विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस का दावा—करीब तीन महीने तक विशाल गौतम से संपर्क में थी शालू; 21 दिन में 330 कॉल, हत्या के दिन भी कई बार बातचीत, डुप्लीकेट चाबी और डिलीट चैट ने बढ़ाया शक
कानपुर डेस्क, 🌐 tajnews.in | शुक्रवार, 11 सितंबर 2026, 06:15:22 AM IST

tajnews.in | कानपुर। रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की कहानी जितनी सामने आ रही है, उतनी ही इसकी परतें उलझती जा रही हैं। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। हत्या की कथित तैयारी कई सप्ताह पहले शुरू हुई और बातचीत की एक ऐसी कड़ी बनी, जो धीरे-धीरे एक पूर्व कर्मचारी को कथित तौर पर हत्या की साजिश तक ले गई।
पुलिस जांच में सामने आई चैट और कॉल डिटेल के आधार पर दावा किया जा रहा है कि विनीत की बहू शालू ने पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम से पहले सामान्य बातचीत का रास्ता बनाया। फिर उसकी निजी जिंदगी के बारे में सवाल किए। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी और बाद में बातचीत का रुख विनीत की हत्या की योजना की ओर चला गया।
शुरुआत में विशाल की ओर से शालू को ‘गुड मॉर्निंग’ और ‘गुड नाइट’ जैसे संदेश भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, तब शालू इन संदेशों का जवाब नहीं देती थी। करीब तीन महीने पहले उसने खुद बातचीत शुरू की। उसने विशाल की तारीफ की और उसकी निजी जिंदगी को लेकर सवाल किए—क्या वह स्मार्ट है, उसकी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं और उसने अभी तक शादी क्यों नहीं की।
जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि सामान्य बातचीत से शुरू हुआ यह संपर्क आखिर उस मुकाम तक कैसे पहुंचा, जहां पुलिस हत्या की कथित साजिश देख रही है।
21 दिन में 330 कॉल ने बढ़ाया शक
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक कॉल डिटेल रिकॉर्ड है। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या से पहले के 21 दिनों में शालू, उसके पति सुब्रत और विशाल के बीच करीब 330 बार फोन पर संपर्क हुआ।
बताया गया है कि इनमें लगभग 30 कॉल शालू और विशाल के बीच तथा करीब 300 कॉल सुब्रत और विशाल के बीच हुईं। हत्या वाले दिन भी शालू और विशाल के बीच कई बार संपर्क होने की बात सामने आई है।
हालांकि, केवल कॉल की संख्या अपने आप में अपराध साबित नहीं करती। पुलिस इन संपर्कों के समय, अवधि, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है। यही जांच इस बात को स्पष्ट कर सकती है कि इन बातचीत का वास्तविक मकसद क्या था।
हत्या की एक नहीं, कई योजनाएं बनीं
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर यह बात भी सामने आई है कि विनीत की हत्या के लिए एक ही तरीका तय नहीं किया गया था।
जांच के मुताबिक, पहले उनकी मौत को दिल का दौरा पड़ने जैसा दिखाने की योजना पर विचार हुआ। इसके बाद सड़क हादसे में हत्या कराने का विकल्प सामने आया। लेकिन व्यस्त यातायात और वारदात के पकड़े जाने की आशंका के चलते यह योजना बदल दी गई।
इसके बाद सोते समय तकिये से मुंह दबाकर हत्या करने की कथित योजना बनाई गई। लेकिन वारदात की रात घटनाक्रम अचानक बदल गया। पुलिस के अनुसार, जब विनीत कमरे को लॉक करने जा रहे थे तो आरोपियों को आशंका हुई कि वह कुछ भांप गए हैं। इसके बाद उन पर चाकू से हमला कर दिया गया।
पुलिस जांच में विनीत के शरीर पर 26 चाकू के वार किए जाने की बात सामने आई है।
उधर पार्टी, इधर हत्या की तैयारी
हत्याकांड की टाइमलाइन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह रात है, जब विनीत का बेटा सुब्रत और बहू शालू पार्टी के लिए घर से बाहर गए थे।
पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान विशाल और उसका साथी फ्लैट में पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज में संदिग्धों की आवाजाही सामने आने के बाद पुलिस ने पूर्व कर्मचारी विशाल तक पहुंच बनाई।
सुब्रत और शालू के पार्टी में होने का वीडियो भी जांच का हिस्सा है। लेकिन पुलिस के लिए सवाल यह है कि क्या घर से बाहर उनकी मौजूदगी महज संयोग थी या हत्या की योजना का हिस्सा? इस सवाल का जवाब डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी और पार्टी स्थल से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर तलाशा जा रहा है। फिलहाल इसे स्थापित तथ्य के बजाय जांच का पहलू मानना जरूरी है।
डुप्लीकेट चाबी ने और बढ़ाई कहानी
फ्लैट में जबरन प्रवेश के स्पष्ट संकेत नहीं मिलने के बाद पुलिस की नजर उस चाबी पर गई, जिससे आरोपी कथित तौर पर अंदर पहुंचे थे।
जांच में डुप्लीकेट चाबी का जिक्र सामने आया है। पुलिस के अनुसार, विशाल ने हत्या के बाद यह चाबी अपार्टमेंट से कुछ दूरी पर फेंक दी थी। अब पुलिस उसे बरामद करने की कोशिश कर रही है।
अगर चाबी बरामद होती है और फोरेंसिक जांच से उससे जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलते हैं, तो यह फ्लैट में आरोपियों के प्रवेश की कहानी की अहम कड़ी बन सकती है।
डिलीट चैट ने भी छोड़े सवाल
हत्या के बाद शालू और विशाल के बीच हुई कथित व्हाट्सऐप चैट डिलीट किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं।
पुलिस के लिए इन संदेशों की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दोनों के बीच बातचीत कब से चल रही थी, हत्या की योजना पर कब चर्चा हुई और वारदात से पहले क्या निर्देश या जानकारी साझा की गई। यानी इस मामले में मोबाइल फोन अब उतना ही महत्वपूर्ण साक्ष्य है जितना घटनास्थल का सीसीटीवी।
मकसद की तलाश अभी बाकी
पुलिस का दावा है कि शालू अपने ससुर की कथित निगरानी और परिवार के खर्च से जुड़े नियंत्रण से नाराज थी। घर में लगे कैमरों और पारिवारिक गतिविधियों पर नजर रखने को लेकर भी विवाद की बात सामने आई है।
लेकिन किसी भी हत्या के मामले में कथित नाराजगी और हत्या के बीच संबंध को केवल आरोप के आधार पर अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। पुलिस को यह साबित करना होगा कि यही वजह कथित साजिश का वास्तविक आधार थी और उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
4:13 बजे घर लौटा परिवार, खुला हत्या का राज
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद सुब्रत और शालू तड़के करीब 4:13 बजे फ्लैट पर लौटे। इसके बाद विनीत का शव कमरे में मिला और पुलिस को सूचना दी गई।
जांच शुरू हुई तो अपार्टमेंट के कैमरों की फुटेज खंगाली गई। संदिग्धों की आवाजाही सामने आने के बाद पुलिस ने पूर्व कर्मचारी विशाल और उसके साथी तक पहुंच बनाई। इसके बाद पूछताछ, कॉल डिटेल, सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़ते हुए जांच परिवार के भीतर संभावित साजिश तक पहुंची।
अब कहानी का सबसे बड़ा सवाल—कौन कितना शामिल?
इस हत्याकांड में पुलिस के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि विनीत की हत्या किसने की। असली सवाल यह है कि साजिश की शुरुआत कहां से हुई, किसने किसे जोड़ा और वारदात की रात किसकी क्या भूमिका थी।
शालू के खिलाफ पुलिस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विशाल और उसके साथी की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। वहीं सुब्रत को लेकर भी पुलिस ने संपर्क और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच शुरू की है।
लेकिन आरोप और दोषसिद्धि के बीच कानून की एक पूरी प्रक्रिया होती है। इसलिए अभी सामने आई कहानी को पुलिस जांच और आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम सच अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और उनके न्यायिक परीक्षण से तय होगा।
फिलहाल इस मामले की सबसे बेचैन करने वाली कड़ी यही है—एक सामान्य-सी बातचीत, लगातार बढ़ता संपर्क, कथित तौर पर बदलती हत्या की योजनाएं, डुप्लीकेट चाबी, डिलीट चैट और हत्या की रात की टाइमलाइन। पुलिस इन्हीं बिखरी कड़ियों को जोड़कर उस पूरी तस्वीर तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिसमें यह साफ हो सके कि विनीत मिनोचा की हत्या के पीछे वास्तव में किसकी कितनी भूमिका थी।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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