19 साल पुराने प्रेम विवाह का दर्दनाक अंत: परिवार के खिलाफ शादी, बेटे के जन्म के बाद विवाद; लंबे अलगाव के बाद कोर्ट ने दिया तलाक

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आगरा में परिवार के विरोध के बावजूद आर्य समाज मंदिर में हुई थी शादी, 2012 के बाद अलग रहने लगे थे पति-पत्नी; 5 सितंबर 2026 को परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश दिया

आगरा डेस्क, 🌐 tajnews.in | शनिवार, 12 सितंबर 2026, 09:25:12 AM IST

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tajnews.in | आगरा। परिवार के विरोध और जातिगत असहमति के बावजूद प्रेम विवाह करने वाले एक दंपती का रिश्ता आखिरकार करीब 19 साल बाद कानूनी रूप से खत्म हो गया। दोनों की मुलाकात मथुरा रिफाइनरी में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। प्रेम संबंध के बाद दोनों ने परिवार की नाराजगी के बावजूद 20 अप्रैल 2007 को नोएडा के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी। करीब तीन साल बाद उनके घर बेटे का जन्म हुआ, लेकिन इसके बाद वैवाहिक रिश्ते में विवाद बढ़ता चला गया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पत्नी वर्ष 2012 में बेटे को लेकर मायके चली गई। इसके बाद दोनों लंबे समय तक अलग-अलग रहे और वैवाहिक जीवन सामान्य नहीं हो सका। पति ने सितंबर 2025 में परिवार न्यायालय में तलाक का मुकदमा दायर किया। सुनवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश पारित कर दिया। इस तरह परिवार के विरोध के बावजूद शुरू हुई प्रेम कहानी करीब दो दशक बाद तलाक के साथ खत्म हो गई।

HIGHLIGHTS
  • मथुरा रिफाइनरी में ट्रेनिंग के दौरान शुरू हुआ था प्रेम प्रसंग, 2007 में आर्य समाज मंदिर में किया था विवाह।
  • 2010 में बेटे के जन्म के बाद बढ़ा विवाद, 2012 से बेटे को लेकर मायके में अलग रह रही थी पत्नी।
  • लंबे अलगाव और पारिवारिक विवाद के बाद आगरा परिवार न्यायालय ने सुनाया तलाक का अंतिम फैसला।
  • 14 साल की कानूनी व मानसिक दूरी के बाद 19 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते का हुआ कानूनी अंत।

मथुरा रिफाइनरी में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी मुलाकात

मामला आगरा की रहने वाली युवती और नागपुर निवासी युवक से जुड़ा है। युवक मथुरा रिफाइनरी में अधिकारी के पद पर कार्यरत था। प्रशिक्षण के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। पहले दोनों के बीच जान-पहचान हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन युवती के परिवार को यह संबंध मंजूर नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, जातिगत अंतर को लेकर परिवार ने शादी का विरोध किया था। इसके बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

परिवार की नाराजगी के बावजूद आर्य समाज मंदिर में शादी

परिवार की असहमति के बीच दोनों ने 20 अप्रैल 2007 को नोएडा स्थित आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया। शादी के शुरुआती वर्षों में दोनों साथ रहे। वैवाहिक जीवन आगे बढ़ा और करीब तीन साल बाद 2010 में उनके घर बेटे का जन्म हुआ। लेकिन बेटे के जन्म के बाद पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ने लगे।

बेटे के जन्म के बाद रिश्ते में बढ़ता गया विवाद

पति की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, बेटे के जन्म के बाद पत्नी के व्यवहार में बदलाव आया और वह उसके परिवार तथा रिश्तेदारों के कार्यक्रमों में जाने से बचने लगी। धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई। वहीं पत्नी ने पति पर अलग आरोप लगाए। उसका कहना था कि उसके पिता ने शादी में करीब चार लाख रुपये खर्च किए थे तथा गहने और घरेलू सामान भी दिया था, लेकिन इसके बावजूद पति की ओर से दहेज की मांग और मारपीट की जाती थी। इस प्रकार दोनों पक्षों ने वैवाहिक विवाद की अलग-अलग वजहें बताईं। इन आरोपों को अदालत में पक्षकारों की ओर से रखे गए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि एकतरफा रूप से स्थापित तथ्य के रूप में।

2012 में पत्नी बेटे को लेकर मायके चली गई

विवाद लगातार बढ़ता गया और 2012 में पत्नी अपने बेटे को लेकर मायके चली गई। इसके बाद पति-पत्नी लंबे समय तक अलग रहे। वर्षों तक साथ न रहने के बावजूद विवाह कानूनी रूप से कायम रहा। अंततः पति ने विवाह समाप्त करने के लिए अदालत का रुख किया।

सितंबर 2025 में दाखिल किया तलाक का मुकदमा

रिपोर्ट के अनुसार, पति ने 29 सितंबर 2025 को परिवार न्यायालय में विवाह विच्छेद का वाद दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच पुराने विवाद और लंबे समय से चले आ रहे अलगाव का मामला सामने आया। इसके बाद 5 सितंबर 2026 को परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का आदेश पारित कर दिया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में अदालत के फैसले का पूरा आदेश और तलाक दिए जाने का विशिष्ट कानूनी आधार उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि अदालत ने केवल लंबे अलगाव के आधार पर ही तलाक दिया।

लंबे अलगाव को लेकर कानून क्या कहता है?

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में तलाक के कई वैधानिक आधार हैं। इनमें क्रूरता और परित्याग यानी desertion भी शामिल हैं। धारा 13(1)(ib) के तहत यदि पति या पत्नी ने दूसरे पक्ष को लगातार कम से कम दो वर्ष की अवधि के लिए छोड़ दिया हो, तो निर्धारित कानूनी शर्तों और साक्ष्यों के आधार पर यह तलाक का आधार बन सकता है। हालांकि, इस मामले में परिवार न्यायालय ने किस विशिष्ट आधार को स्वीकार किया, इसकी पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट से नहीं होती। इसलिए अदालत के आदेश का पूरा पाठ सामने आए बिना फैसले की कानूनी वजह को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट भी लंबे समय से टूटे विवाह पर दे चुका है अहम फैसला

वैवाहिक रिश्तों के पूरी तरह टूट जाने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। संविधान पीठ ने 2023 में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण परिस्थितियों में irretrievable breakdown of marriage यानी विवाह के पूरी तरह टूट जाने के आधार पर विवाह समाप्त कर सकता है। हालांकि यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट की विशेष संवैधानिक शक्ति है और इसे सामान्य वैधानिक तलाक के आधार के तौर पर नहीं देखा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसा फैसला किसी स्वचालित फार्मूले के आधार पर नहीं दिया जाता। अदालत को यह देखना होता है कि विवाह वास्तव में पूरी तरह विफल हो चुका है, संबंध में सुधार की कोई वास्तविक संभावना नहीं है और परिस्थितियों में विवाह जारी रखना न्यायसंगत नहीं होगा। इसलिए इस आगरा के मामले में भी लंबे अलगाव का तथ्य महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अदालत के वास्तविक आदेश में दर्ज आधार ही अंतिम कानूनी स्थिति तय करेगा।

प्रेम विवाह से तलाक तक पहुंची 19 साल पुरानी कहानी

इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि जिस रिश्ते की शुरुआत परिवार के विरोध के बावजूद अपने जीवनसाथी को चुनने से हुई थी, वही रिश्ता वर्षों बाद अदालत के जरिए खत्म हुआ। 2007 में आर्य समाज मंदिर में विवाह, 2010 में बेटे का जन्म, 2012 में पत्नी का मायके चले जाना और फिर वर्षों तक अलगाव के बाद 2025 में तलाक का मुकदमा—इन घटनाओं ने इस रिश्ते को एक लंबे कानूनी और पारिवारिक संघर्ष में बदल दिया। अब 5 सितंबर 2026 के परिवार न्यायालय के आदेश के साथ दोनों के बीच वैवाहिक रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है।

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Pawan Kumar Singh Editor in Chief Taj News

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