Agra Desk, tajnews.in | Thursday, April 30, 2026, 11:20:15 PM IST

आगरा: घुंघरुओं की मधुर झंकार और भावों की गहराई ने जब ताजनगरी के वातावरण को स्पंदित किया, तो लगा जैसे नृत्य केवल एक कला विधा नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा बन गया हो। विश्व नृत्य दिवस के पावन अवसर पर आगरा में नृत्य की इसी आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत और भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आध्यात्मिकता और भावों की विविधता में निहित है। हमारे शास्त्रों में इसे ‘रस’ की उच्चतम अभिव्यक्ति माना गया है, जो सीधे ईश्वर से संवाद का माध्यम बनती है। यह उस पश्चिमी नृत्य शैली से बिल्कुल अलग और श्रेष्ठ है, जो मुख्यतः केवल शारीरिक लय और ताल पर आधारित होती है। आगरा के ईदगाह क्षेत्र में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इसी सांस्कृतिक श्रेष्ठता को आधुनिकता के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया।


आध्यात्मिकता और कला का अद्भुत संगम
ब्रह्मा कुमारीज के कला व संस्कृति प्रभाग और नृत्य ज्योति कथक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ईदगाह स्थित केंद्र पर एक भव्य नृत्य संध्या एवं कला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ अश्विन बहन, बृज खंडेलवाल, ज्योति खंडेलवाल, अमर भाई और देवाशीष गांगुली सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और ध्यानयोग के साथ किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय नृत्य परंपराएं केवल मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और चुस्त बनाए रखने का एक सशक्त विज्ञान हैं।


कार्यक्रम के प्रथम सत्र में नृत्य ज्योति कथक केंद्र के नन्हे और प्रतिभाशाली बच्चों ने अपनी कला का जादू बिखेरा। सबसे पहले मंच पर शिव वंदना की गई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद संदेशात्मक नृत्य, कथक तराना और रंगीले राजस्थानी लोकनृत्य की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों को जीवंत बनाने में पाखी, अद्विका, अविका, पीहू, आध्या, आरना, दर्शना, प्रज्ञा, मोनिष्का, चांदनी, निमिषी, शालू, अवनी, अविशी, अंशिका, अक्षयिनी और कनिष्का जैसे बच्चों की मेहनत साफ नजर आई।


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कला संवाद: डिजिटल युग में नृत्य की चुनौतियां
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ही एक विचारोत्तेजक कला संवाद का भी आयोजन किया गया, जिसका विषय था: “नृत्य का बदलता स्वरूप: अभिव्यक्ति, प्रदर्शन और डिजिटल युग की दुविधा।”। इस संवाद में प्रबुद्ध वक्ताओं ने नृत्य के भविष्य और वर्तमान पर गंभीर मंथन किया। चर्चा में अश्विना बहन, ज्योति खंडेलवाल, मनु शर्मा, रश्मि खंडेलवाल, भरतनाट्यम गुरु आंचल जैन और नृत्य कोरियोग्राफर अजीत सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।


विशेषज्ञों का कहना था कि आज डिजिटल युग में नृत्य की प्रस्तुति का तरीका बदल रहा है। सोशल मीडिया के दौर में प्रदर्शन (Performance) पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जिससे कई बार नृत्य की मूल आत्मा और अभिव्यक्ति (Expression) ओझल हो जाती है। महेश धाकड़ ने इस अवसर पर बहुत ही मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा कि परंपराओं के साथ आधुनिकता को अंगीकार करना गलत नहीं है, लेकिन इसे भारतीय संस्कृति की शुद्धता को बनाए रखते हुए ही अपनाया जाना चाहिए।


गुरुओं का वंदन और युवा पीढ़ी का रुझान
कला और साधना के प्रति समर्पण को सम्मानित करने की परंपरा का निर्वहन करते हुए, इस अवसर पर प्रख्यात वरिष्ठ गायन गुरु अमिता त्रिपाठी और वरिष्ठ तबला गुरु रविंद्र सिंह को सम्मानित किया गया। इन दिग्गजों का सम्मान करते समय पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम का सफल और प्रभावशाली संचालन श्रुति सिन्हा ने किया, जबकि विशाल झा ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।


कार्यक्रम के दौरान बृज खंडेलवाल ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आगरा की युवा पीढ़ी तेजी से नृत्य की ओर आकर्षित हो रही है। चाहे वह शास्त्रीय नृत्य हो या समकालीन, बच्चों में सीखने की ललक बढ़ी है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज कई नृत्य अकादमियां खुल रही हैं और माध्यमिक स्तर पर भी इसे एक विषय के रूप में शामिल किया गया है। फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने भी नृत्य को घर-घर तक पहुंचाया है, जिससे आने वाले समय में कलाकारों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।


आयोजन में रिद्धि गुप्ता, आरती शर्मा, अंजली वर्मा, इदित्रि गुप्ता, विनीता गुप्ता, दिलीप अग्रवाल, किरण, पद्मिनी अय्यर, निधि पाठक और चतुर्भुज तिवारी सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल कला का उत्सव था, बल्कि यह इस बात का भी संकेत था कि नृत्य आज समाज में नई ऊर्जा और चेतना के साथ उभर रहा है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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