Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Monday, April 27, 2026, 11:45:30 PM IST

संभल: भारतीय शादियां हमेशा अपनी भव्यता और लजीज व्यंजनों के लिए पहचानी जाती हैं। लोग शादियों में तरह-तरह के पकवानों और मिठाइयों का जमकर लुत्फ उठाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के संभल जिले में यही मिठाइयां अचानक लोगों की जान की दुश्मन बन गईं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, रजपुरा थाना क्षेत्र के धर्मपुर गांव में एक शादी समारोह के दौरान दावत खाने से हाहाकार मच गया। शादी में बनी लौकी की लौज (मिठाई) और रसगुल्ले खाने के बाद 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। आधी रात के बाद अचानक लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की भयानक शिकायतें शुरू हो गईं। इस घटना ने पूरे गांव और शादी समारोह में अफरातफरी का माहौल पैदा कर दिया। बीमार होने वालों में घराती और बराती दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं। हालत बिगड़ने पर ग्रामीणों ने तुरंत मरीजों को गवां कस्बे और आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया। वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही भी सामने आई। सूचना मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम शाम तक गांव नहीं पहुंची। आखिरकार, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। आइए, इस पूरी घटना, मिलावटखोरी के खेल और प्रशासनिक लापरवाही का बहुत ही गहराई से विश्लेषण करते हैं।
धर्मपुर गांव में आई थी बरात, खुशी का था माहौल
यह पूरी दर्दनाक घटना रविवार की रात की है। संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव मोलनपुर डांडा का एक छोटा सा मजरा धर्मपुर स्थित है। यहां रहने वाले वीरपाल की बेटी की शादी तय हुई थी। रविवार की रात को पूरे उत्साह और गाजे-बाजे के साथ गांव में बरात पहुंची। बरात गांव सिंघौला दौलतसिंह से आई थी। लड़की वालों ने मेहमानों के स्वागत के लिए बहुत ही शानदार तैयारियां की थीं। गांव और रिश्तेदारी के लोगों को मिलाकर इस शादी समारोह में लगभग 700 लोग शामिल हुए थे।
शादी में दावत का कार्यक्रम शुरू हुआ। वीरपाल ने पुलिस और प्रशासन को बताया कि उन्होंने दावत का सारा खाना और मिठाइयां अपने घर पर ही हलवाइयों से तैयार करवाई थीं। मिठाई के मीनू में विशेष रूप से रसगुल्ले और लौकी की लौज शामिल थी। उन्होंने मिठाइयां बनाने के लिए सारा मावा (खोया) और अन्य मसाले गवां कस्बे की विभिन्न दुकानों से खरीदे थे। शुरुआत में सब कुछ बहुत ही सामान्य और खुशनुमा लग रहा था। मेहमानों ने बड़े चाव से खाना खाया और मिठाइयों का लुत्फ उठाया। किसी को भी इस बात का जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही कुछ घंटों में यह दावत उनके लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत बन जाएगी।
आधी रात मचा हाहाकार, 100 से ज्यादा लोग पड़े बीमार
दावत खत्म होने के बाद कुछ लोग सोने चले गए। वहीं कुछ रिश्तेदार अपने घरों के लिए वापस रवाना हो गए। लेकिन रात करीब एक बजे के बाद गांव का माहौल अचानक पूरी तरह से बदल गया। एक-एक करके लोगों को भयंकर पेट दर्द की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते कई लोगों को उल्टी और दस्त शुरू हो गए। गांव निवासी छोटी ने बताया कि उसने रात करीब 12 बजे शादी में खाना और मिठाई खाई थी। इसके बाद ठीक दो बजे उसे तेज उल्टियां शुरू हो गईं। कुछ ही देर में उसे दस्त भी लग गए।
यह समस्या केवल छोटी तक सीमित नहीं रही। सुबह होते-होते धर्मपुर गांव के ही लगभग 50 लोग बुरी तरह से बीमार पड़ गए। इसी तरह सिंघौला दौलतसिंह गांव से आए करीब 30 बराती भी फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) का शिकार हो गए। जो रिश्तेदार दावत खाकर रात में ही अपने घर लौट गए थे, उन्होंने भी सुबह फोन करके अपने बीमार पड़ने की सूचना दी। ग्रामीणों के अनुसार, कुल मिलाकर 100 से ज्यादा लोग इस मिलावटी मिठाई का शिकार हुए हैं। एक साथ इतने सारे लोगों की तबीयत बिगड़ने से पूरे गांव में भारी अफरातफरी मच गई। खुशी का माहौल अचानक दहशत और खौफ में तब्दील हो गया।
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अस्पतालों में मरीजों की कतार, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
गांव में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। लोगों के शरीर में पानी की कमी होने लगी थी। ऐसे गंभीर समय में सरकारी स्वास्थ्य विभाग की भारी लापरवाही देखने को मिली। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग को इस घटना की सूचना तुरंत दे दी थी। इसके बावजूद सोमवार की शाम पांच बजे तक स्वास्थ्य विभाग की कोई भी मेडिकल टीम (Medical Team) या एंबुलेंस गांव में नहीं पहुंची। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया।
सरकारी मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मरीजों का इलाज कराना शुरू किया। उन्होंने निजी वाहनों और ट्रैक्टरों के जरिए मरीजों को गवां कस्बे और आसपास के निजी चिकित्सकों के पास पहुंचाया। अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज नीलम ने बताया कि दावत में लौकी की लौज खाते ही उसे बेचैनी और उल्टी सा महसूस होने लगा था। रात में जब उसकी हालत ज्यादा बिगड़ी, तो परिजन उसे तुरंत गवां के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे ड्रिप (Drip) चढ़ाई और दवाइयां दीं। कई घंटों के इलाज के बाद नीलम की हालत में थोड़ा सुधार हुआ और वह घर वापस लौट सकी। अगर ग्रामीण समय रहते निजी अस्पतालों का सहारा न लेते, तो कई मरीजों की जान पर बन सकती थी। प्रशासन की यह सुस्ती ग्रामीण इलाकों में लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलती है।
खाद्य विभाग की टीम ने लिए सैंपल, मिलावटी मावा पर शक
स्वास्थ्य विभाग की टीम भले ही समय पर न पहुंची हो, लेकिन सूचना मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की टीम आखिरकार गांव पहुंच गई। टीम ने सबसे पहले बीमार लोगों और उनके परिजनों से विस्तृत पूछताछ की। अधिकारियों ने जानने का प्रयास किया कि दावत में ऐसा कौन सा विशेष व्यंजन था, जिसे खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी। पूछताछ के दौरान लगभग सभी बीमार लोगों ने लौकी की लौज खाने की बात स्वीकार की। इसके अलावा कुछ लोगों ने रसगुल्ले खाने का भी जिक्र किया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राहुल सिंह ने पूरी स्थिति का जायजा लिया। राहुल सिंह ने बताया कि बीमार लोगों से बातचीत के आधार पर प्रथम दृष्टया यही प्रतीत होता है कि लौकी की लौज खाने से ही लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हुए हैं। उन्होंने हलवाई द्वारा तैयार की गई लौकी की लौज, रसगुल्ले और बचे हुए कच्चे मावे (Khoya) के सैंपल सील कर लिए हैं। इन सभी सैंपलों को लेबोरेटरी (Laboratory) में गहन जांच के लिए भेज दिया गया है। लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मिठाई में कौन सा हानिकारक रसायन या बैक्टीरिया मौजूद था। प्रशासन अब गवां कस्बे के उन दुकानदारों से भी पूछताछ करेगा, जहां से यह मावा खरीदा गया था।
शादियों में मिलावटखोरी का खेल: एक गंभीर सामाजिक समस्या
संभल की यह घटना केवल एक गांव की त्रासदी नहीं है। यह पूरे उत्तर प्रदेश में फैले मिलावटखोरों (Adulteration) के एक बहुत बड़े और खतरनाक नेटवर्क की ओर इशारा करती है। शादियों के सीजन में दूध, मावा और पनीर की भारी मांग होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए बाजार में सिंथेटिक (Synthetic) और नकली मावा धड़ल्ले से बेचा जाता है। मुनाफाखोर व्यापारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने से बिल्कुल नहीं हिचकिचाते।
यह सिंथेटिक मावा यूरिया, डिटर्जेंट और घटिया क्वालिटी के तेल से बनाया जाता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, लिवर और किडनी की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। खाद्य विभाग अक्सर शादियों के सीजन में कुछ छापे मारकर औपचारिकता पूरी कर लेता है, लेकिन इस रैकेट की जड़ें बहुत गहरी हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका (NSA) जैसी कठोर कार्रवाई करे। इसके साथ ही, आम लोगों को भी शादियों में बाजार का मावा खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। संभल का यह हादसा एक बहुत बड़ा सबक है। जब तक समाज और प्रशासन मिलकर इस मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाएंगे, तब तक शादियों की खुशियां ऐसे ही मातम में बदलती रहेंगी।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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