जॉर्डन का दावा- 18 मिसाइलें हवा में मार गिराईं, दो आबादी से दूर गिरीं; होर्मुज में बढ़ा तनाव, अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पर भी ईरान का दावा
अंतरराष्ट्रीय डेस्क, 🌐 tajnews.in | बुधवार, 9 सितंबर 2026, 09:23:15 AM IST

tajnews.in | तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव अब समुद्र से निकलकर मध्य-पूर्व के दूसरे देशों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट करने का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा एक अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को पिछले दो दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश के बाद की गई।
इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन की दिशा में 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के अनुसार उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 18 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन ने किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी है।
अमेरिकी युद्धपोत को दो बार निशाना बनाने का दावा
CENTCOM के अनुसार IRGC ने पिछले दो दिनों में एक अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत पर दो बार बैलिस्टिक मिसाइल हमले की कोशिश की। अमेरिकी सेना का दावा है कि युद्धपोत दोनों हमलों से बच गया और क्षेत्र में अपनी गतिविधियां जारी रखीं। इन प्रयासों में किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की भी सूचना नहीं दी गई।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका ने इसे अपने नौसैनिक बलों की सुरक्षा के लिए की गई जवाबी कार्रवाई बताया है।
यह कार्रवाई पांच सितंबर को हुई उस कार्रवाई के बाद हुई है, जब अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट करने का दावा किया था। उस समय भी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई को ईरानी मिसाइल गतिविधियों से जोड़कर बताया था।
पांच टैंकरों के नाम भी बताए
CENTCOM के अनुसार मंगलवार की कार्रवाई में M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1 और M/T Riesco शामिल थे। ये चारों गल्फ ऑफ ओमान में मौजूद थे। पांचवां टैंकर M/T Derya खार्ग द्वीप के पास था।
अमेरिकी सेना के मुताबिक कार्रवाई से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद जहाजों को निशाना बनाकर निष्क्रिय किया गया।
अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज ईरान के अरबों डॉलर के ‘शैडो नेटवर्क’ से जुड़े थे, जिसके जरिए IRGC और उसके सहयोगियों के लिए धन जुटाया जाता है। यह अमेरिकी पक्ष का दावा है।
जॉर्डन की ओर 20 मिसाइलें, 18 को मार गिराने का दावा
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जॉर्डन की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के सशस्त्र बलों के मुताबिक उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 20 मिसाइलों को ट्रैक किया और इनमें से 18 को हवा में ही नष्ट कर दिया।
सेना के अनुसार दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मिसाइलों के मलबे और टुकड़े गिरने वाले स्थानों को सुरक्षित करने के लिए विशेष टीमें भेजी गईं। जॉर्डन ने नागरिकों से संदिग्ध मलबे को छूने के बजाय सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देने की अपील की।
जॉर्डन क्यों आया निशाने पर?
जॉर्डन अमेरिका का प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगी है और वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी है। ऐसे में जॉर्डन की दिशा में मिसाइल हमला संघर्ष के भौगोलिक विस्तार की आशंका बढ़ाता है।
ईरान की ओर से यह कार्रवाई अमेरिकी टैंकर हमलों के जवाब के रूप में सामने आई है। इससे पहले ईरानी अधिकारियों की ओर से चेतावनी दी जाती रही है कि ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने पर क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
खार्ग द्वीप के पास टैंकर पर कार्रवाई क्यों अहम?
पांच टैंकरों में M/T Derya का खार्ग द्वीप के पास होना इस घटनाक्रम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। खार्ग ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में शामिल है और समुद्री रास्ते से कच्चे तेल के निर्यात में इसकी अहम भूमिका है।
खार्ग और आसपास के समुद्री क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ने का असर ईरान के तेल निर्यात के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। यह क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है, जो दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है।
होर्मुज में भी बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील क्षेत्र बनता जा रहा है। यहां किसी बड़े सैन्य टकराव या जहाजों पर लगातार हमलों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद कुछ तेल टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने की चेतावनी दिए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। हालांकि ईरान द्वारा होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इस दावे को ईरानी पक्ष का दावा ही माना जाना चाहिए।
अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन कब्जे में लेने का ईरान का दावा
इसी बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र में एक अमेरिकी मानवरहित अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लिया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक इसकी पहचान अमेरिकी कंपनी Anduril के Dive-LD के रूप में की गई है। यह स्वायत्त अंडरवॉटर वाहन समुद्र के भीतर निगरानी, समुद्री बारूदी सुरंगों की पहचान, समुद्र तल की मैपिंग और पानी के नीचे मौजूद ढांचे की जांच जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ड्रोन को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे अलग
ड्रोन मामले में दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है। ईरान इसे अमेरिकी सैन्य उपकरण को कब्जे में लेने की सफलता के रूप में पेश कर रहा है। वहीं अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह पुराना मॉडल था और एक दिन से अधिक समय से खराब होकर पानी में निष्क्रिय पड़ा था। अमेरिकी पक्ष ने यह भी कहा कि इसमें कोई संवेदनशील या गोपनीय तकनीक नहीं थी।
इसलिए ड्रोन के कब्जे में आने की घटना और उसकी सैन्य अहमियत—दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है। कब्जे के दावे पर दोनों पक्षों की जानकारी सामने आई है, लेकिन इसके सामरिक महत्व को लेकर उनका आकलन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।
अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के साथ तेल नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ाया
अमेरिकी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निशाना सीधे ईरान के तेल कारोबार से जुड़े जहाज बने हैं। CENTCOM का आरोप है कि इन टैंकरों का इस्तेमाल IRGC से जुड़े शैडो नेटवर्क के जरिए धन जुटाने के लिए किया जा रहा था।
इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका सैन्य जवाब के साथ ईरान की तेल आय और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भी दबाव बढ़ा रहा है। दूसरी ओर ईरान की जवाबी मिसाइल कार्रवाई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ा रही है।
कुछ ही दिनों में तेजी से बढ़ा टकराव
पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच टकराव की बढ़ती रफ्तार साफ दिखाई देती है।
5 सितंबर को अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट करने की कार्रवाई की।
इसके बाद अमेरिकी सेना के अनुसार ईरान ने एक अमेरिकी युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की।
8 सितंबर को अमेरिका ने पांच और ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया।
इसके बाद ईरान ने जॉर्डन की दिशा में 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
जॉर्डन ने 18 मिसाइलों को मार गिराने और दो के आबादी से दूर गिरने का दावा किया।
इसी दौरान ईरान ने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लेने का दावा भी किया।
अब नजर होर्मुज और वैश्विक तेल आपूर्ति पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असर होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। यदि समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर हमले बढ़ते हैं, शिपिंग और बीमा लागत बढ़ती है या समुद्री यातायात बाधित होता है तो उसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा।
फिलहाल घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने की कथित कोशिश के जवाब में अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को नष्ट किया और इसके बाद ईरान की मिसाइलें जॉर्डन की दिशा में पहुंचीं।
यानी संघर्ष अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव तक सीमित नहीं दिख रहा। यदि क्षेत्रीय सहयोगी और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी इसकी चपेट में आते हैं तो मध्य-पूर्व की सुरक्षा के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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Pawan Kumar Singh
Chief Editor, Taj News
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