UP News: बीमार पिता की मौत के बाद भी नहीं पसीजे बेटे, पड़ोसियों ने कराया अंतिम संस्कार; कानपुर की घटना ने झकझोरा

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uttar pradesh desk, 🌐 tajnews.in | Updated: Saturday, 23 May 2026, 09:14 PM IST

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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से रिश्तों को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग पिता बीमारी से जूझता रहा लेकिन उसके दोनों बेटे अंतिम समय में भी उसके पास नहीं पहुंचे। पड़ोसियों ने इलाज से लेकर बेटों को बुलाने तक हरसंभव प्रयास किए। यहां तक कि एक बेटे को कानपुर बुलाने के लिए फ्लाइट का किराया भी भेजा गया, लेकिन वह शहर आने के बावजूद घर नहीं पहुंचा। आखिरकार इलाज के इंतजार में बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया और मोहल्ले के लोगों ने मिलकर अंतिम संस्कार कराया। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा और संवेदना का विषय बनी हुई है।

HIGHLIGHTS
  1. कानपुर के शास्त्रीनगर में बीमार बुजुर्ग की इलाज के अभाव में मौत।
  2. दोनों बेटे अंतिम समय में भी पिता के पास नहीं पहुंचे।
  3. पड़ोसियों ने बेटे को बुलाने के लिए 12 हजार रुपये तक भेजे।
  4. मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों ने मिलकर अंतिम संस्कार कराया।

जानकारी के मुताबिक कानपुर के शास्त्रीनगर स्थित जवाहर पार्क इलाके में रहने वाले 60 वर्षीय संतोष सिंह अपनी पत्नी रंजीत कौर के साथ रहते थे। पड़ोसियों के अनुसार संतोष सिंह लंबे समय से आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही है। ऐसे में बुजुर्ग दंपती का सहारा मोहल्ले के लोग ही बने हुए थे।

मोहल्ले के निवासी विधि राठौर और कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि संतोष सिंह का बड़ा बेटा जोगिंदर सिंह उर्फ सन्नी गुजरात में निजी नौकरी करता है जबकि उसकी पत्नी दुबई में रहती है। वहीं छोटा बेटा लकी लखनऊ में रह रहा है। पड़ोसियों के मुताबिक पिछले सात वर्षों से दोनों बेटे और बहुएं घर नहीं आए थे।

बताया गया कि करीब तीन महीने पहले संतोष सिंह को कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद उन्हें इंजेक्शन लगाए गए थे लेकिन पिछले आठ दिनों से उनकी तबीयत लगातार खराब होने लगी। धीरे-धीरे हालत इतनी बिगड़ गई कि वह ठीक से उठ-बैठ भी नहीं पा रहे थे।

पड़ोसी वेद प्रकाश राठौर ने बताया कि उन्होंने कई बार बड़े बेटे सन्नी को फोन करके पिता की गंभीर हालत के बारे में जानकारी दी और जल्द कानपुर आने को कहा। शुरुआत में बेटे ने पैसे न होने की बात कही। इसके बाद वेद प्रकाश ने 18 मई को उसके खाते में 12 हजार रुपये भेज दिए ताकि वह फ्लाइट से तुरंत कानपुर पहुंच सके।

हालांकि पैसे मिलने के बावजूद बेटा समय पर नहीं पहुंचा। पड़ोसियों के अनुसार वह बस से कानपुर आया और सीधे घर आने के बजाय फजलगंज स्थित एक होटल में रुक गया। जब मोहल्ले के लोगों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने होटल जाकर उसे पिता की हालत के बारे में बताया और घर चलने को कहा, लेकिन वह नहीं पहुंचा।

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उधर संतोष सिंह की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। पड़ोसी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 मई को जिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देकर इलाज कराने की गुहार लगाई। इसके बाद वे संतोष सिंह को हैलट अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया लेकिन तीमारदारी के लिए किसी परिजन की जरूरत बताई गई।

मोहल्ले के लोगों को उम्मीद थी कि बेटा अगले दिन तक पहुंच जाएगा इसलिए संतोष सिंह को वापस घर ले आया गया। मगर अगले दिन भी कोई बेटा नहीं पहुंचा। हालत और गंभीर होने लगी तो पड़ोसियों ने दोबारा प्रशासन से मदद मांगी। इसके बाद एक निजी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पत्र जारी किया गया।

शुक्रवार सुबह संतोष सिंह को निजी अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई। इस दौरान बड़े बेटे सन्नी को लगातार फोन किए गए। पड़ोसियों के मुताबिक वह हर बार 10 से 15 मिनट में आने की बात कहता रहा लेकिन बाद में उसने फोन बंद कर लिया।

स्थिति गंभीर होती देख सरकारी एंबुलेंस बुलाई गई लेकिन चालक ने निजी अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पड़ोसियों ने निजी एंबुलेंस का इंतजाम किया। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही संतोष सिंह की सांसें थम गईं।

मृत्यु की सूचना मिलने के बाद संतोष सिंह के साले हरभजन सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने मिलकर अंतिम संस्कार की तैयारी की और पार्थिव शरीर को भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह ले जाया गया जहां अंतिम संस्कार किया गया।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में लोगों के बीच चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन बेटों को पिता ने मेहनत करके बड़ा किया वही बेटे अंतिम समय में साथ नहीं खड़े हुए। वहीं दूसरी ओर पड़ोसियों ने इंसानियत का परिचय देते हुए इलाज से लेकर अंतिम संस्कार तक की जिम्मेदारी निभाई।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

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