Uttar Pradesh Desk, tajnews.in | Sunday, April 19, 2026, 02:45:30 PM IST

फतेहपुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्याली चाय भी कब और कैसे एक बड़ा सियासी बवंडर खड़ा कर दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। फतेहपुर जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अल्लीपुर बहेरा में एक गरीब चायवाले का परिवार इन दिनों अजीबोगरीब दहशत और सरकारी प्रताड़ना के साये में जी रहा है। दुकानदार शेषमणि और उनके युवा पुत्र आर्यन यादव का आरोप है कि जब से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने उनकी दुकान पर रुककर चाय पी है, तब से ही उनकी किस्मत रूठ गई है और प्रशासन उनकी जान का दुश्मन बन गया है। पहले खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने मिलावट के शक में जिले के इतिहास में पहली बार किसी सड़क किनारे की चाय की दुकान पर छापा मारा और सैंपल भरे, उसके बाद शुक्रवार को कुछ दबंगों ने परिवार के साथ दिनदहाड़े मारपीट और लूटपाट की घटना को अंजाम दे डाला। इस पूरी प्रशासनिक और आपराधिक कार्रवाई ने यूपी की सियासत का पारा चरम पर पहुंचा दिया है। खुद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया (X) पर ‘पीडीए टी’ (PDA Tea) का नारा देते हुए सत्ताधारी भाजपा सरकार और प्रशासन पर बेहद तीखा हमला बोला है। दहशत में जी रहे परिवार ने फिलहाल अपनी चाय की दुकान पर ताला जड़ दिया है।
20 फरवरी की वो चाय और सोशल मीडिया की सुर्खियां
इस पूरे विवाद की जड़ें आज से लगभग दो महीने पहले, 20 फरवरी 2026 को हुए एक हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट से जुड़ी हुई हैं। उस दिन खागा तहसील क्षेत्र के अल्लीपुर चौकी चौराहे से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का भारी-भरकम काफिला गुजर रहा था। अचानक अखिलेश यादव ने अपना काफिला रुकवाया और सड़क किनारे स्थित शेषमणि की एक साधारण सी चाय की दुकान (Tea Stall) पर जाकर बैठ गए। वहां उन्होंने शेषमणि के युवा और होनहार पुत्र आर्यन यादव के हाथों से बनी चाय बड़े चाव से पी।
चाय पीने के दौरान अखिलेश यादव ने आर्यन की मेहनत और उसकी आत्मनिर्भर बनने की सोच की काफी प्रशंसा की थी। उस समय आर्यन ने पूर्व मुख्यमंत्री को चाय पिलाते हुए अपनी तस्वीरें बड़े गर्व के साथ सोशल मीडिया पर साझा की थीं। वे तस्वीरें रातों-रात वायरल हो गईं और आर्यन की यह छोटी सी दुकान पूरे इलाके में ‘चर्चित चाय की दुकान’ बन गई। लेकिन आर्यन और उसके पिता शेषमणि को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि यह अचानक मिली वीआईपी शोहरत (VIP Fame) उनके लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और सियासी अभिशाप (Curse) बनने वाली है। परिवार का आरोप है कि बस उसी दिन के बाद से ही उन्हें लगातार किसी न किसी बहाने से परेशान किया जाने लगा।
खाद्य विभाग का छापा: एल्युमिनियम के बर्तन और सीलिंग की धमकी
प्रशासनिक प्रताड़ना का यह सिलसिला शुक्रवार को हुई मारपीट से ठीक दो दिन पहले यानी 15 अप्रैल को अपने चरम पर पहुंच गया। परिवार के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) राजेश दीक्षित अपनी पूरी टीम और पुलिस बल के साथ अचानक उनकी छोटी सी दुकान पर धमक पड़े। टीम ने आरोप लगाया कि उनकी चाय पत्ती में मिलावट है और उन्होंने वहां से चाय पत्ती का नमूना (Tea Leaves Sample) भर लिया। जिले के पुराने जानकारों का कहना है कि फतेहपुर के इतिहास में यह शायद पहला मौका होगा जब खाद्य विभाग की टीम ने किसी फाइव-स्टार होटल या बड़ी मिठाई की दुकान के बजाय सड़क किनारे की एक मामूली चाय की दुकान पर इस तरह से छापा मारा हो।
दुकानदार आर्यन और शेषमणि का गंभीर आरोप है कि खाद्य विभाग के अधिकारियों ने केवल सैंपल ही नहीं लिया, बल्कि उन्हें खुलेआम धमकाया भी। अधिकारियों ने आर्यन को डांटते हुए कहा कि वह एल्युमिनियम (Aluminium) के बर्तनों में चाय क्यों बनाता है और इसी बहाने से उन्होंने दुकान को सील (Seal) करने की कड़ी धमकी दी। वहीं, इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश दीक्षित ने कहा है कि उन्होंने यह कार्रवाई ‘आईजीआरएस पोर्टल’ (IGRS Portal) पर आई एक ऑनलाइन शिकायत के आधार पर की है। उन्होंने धमकी देने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि सैंपल को जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
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मारपीट, पुलिस की लीपापोती और दुकान पर लगा ताला
प्रशासनिक छापे के दो दिन बाद ही, शुक्रवार को इस पीड़ित परिवार पर एक और कहर टूट पड़ा। दुकान पर आए कुछ दबंगों ने आर्यन और उसके परिवार के साथ सरेआम गाली-गलौज और मारपीट की घटना को अंजाम दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंगों ने उनके साथ लूटपाट (Robbery) भी की। जब पीड़ित परिवार ने सुल्तानपुर घोष थाने में गुहार लगाई, तो पुलिस का रवैया भी बेहद निराशाजनक और लीपापोती करने वाला रहा।
सीओ (CO) दुर्गेश दीप ने बताया कि पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन विवेचना (Investigation) के दौरान लूट का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। इसलिए पुलिस ने एफआईआर (FIR) से ‘लूट’ की गंभीर धारा को हटा दिया है और आरोपियों (जिनमें जरजीस समेत तीन लोग शामिल हैं) का चालान केवल मामूली धाराओं और शांतिभंग में किया गया है। पुलिस की इस एकतरफा थ्योरी के अनुसार, यह पूरा विवाद केवल ‘चाय के पैसे पहले मांगने’ को लेकर हुआ था। लगातार हो रही इस दोहरी प्रताड़ना (प्रशासनिक और आपराधिक) और न्याय न मिलने की निराशा से टूटकर दुकानदार शेषमणि ने अपनी चाय की दुकान को पूरी तरह से बंद (Shop Closed) कर दिया है। उनका कहना है कि उनका पूरा परिवार इस समय भारी दहशत और सदमे में है, जिसके कारण रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा यह होटल बंद करना पड़ा है।
अखिलेश यादव का तीखा तंज: अब बनेगी ‘पीडीए टी’
फतेहपुर के एक छोटे से गांव में चायवाले के साथ हुए इस अन्याय और कथित सरकारी उत्पीड़न की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। जैसे ही यह खबर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मिली, उन्होंने बिना देर किए सत्ताधारी भाजपा सरकार और प्रशासन पर बेहद तीखा और व्यंग्यात्मक राजनीतिक हमला (Political Attack) बोल दिया। अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (X – पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए इस पूरी घटना को युवाओं के रोजगार पर सीधा हमला बताया है।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा, “प्रिय चायवालों, फतेहपुर में मैंने आत्मनिर्भर आर्यन की दुकान पर प्रेमपूर्वक चाय पी थी। लेकिन इसके बाद फूड सिक्योरिटी विभाग ने उसे यह कहकर धमकी दी कि तुम एल्युमीनियम के बर्तन में चाय बनाते हो, हम दुकान सील कर देंगे। अच्छा हुआ अधिकारियों ने यह नहीं कहा कि तुम ‘लाल सिलिंडर’ पर चाय बनाते हो तो सील कर देंगे… वैसे कह भी नहीं पाते क्योंकि महंगाई के इस दौर में सिलिंडर मिल ही नहीं रहा है।”
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि यह धमकी केवल आर्यन को नहीं है, बल्कि उन लाखों बेरोजगार युवाओं को है जो इस कठिन दौर में एक छोटी सी चाय की दुकान के सहारे ‘आत्मनिर्भर’ (Self-reliant) बनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि इस विभाग का नाम ‘खाद्य सुरक्षा’ की जगह ‘मिलावट विभाग’ रख देना चाहिए। अपनी पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए ऐलान किया कि इस अन्याय के खिलाफ अब पूरे प्रदेश के युवा और चाय विक्रेता ‘पीडीए’ (PDA – पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) से जुड़ेंगे और उत्तर प्रदेश में एक नई चाय की शुरुआत करेंगे, जिसका नाम होगा— **’पीडीए टी’ (PDA Tea)**। इस घटना ने एक बार फिर यूपी में विपक्ष को सरकार की कानून-व्यवस्था और रोजगार नीति पर सवाल उठाने का एक बड़ा मौका दे दिया है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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