आगरा: “पृथ्वी दिवस की सौगंध”, यमुना किनारे ‘एक मुट्ठी मिट्टी’ हाथ में लेकर रिवर कनेक्ट अभियान ने लिया पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संकल्प

Agra Desk, Taj News | Wednesday, April 22, 2026, 09:30:30 PM IST

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आगरा: ताजनगरी आगरा की पहचान केवल उसकी ऐतिहासिक इमारतों से नहीं है, बल्कि उस जीवनदायिनी यमुना नदी से भी है जो सदियों से इस शहर की प्यास बुझाती आ रही है। बुधवार को ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) के अवसर पर आगरा के यमुना किनारे एक ऐसा अभूतपूर्व और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नए जन-आंदोलन की नींव रख दी है। आज यमुना के तट पर सिर्फ पारंपरिक आरती नहीं हुई, बल्कि एक ऐसा कठोर संकल्प लिया गया जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा। ‘रिवर कनेक्ट अभियान’ (River Connect Campaign) के बैनर तले सैकड़ों स्वयंसेवकों, पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों ने यमुना आरती स्थल पर एकत्रित होकर “एक मुट्ठी मिट्टी, एक वचन” के तहत पर्यावरण संरक्षण की एक बहुत बड़ी सौगंध ली। कार्यक्रम की शुरुआत एक मिनट के मौन के साथ हुई, जिसमें उन हिस्सों को याद किया गया जो आज प्रदूषण, अतिक्रमण और प्रशासनिक उपेक्षा की भारी मार झेल रहे हैं। लोगों ने धरती, आकाश और यमुना मैया को साक्षी मानकर यह प्रण लिया कि वे न तो खुद नदी में कचरा डालेंगे और न ही किसी और को ऐसा करने देंगे। “धरती बचेगी तो हम बचेंगे, नदियां बहेंगी तो जीवन बहेगा”— इसी गगनभेदी उद्घोष के साथ शहरवासियों ने एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया है।

पृथ्वी दिवस के अवसर पर आगरा में यमुना किनारे रिवर कनेक्ट अभियान के स्वयंसेवक शपथ लेते हुए
HIGHLIGHTS
  1. यमुना किनारे गूंजा संकल्प: ‘पृथ्वी दिवस’ पर रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्यों ने यमुना आरती स्थल पर ली पर्यावरण संरक्षण की सौगंध।
  2. ‘एक मुट्ठी मिट्टी, एक वचन’: स्वयंसेवकों ने हाथ में यमुना रज (मिट्टी) लेकर कसम खाई कि वे नदी में कचरा और प्लास्टिक नहीं डालेंगे।
  3. प्रदूषण के खिलाफ मौन: कार्यक्रम की शुरुआत एक मिनट के मौन से हुई, जिसमें यमुना की वर्तमान दुर्दशा और उपेक्षा पर गहरा दुख व्यक्त किया गया।
  4. जन-आंदोलन का रूप ले रही मुहिम: लोगों से अपील की गई कि वे मूक दर्शक न बनें, बल्कि कचरा प्रबंधन और स्वच्छता में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

“पृथ्वी दिवस की सौगंध”: क्या है वह प्रतिज्ञा जिसने जगाई नई उम्मीद?

यमुना आरती स्थल पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए आगरा के नागरिक

पृथ्वी दिवस के इस विशेष अवसर पर लिया गया संकल्प केवल कुछ शब्दों का उच्चारण नहीं था, बल्कि यह प्रकृति के प्रति मनुष्य के समर्पण का एक जीवंत प्रमाण था। यमुना किनारे खड़े होकर सभी आयु वर्ग के लोगों— जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल थे— ने एक स्वर में वह ऐतिहासिक सौगंध दोहराई, जिसकी गूंज प्रशासनिक अधिकारियों के कानों तक भी पहुंचनी चाहिए।

सौगंध के शब्द कुछ इस प्रकार थे: “हम आज धरती, आकाश और यमुना को साक्षी मानकर सौगंध लेते हैं कि प्रकृति को अपना संबंधी मानेंगे। नदी में कचरा नहीं डालेंगे, प्लास्टिक का दुरुपयोग नहीं करेंगे, और जल, जंगल, जमीन को नुकसान पहुँचाने वाली आदतों से दूर रहेंगे। हम चुप नहीं रहेंगे। गलत को रोकेंगे और खुद उदाहरण बनेंगे। अपने घर, मोहल्ले और शहर में सफाई व संरक्षण बढ़ाएँगे। हम जानते हैं: धरती बचेगी तो हम बचेंगे, नदियाँ बहेंगी तो जीवन बहेगा। आज हम जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रण लेते हैं।” इन शक्तिशाली शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। यह इस बात का प्रतीक है कि आगरा का नागरिक समाज अब अपनी नदियों को मरते हुए देखने के लिए तैयार नहीं है। वे समझ चुके हैं कि सरकार और प्रशासन के भरोसे बैठने का समय अब बीत चुका है; बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होगी।

हाथों में यमुना की मिट्टी लेकर कसम खाते हुए रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्य

‘एक मुट्ठी मिट्टी’ का मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रभाव

यमुना नदी के गिरते जल स्तर और प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त करते पर्यावरण प्रेमी

भारतीय संस्कृति में मिट्टी को ‘मां’ का दर्जा दिया गया है। जब कोई व्यक्ति मिट्टी हाथ में लेकर कसम खाता है, तो वह केवल एक भौतिक क्रिया नहीं होती, बल्कि उसका एक बहुत गहरा मनोवैज्ञानिक (Psychological) और आध्यात्मिक (Spiritual) प्रभाव होता है। रिवर कनेक्ट अभियान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “एक मुट्ठी मिट्टी, एक वचन” इसी गहरी सोच पर आधारित थी। कार्यक्रम के दौरान सभी स्वयंसेवकों, स्थानीय नागरिकों और बच्चों ने यमुना तट से एक मुट्ठी ‘यमुना रज’ (यमुना की पवित्र मिट्टी) उठाकर उसे साक्षी माना।

रिवर कनेक्ट अभियान के प्रमुख सूत्रधार और प्रख्यात पर्यावरणविद् बृज खंडेलवाल ने इस अनूठी पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह पहल केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि एक व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने का एक बहुत ही गंभीर प्रयास है। कसम जब मिट्टी पर ली जाती है, तो वह सिर्फ शब्द नहीं रहती, वह व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में उतरती है।” बृज खंडेलवाल के इन शब्दों ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि जब तक शहर का हर नागरिक यमुना को अपनी जीवनरेखा मानकर उससे भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ेगा, तब तक करोड़ों रुपये की सरकारी सफाई योजनाएं (Namami Gange / Yamuna Action Plan) कागजों तक ही सीमित रहेंगी। कार्यक्रम में यमुना भक्तों के हाथों में यमुना रज और आँखों में जो दृढ़ संकल्प दिखाई दे रहा था, उसने इस संदेश को और भी गहरा बना दिया कि आने वाली पीढ़ी अपने पर्यावरण और जल स्रोतों के प्रति पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक सजग और गंभीर है।

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दर्शक न बनें, बदलाव का हिस्सा बनें: प्लास्टिक और कचरे पर प्रहार

अर्थ डे 2026 पर रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्यों का सामूहिक चित्र
यमुना किनारे आरती और संकल्प सभा का आयोजन

शाम को यमुना आरती से ठीक पूर्व आयोजित इस विशेष संकल्प कार्यक्रम में पर्यावरणविदों ने एक बहुत ही मार्मिक और सीधी अपील की। उन्होंने कहा कि शहर के नागरिक अब केवल मूक दर्शक (Silent Spectators) बनकर न रहें। जब तक लोग अपने घरों से निकलने वाले कचरे को सीधे नालों और नदियों में फेंकना बंद नहीं करेंगे, तब तक कोई भी सरकार नदियों को स्वच्छ नहीं कर सकती। अभियान के तहत उपस्थित जनसमूह से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने स्तर पर जीवनशैली में छोटे-छोटे लेकिन प्रभावशाली बदलाव अपनाएं।

इन बदलावों में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) का बहिष्कार करना, घर के कचरे का सही तरीके से निपटान (Waste Management) करना और यमुना किनारे की स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान देना शामिल है। यह स्पष्ट किया गया कि यमुना में पॉलीथिन, मूर्तियां और अन्य अघुलनशील सामग्री (Non-biodegradable waste) फेंकना पाप के समान है, जो जलीय जीवों (Aquatic Life) के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण का यह संदेश केवल 22 अप्रैल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह हर नागरिक की दैनिक दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बनना चाहिए।

यमुना संरक्षण को लेकर चर्चा करते हुए आगरा के गणमान्य नागरिक
यमुना नदी में प्रदूषण और घटते जल स्तर का एक दृश्य

जन-आंदोलन का रूप ले रहा है ‘रिवर कनेक्ट अभियान’

गौरतलब है कि रिवर कनेक्ट अभियान पिछले कई वर्षों से लगातार यमुना के संरक्षण, उसकी साफ-सफाई और उसके पुनर्जीवन (Rejuvenation) के लिए जमीनी स्तर पर प्रयासरत है। यह कोई एक दिन का इवेंट नहीं है। इस संस्था द्वारा यमुना किनारे नियमित रूप से आरती की जाती है, सफाई अभियान चलाए जाते हैं, स्कूलों और कॉलेजों में जनजागरूकता रैलियां (Awareness Rallies) निकाली जाती हैं, और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से नदी के मुद्दे को जिंदा रखा जाता है। इन्हीं अनवरत प्रयासों का परिणाम है कि आज यह पहल आगरा शहर में एक बहुत मजबूत और प्रभावी ‘जन आंदोलन’ (Mass Movement) का रूप ले रही है।

पृथ्वी दिवस संकल्प कार्यक्रम में शामिल पर्यावरण प्रेमी
यमुना की दुर्दशा पर मंथन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता

आज ‘पृथ्वी दिवस’ पर लिया गया यह संकल्प उसी महान दिशा में बढ़ाया गया एक और ठोस कदम था। यह कदम भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन पर्यावरण को बचाने के लिए यह बेहद जरूरी है। यमुना सिर्फ एक भौगोलिक नदी नहीं है, बल्कि यह आगरा की जीवनरेखा (Lifeline) है, इसका इतिहास है, इसकी संस्कृति है। आगरा का पूरा वजूद इस नदी के किनारे टिका हुआ है। ऐसे में उसे बचाना अब कोई ‘विकल्प’ (Option) नहीं रह गया है, बल्कि यह हर नागरिक की पहली और सबसे बड़ी ‘जिम्मेदारी’ (Responsibility) बन चुका है।

इन प्रमुख हस्तियों ने की शिरकत, यमुना मैया की हुई विशेष आरती

यमुना मैय्या की विशेष आरती में भाग लेते हुए श्रद्धालु और स्वयंसेवक
रिवर कनेक्ट अभियान के तहत यमुना आरती का भव्य दृश्य

पृथ्वी दिवस के इस भव्य और विचारोत्तेजक कार्यक्रम में आगरा शहर के कई प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजीव गुप्ता, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, चतुर्भुज तिवारी, पद्मिनी अय्यर, रिमझिम वर्मा, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, शाहतोश गौतम, राज कुमार गुप्ता, सतीश गुप्ता, मुकेश चौधरी, गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, अभिनव लाला, दीपक राजपूत, जगन प्रसाद तेहरिया और डॉ. मुकुल पांड्या उपस्थित रहे। इन सभी लोगों ने अपनी उपस्थिति से यह साबित किया कि पर्यावरण का मुद्दा किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा मुद्दा है।

संकल्प और उद्बोधन के पश्चात, गोधूलि बेला (शाम के समय) में यमुना मैय्या की एक अत्यंत मनमोहक और भव्य विशेष आरती (Yamuna Aarti) का आयोजन किया गया। दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब यमुना की लहरों पर आरती की लौ प्रतिबिंबित हुई, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और अलौकिक हो गया। इस आरती ने एक बार फिर सभी को यह याद दिलाया कि नदियां हमारे लिए पूजनीय हैं और उनका सम्मान करना ही हमारे अस्तित्व की सबसे बड़ी गारंटी है। अब देखना यह है कि पृथ्वी दिवस पर लिया गया यह ‘एक मुट्ठी मिट्टी’ का संकल्प आने वाले दिनों में प्रशासन और आम जनता की आदतों में कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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