National Desk, 🌐 tajnews.in | Tuesday, 28 July, 2026, 04:46:24 PM IST.

tajnews.in | ग्वालियर: जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित जनकवि मुकुट बिहारी सरोज समारोह में प्रख्यात कवि, लेखक और वैज्ञानिक गौहर रज़ा को वर्ष 2026 का सरोज सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार, कवि और संस्कृति जगत से जुड़े लोगों ने भाग लिया। इस दौरान साहित्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समकालीन सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श हुआ।

सम्मान ग्रहण करने के बाद गौहर रज़ा ने कहा कि समाज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में साहित्य की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उनके अनुसार कविता और साहित्य केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को दिशा देने और कठिन परिस्थितियों में संवाद बनाए रखने का भी कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि जनआंदोलनों में दिखाई देने वाली जनभावनाएं जनकवियों की विचारधारा की निरंतर प्रासंगिकता को भी रेखांकित करती हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास में अनेक रचनाकारों ने अपने लेखन के माध्यम से समाज को नई दृष्टि दी है। इस संदर्भ में उन्होंने जर्मन पादरी एवं लेखक मार्टिन निमोलर तथा उर्दू के प्रसिद्ध शायर फैज़ अहमद फैज़ की रचनाओं का उल्लेख किया। साथ ही जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की स्मृतियों को संरक्षित रखने के लिए सरोज स्मृति न्यास के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार यश मालवीय ने की। समारोह की शुरुआत में जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति न्यास की सचिव मान्यता सरोज ने सम्मान की परंपरा और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मान उन रचनाकारों को समर्पित है, जिन्होंने साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि अब तक 23 साहित्यकारों और कवियों को इस सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

इस अवसर पर वरिष्ठ गीतकार मोहन अंबर के गीतों पर केंद्रित डॉ. भगवान स्वरूप शर्मा ‘चैतन्य’ द्वारा संपादित ‘लोकमंगल’ के विशेषांक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मोहन अंबर के परिजन भी मौजूद रहे।
समारोह के दूसरे सत्र में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। गौहर रज़ा, यश मालवीय, मालिनी गौतम, मंजुल मयंक, महेश कटारे ‘सुगम’, महेंद्र मिहोनवी और शेफाली शर्मा सहित अनेक रचनाकारों ने समकालीन विषयों पर आधारित कविताएं और ग़ज़लें प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने सराहा।
आयोजकों के अनुसार वर्ष 2005 से लगातार आयोजित हो रहा यह सम्मान समारोह समय के साथ देश के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। आर्थिक सीमाओं के बावजूद इसकी परंपरा निरंतर जारी है और प्रत्येक वर्ष साहित्य तथा जनसरोकारों से जुड़े रचनाकारों को सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष का आयोजन जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की जन्म शताब्दी वर्ष को समर्पित रहा।
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Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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