यूसम के कार्यालय ने इसे सिख समुदाय को निशाना बनाने वाला नस्लवादी प्रचार बताया। राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि सरकार की ताकत का इस्तेमाल लोगों की पहचान या विरासत के आधार पर उन्हें बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
विरोध के बाद DHS ने पोस्ट हटाया, लेकिन पलटवार भी किया
विवाद बढ़ने के बाद गृह सुरक्षा विभाग ने ‘मिस्टर सिंह’ वाला पोस्ट हटा दिया। हालांकि विभाग ने आलोचना का जवाब देते हुए कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम पर अवैध प्रवासियों को व्यावसायिक वाहन चलाने के लाइसेंस देने का आरोप लगाया।
भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने पोस्ट हटाए जाने का स्वागत किया, लेकिन इसे पर्याप्त नहीं माना। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कहा कि किसी संघीय एजेंसी द्वारा भारतीय या सिख व्यक्ति की नस्लीय पहचान को राजनीतिक संदेश के लिए इस्तेमाल किया जाना गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।
हरजिंदर सिंह का वीडियो भी किया पोस्ट
विवाद के बीच DHS ने ट्रक चालक हरजिंदर सिंह से जुड़ा एक वीडियो भी पोस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, हरजिंदर सिंह को पिछले साल एक गैरकानूनी यू-टर्न के बाद हुए हादसे में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी।
इसके अलावा विभाग ने ट्रांसफॉर्मर्स के खलनायक मेगाट्रॉन वाला एक वीडियो भी पोस्ट किया। इसमें कुछ ऐसे ट्रक चालकों की रिहाई की मांग करते हुए दिखाया गया, जिनके नाम विभाग ने सड़क हादसों या अन्य अपराधों से जोड़े। DHS का संदेश था कि जो लोग अमेरिका के खिलाफ दुश्मनी की नीयत से आते हैं, उन्हें अमेरिकी सरकार की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।
सिख संगठनों ने कहा, पहचान के आधार पर निशाना बनाना गलत
सिख कोएलिशन ने कहा कि 9/11 के 25 साल बाद भी सिख समुदाय को उसके रूप-रंग और पहचान के आधार पर निशाना बनाए जाने की चिंता बनी हुई है। संगठन ने कहा कि अमेरिका में बड़ी संख्या में सिखों का सरनेम सिंह है और किसी सरकारी एजेंसी को इसे दुश्मनी या अपराध के संदेश से जोड़ना स्वीकार्य नहीं है।
विवाद के पीछे CBP Home कार्यक्रम भी
यह विवाद अमेरिकी सरकार के CBP Home कार्यक्रम के प्रचार के बीच सामने आया है। इस कार्यक्रम के तहत अमेरिका में रहने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं रखने वाले प्रवासियों को स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए पंजीकरण कराने की सुविधा दी जा रही है। सरकार के मुताबिक, पात्र लोगों को अमेरिका से बाहर जाने के लिए यात्रा संबंधी सहायता मिल सकती है और 2,600 डॉलर तक की विदाई राशि भी दी जा सकती है।
मामले का बड़ा सवाल
यह विवाद केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट हटाए जाने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि अवैध प्रवास और सड़क सुरक्षा जैसे सरकारी अभियानों में किसी विशेष समुदाय, सरनेम या नस्लीय पहचान को प्रतीक बनाकर पेश करना कितना उचित है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि कानून का प्रवर्तन व्यक्ति के आचरण के आधार पर होना चाहिए, उसकी पहचान के आधार पर नहीं।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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